ITR Filing New Rules 2026: फॉर्म में 2 एड्रेस अनिवार्य, जानें टैक्स फाइलिंग के नए नियम
आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म नोटिफाई कर दिए हैं। इनमें टैक्सपेयर्स की सहूलियत और डेटा की सटीकता, दोनों को ध्यान में रखते हुए कई बड़े बदलाव किए गए हैं। अगर आप 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न फाइल करने की सोच रहे हैं, तो इन नए नियमों को ठीक से समझ लेना जरूरी है। इस बार सबसे अहम बदलाव पते और संपर्क जानकारी को लेकर आया है।
हाइलाइट्स
- सभी ITR फॉर्म में ‘सेकेंडरी एड्रेस’ देना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
- प्रतिनिधि असेस की जानकारी देने की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया गया है।
- कैपिटल गेन्स रिपोर्टिंग का तरीका भी पहले से ज्यादा आसान हो गया है।
अब देना होगा ‘सेकेंडरी एड्रेस’
पिछले साल तक ITR फॉर्म में सिर्फ एक पता दर्ज करना होता था। लेकिन टैक्समैन की रिसर्च के अनुसार, अब ITR-1 से ITR-7 तक — यानी सभी फॉर्म्स में — ‘सेकेंडरी एड्रेस’ के लिए एक अलग फील्ड जोड़ दी गई है। मतलब साफ है: मुख्य पते के साथ-साथ एक वैकल्पिक पता भी देना होगा।
इसके अलावा, फॉर्म में पहले से मौजूद दो मोबाइल नंबर और दो ईमेल आईडी के कॉलम को अब ‘प्राइमरी’ और ‘सेकेंडरी’ कॉन्टैक्ट डिटेल्स के रूप में नया नाम दिया गया है। इससे विभाग को टैक्सपेयर तक पहुंचना और आसान हो जाएगा।
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ये बदलाव भी हैं आपके काम के
1. रिप्रेजेंटेटिव असेस की जानकारी हुई आसान
अगर आपकी तरफ से कोई प्रतिनिधि रिटर्न फाइल कर रहा है, तो अब उसे पहले जितनी लंबी जानकारी नहीं देनी होगी। नए फॉर्म में केवल तीन चीजें मांगी जाएंगी:
- प्रतिनिधि का नाम
- प्रतिनिधि की ईमेल आईडी
- प्रतिनिधि का संपर्क नंबर
पहले पैन, आधार और पता जैसी तमाम जानकारियां देनी होती थीं — इन्हें अब हटा दिया गया है।
2. कैपिटल गेन्स रिपोर्टिंग में सरलता
वित्त वर्ष 2024-25 में 23 जुलाई 2024 को टैक्स दरों में बदलाव होने की वजह से कैपिटल गेन्स को दो हिस्सों में बांटकर दिखाना जरूरी था — यानी 23 जुलाई से पहले और बाद का अलग-अलग हिसाब।
नए फॉर्म में इस दोहरी रिपोर्टिंग (Bifurcation) को खत्म कर दिया गया है। AY 2026-27 में पूरे साल एक ही टैक्स रेट लागू है, इसलिए पुराने और नए रेट के हिसाब से अलग-अलग गणना करने की माथापच्ची अब नहीं रहेगी।
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ध्यान देने वाली जरूरी बातें
यह स्पष्ट रहे कि ये नए फॉर्म AY 2026-27 यानी FY 2025-26 के लिए हैं। फॉर्म भले ही अपडेट हो गए हों, लेकिन इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के मौजूदा प्रावधानों का पालन करना अभी भी जरूरी रहेगा।
सरकार की कोशिश ITR फाइलिंग को ज्यादा ‘यूजर फ्रेंडली’ बनाने की है। सेकेंडरी एड्रेस जोड़ना और कॉन्टैक्ट डिटेल्स को प्राइमरी-सेकेंडरी कैटेगरी में बांटना — इन दोनों बदलावों का मकसद संचार में होने वाली गलतियों को कम करना है।
निष्कर्ष और सलाह
AY 2026-27 के नए ITR फॉर्म में हुए बदलाव छोटे जरूर लग सकते हैं, लेकिन फाइलिंग के वक्त इनकी अनदेखी करना परेशानी बढ़ा सकती है। टैक्सपेयर्स को सलाह है कि वे अभी से एक अतिरिक्त पता और एक चालू मोबाइल नंबर अपने रिकॉर्ड में तैयार रख लें — ताकि 31 जुलाई की डेडलाइन पर कोई हड़बड़ी न हो।
अपने टैक्स एक्सपर्ट या CA से एक बार इन बदलावों की पुष्टि जरूर कर लें और समय से पहले रिटर्न फाइल करें।
FAQ
Q1. AY 2026-27 के ITR फॉर्म में ‘सेकेंडरी एड्रेस’ क्या होता है?
सेकेंडरी एड्रेस वह वैकल्पिक पता है जो अब ITR-1 से ITR-7 तक सभी फॉर्म्स में भरना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले केवल एक मुख्य पता देना होता था। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि आयकर विभाग जरूरत पड़ने पर टैक्सपेयर से किसी दूसरे पते पर भी संपर्क कर सके और संचार में कोई रुकावट न आए।
Q2. नए ITR फॉर्म में प्रतिनिधि असेस (Representative Assessee) के लिए क्या बदला है?
पहले प्रतिनिधि को पैन, आधार, पता समेत कई जानकारियां देनी होती थीं। नए फॉर्म में इसे सरल कर दिया गया है — अब केवल नाम, ईमेल आईडी और संपर्क नंबर ही देना होगा। इससे उन टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी जिनकी तरफ से कोई और रिटर्न फाइल करता है।
Q3. AY 2026-27 में कैपिटल गेन्स की रिपोर्टिंग में क्या आसानी हुई है?
वित्त वर्ष 2024-25 में 23 जुलाई 2024 को टैक्स दरें बदलने की वजह से कैपिटल गेन्स को दो हिस्सों में दिखाना पड़ता था। AY 2026-27 के लिए पूरे साल एक ही टैक्स रेट लागू है, इसलिए नए फॉर्म में यह दोहरी रिपोर्टिंग (Bifurcation) हटा दी गई है। अब एक ही बार में कैपिटल गेन्स दर्ज करनी होगी।
Q4. नए ITR फॉर्म किस वित्त वर्ष पर लागू होते हैं?
ये नए ITR फॉर्म असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए हैं, जो वित्त वर्ष 2025-26 की आय पर लागू होते हैं। फॉर्म में बदलाव हुए हैं, लेकिन इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के प्रावधान वही रहेंगे — केवल जानकारी भरने का तरीका बदला है।
Q5. ITR फाइलिंग से पहले टैक्सपेयर को क्या तैयारी करनी चाहिए?
नए नियमों के मद्देनजर टैक्सपेयर्स को चाहिए कि वे एक वैकल्पिक पता और एक चालू मोबाइल नंबर पहले से तैयार रख लें। इसके अलावा प्राइमरी और सेकेंडरी ईमेल आईडी भी अपडेट कर लें। समय से पहले यानी 31 जुलाई 2026 की डेडलाइन से काफी पहले रिटर्न फाइल करना हमेशा बेहतर होता है।
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