पहली बार ITR भर रहे हैं? इन 7 फॉर्म्स में से अपना सही फॉर्म पहचानें
पहली बार ITR भरने बैठते हैं तो सबसे पहला सवाल यही आता है कि फॉर्म कौन सा भरूँ। ITR-1 से ITR-7 तक सात अलग-अलग फॉर्म हैं और हर एक किसी खास तरह की आय के लिए बनाया गया है। बहुत से लोग यह सोचकर कोई भी फॉर्म भर देते हैं कि बाद में देखा जाएगा। यह गलती महंगी पड़ सकती है। गलत फॉर्म चुना तो रिटर्न लटक सकती है, प्रोसेस होने में देरी हो सकती है या फिर खारिज भी हो सकती है। तो एक बार ठीक से समझ लीजिए कि आपकी आय किस कैटेगरी में आती है।
सही फॉर्म क्यों जरूरी है?
इनकम टैक्स विभाग हर तरह की आय के लिए अलग फॉर्म तय करता है। सैलरी वालों की बात अलग है, बिजनेस करने वालों की अलग, और कंपनियों व ट्रस्ट की बात बिल्कुल अलग। गलत फॉर्म भरा तो रिटर्न में गलती मानी जाती है और दोबारा सही फॉर्म से फाइल करनी पड़ती है। वक्त और झंझट दोनों बचाने हों तो पहले यह तय कर लें कि आपका फॉर्म कौन सा है।
टैक्स एक्सपर्ट भी यही कहते हैं कि पहले अपनी आय के स्रोत को समझो, फिर फॉर्म चुनो। आय एक जगह से है या कई जगह से, इसी पर सब कुछ निर्भर करता है।
ITR-1 – सैलरी और पेंशन वालों के लिए
यह सबसे आम और सबसे सरल फॉर्म है। देश में सबसे ज्यादा लोग यही फॉर्म भरते हैं। अगर नीचे दी गई सभी शर्तें आप पर लागू होती हैं तो आपका फॉर्म यही है।
पात्रता:
- सालाना कुल आय 50 लाख रुपये से कम हो
- आय का मुख्य स्रोत सैलरी या पेंशन हो
- एक ही मकान हो (दो या उससे ज्यादा हों तो यह फॉर्म नहीं चलेगा)
- अन्य स्रोतों से थोड़ी-बहुत आय हो जैसे बचत खाते का ब्याज, FD का ब्याज या इनकम टैक्स रिफंड पर मिला ब्याज
ध्यान रखें: अगर आपके पास कृषि आय है और वो 5,000 रुपये से ज्यादा है, या विदेश में कोई संपत्ति या आय है, तो ITR-1 नहीं भर सकते।
ITR-2 – ज्यादा आय और कैपिटल गेन वालों के लिए
जब मामला ITR-1 से बड़ा हो जाए तो ITR-2 आता है। यह उन लोगों के लिए है जिनकी आय थोड़ी जटिल है।
पात्रता:
- सालाना आय 50 लाख रुपये से ज्यादा हो
- एक से ज्यादा मकान हों
- शेयर बाजार, म्युचुअल फंड या किसी प्रॉपर्टी की बिक्री से कैपिटल गेन हुआ हो
- विदेश में कोई संपत्ति हो या विदेश से आय आती हो
- लॉटरी या घुड़दौड़ जैसी आय हो
यह फॉर्म उन नौकरीपेशा लोगों के लिए भी है जिन्होंने शेयर या म्युचुअल फंड में निवेश किया है और उससे कमाई या नुकसान हुआ है।
ITR-3 – खुद का बिजनेस या प्रोफेशन चलाने वालों के लिए
डॉक्टर, वकील, CA, आर्किटेक्ट, कंसल्टेंट या जो भी अपना कारोबार चलाते हैं, उनके लिए ITR-3 है। सैलरी के साथ-साथ अगर बिजनेस या फ्रीलांसिंग से भी कमाई हो रही है, तब भी यही फॉर्म लागू होगा।
पात्रता:
- व्यवसाय या पेशे से आय हो
- किसी कंपनी में पार्टनर हों और वहाँ से आय आती हो
- सैलरी के अलावा कोई बिजनेस इनकम भी हो
ITR-3 में पूरा बैलेंस शीट और प्रॉफिट-लॉस अकाउंट देना होता है, इसलिए इसे भरना थोड़ा ज्यादा मेहनत का काम है। किसी CA या टैक्स सलाहकार की मदद लेना सही रहेगा।
ITR-4 – छोटे कारोबारियों के लिए आसान विकल्प
अगर आप छोटे कारोबारी हैं और हर साल पूरा हिसाब-किताब रखना मुश्किल लगता है, तो सरकार ने आपके लिए Presumptive Taxation Scheme बनाई है। इसमें आपको असली मुनाफे की जगह अनुमानित मुनाफे पर टैक्स देना होता है और उसके लिए ITR-4 भरना होता है।
पात्रता:
- धारा 44AD के तहत बिजनेस टर्नओवर 3 करोड़ तक (नकद लेनदेन 5% से कम हो तो)
- धारा 44ADA के तहत प्रोफेशनल आय 75 लाख तक
- धारा 44AE के तहत ट्रांसपोर्ट बिजनेस
इस फॉर्म में बैलेंस शीट नहीं देनी होती, इसलिए छोटे व्यापारियों के लिए यह काफी सुविधाजनक है।
ITR-5 – पार्टनरशिप फर्म और अन्य संस्थाओं के लिए
यह फॉर्म व्यक्तियों के लिए नहीं है। पार्टनरशिप फर्म, LLP (लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप), AOP (Association of Persons), BOI (Body of Individuals) और को-ऑपरेटिव सोसाइटी इसमें आती हैं। कुछ ट्रस्ट भी इसी फॉर्म में आते हैं, बशर्ते वे ITR-7 की कैटेगरी में न आते हों।
ITR-6 – कंपनियों के लिए
देश में रजिस्टर्ड हो या विदेशी, हर कंपनी के लिए ITR-6 है। जो संस्था कानून के अनुसार कंपनी मानी जाती है, चाहे वो किसी भी क्षेत्र में काम करती हो, उसे यही फॉर्म भरना होगा। इसे ऑनलाइन ही दाखिल किया जा सकता है और डिजिटल सिग्नेचर जरूरी है।
ITR-7 – टैक्स छूट वाली संस्थाओं के लिए
धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्ट, राजनीतिक पार्टियाँ, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थान इस फॉर्म में आते हैं। ये वो संस्थाएँ हैं जो आयकर अधिनियम की धाराओं 139(4A), 139(4B), 139(4C) या 139(4D) के तहत रिटर्न दाखिल करती हैं और जिन्हें टैक्स में छूट मिलती है।
आखिर में एक जरूरी बात
अपनी आय का स्रोत तय कर लें, फॉर्म खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा। अगर एक से ज्यादा तरह की आय है तो थोड़ा ध्यान से देखें कि कौन सा फॉर्म सब कुछ कवर करता है। आमतौर पर जो फॉर्म नंबर में बड़ा होता है, वो ज्यादा जटिल आय के लिए होता है। शक हो तो किसी CA या टैक्स प्रोफेशनल से एक बार बात कर लें, एक छोटी सी गलती बाद में बड़ा सिरदर्द बन सकती है।
FAQ
Q: ITR-1 और ITR-2 में मुख्य अंतर क्या है?
A: ITR-1 मुख्य रूप से उन नौकरीपेशा लोगों के लिए है जिनकी सालाना आय 50 लाख से कम है और सिर्फ एक घर है। वहीं, अगर आपकी आय 50 लाख से ज्यादा है, एक से अधिक घर हैं, या आप शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं, तो आपको ITR-2 चुनना होगा।
Q: मैं कैसे पता करूं कि मुझे कौन सा ITR फॉर्म भरना चाहिए?
A: सबसे पहले अपनी कमाई के सभी स्रोतों की एक लिस्ट बनाएं, जैसे सैलरी, बिजनेस, या कैपिटल गेन। फिर अपनी कुल सालाना आय का हिसाब लगाएं और इनकम टैक्स पोर्टल पर दिए गए फॉर्म के नियमों से उसका मिलान कर लें ताकि सही ITR फॉर्म चुना जा सके।
Q: अगर मैं गलती से गलत ITR फॉर्म भर दूं तो क्या होगा?
A: गलत फॉर्म भरने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को ‘डिफेक्टिव’ घोषित कर सकता है। इसके बाद आपको डिपार्टमेंट से एक नोटिस मिलेगा और एक तय समय के भीतर सही फॉर्म के साथ दोबारा रिटर्न फाइल करना होगा।
Q: छोटे बिजनेस वालों के लिए ITR-3 और ITR-4 में से कौन सा बेहतर है?
A: अगर आप एक छोटे व्यापारी या फ्रीलांसर हैं और ऑडिट के भारी-भरकम झंझट से बचना चाहते हैं, तो अनुमानित आय योजना के तहत ITR-4 आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। लेकिन अगर आप अपने बिजनेस के सभी खर्चों का विस्तृत हिसाब-किताब दिखाकर टैक्स बचाना चाहते हैं, तब ITR-3 सही रहेगा।
Q: शेयर बाजार से होने वाली कमाई के लिए सबसे सही ITR फॉर्म कौन सा है?
A: अगर आप शेयरों या म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं और आपको कैपिटल गेन हुआ है, तो आपके लिए ITR-2 सबसे सही फॉर्म है। हालांकि, अगर आप ट्रेडिंग को फुल-टाइम बिजनेस के तौर पर करते हैं (जैसे इंट्राडे), तब आपको ITR-3 भरना पड़ेगा।
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