LPG संकट ने तोड़ी रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की कमर — 79,000 करोड़ नुकसान, 10% होटल बंद

नया बिजनेस शुरू करने का इससे बेहतर मौका नहीं मिलेगा। सरकारी फंड का फायदा उठाएं और गली-चौराहे पर खोलें यह दुकान। जानें पूरी प्रोसेस।

April 4, 2026 9:55 PM
LPG संकट रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को 79,000 करोड़ का झटका

LPG संकट: रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को 79,000 करोड़ का झटका

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और उसके कारण उपजे LPG संकट ने देश की रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की कमर तोड़कर रख दी है। गैस की भारी कमी के कारण इस अहम सेक्टर को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है और फूड सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हो गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक गैस संकट के कारण देश की रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को हर महीने लगभग 79,000 करोड़ रुपए तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालत की गंभीरता का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुल बिजनेस एक्टिविटी में 15 से 20 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि रेस्टोरेंट इंडस्ट्री देश के रिटेल और इंश्योरेंस सेक्टर के बाद तीसरा सबसे बड़ा सेक्टर है।

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10% रेस्टोरेंट अस्थायी तौर पर बंद — LPG गैस संकट भारत 2026 का सबसे बड़ा झटका

LPG संकट में सर्वाइव न कर पाने के कारण करीब 10 फीसदी रेस्टोरेंट को अस्थायी तौर पर अपने शटर गिराने पड़ रहे हैं। गैस की कमी का सीधा और सबसे बड़ा असर रेस्टोरेंट के दिन-प्रतिदिन के ऑपरेशन्स पर पड़ा है।

गैस बचाने के लिए काम के घंटों में कटौती — QSR चेन भी 50% क्षमता पर

गैस बचाने के लिए रेस्टोरेंट मालिकों को मजबूरन अपने काम करने के घंटों में भी कटौती करनी पड़ रही है।

  • रेस्टोरेंट ने अपने मेन्यू को भी छोटा कर दिया है ताकि वही खाना परोसा जाए जिसमें गैस की खपत कम होती है।
  • केवल रेस्टोरेंट ही नहीं बल्कि प्रमुख क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) चेन फिलहाल अपनी कुल क्षमता के मात्र 50 फीसदी पर ही काम कर रही हैं।
  • गैस और संसाधनों की कमी के कारण कई स्टोर के ऑर्डर अब एक ही मुख्य स्टोर से पूरे किए जा रहे हैं। इसका सीधा असर ऑर्डर डिलीवरी के समय और सर्विस की क्वालिटी पर पड़ रहा है।

मेन्यू छोटे, ऑर्डर देरी — फूड डिलीवरी पर भी पड़ा सीधा असर

LPG संकट के कारण सर्विस की गिरती क्वालिटी और मेन्यू में डिशेज की कटौती के चलते लोगों ने भी बाहर जाकर खाना कुछ कम कर दिया है। इसका नतीजा यह है कि रेस्टोरेंट, QSR चेन और फूड डिलीवरी कंपनियों पर हर तरफ से नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

LPG से छुटकारे की कोशिश — इंडक्शन और इलेक्ट्रिक उपकरणों की तरफ रुख

गैस संकट से निपटने और LPG पर निर्भरता कम करने के लिए रेस्टोरेंट इंडस्ट्री तेजी से दूसरे ऑप्शन्स की तरफ रुख कर रही है।

  • वर्तमान में करीब 60 से 70 फीसदी रेस्टोरेंट LPG के विकल्प के तौर पर इंडक्शन कुकटॉप्स और दूसरे इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, ताकि ऑपरेशन्स किसी तरह चलते रहें।
  • अनुमान के मुताबिक साल 2026 में इस इंडस्ट्री का कुल टर्नओवर 6.46 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच जाएगा — लेकिन मौजूदा संकट ने इस लक्ष्य को मुश्किल बना दिया है।
  • रेस्टोरेंट सेक्टर से देश में 80 लाख लोगों को सीधा रोजगार मिलता है। मौजूदा संकट के कारण इनमें से 5 से 7 लाख नौकरियों पर सीधा खतरा पैदा हो सकता है।

इन स्टॉक्स पर दिख सकता है एक्शन — फूड सेक्टर शेयरों पर LPG संकट का दबाव

LPG संकट, ऑपरेशन्स में 50 फीसदी तक की कटौती, गिरती बिजनेस एक्टिविटी और फूड डिलीवरी में आ रही तमाम दिक्कतों का असर कुछ प्रमुख स्टॉक्स पर पड़ सकता है। यह दबाव downside risk के रूप में इन कंपनियों की कमाई और वैल्यूएशन दोनों पर दिख सकता है। इन स्टॉक्स में जुबलिएंट फूड्स, देव्यानी इंटरनेशनल, सफायर फूड्स, वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड, जोमेटो (एटरनल) और स्विगी जैसे फूड चेन और क्विक कॉमर्स प्लेयर्स शामिल हैं।

संकट कितना लंबा खिंचेगा — यह काफी हद तक मिडिल ईस्ट की स्थिति और सरकार की तरफ से मिलने वाली किसी राहत पर निर्भर करेगा। फिलहाल इंडस्ट्री खुद को बचाने की कोशिश में जुटी है।

FAQ — LPG संकट और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री

LPG संकट से रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को कितना नुकसान हो रहा है?

ताजा अनुमान के मुताबिक देश की रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को हर महीने करीब 79,000 करोड़ रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। कुल बिजनेस एक्टिविटी में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई है। यह वही सेक्टर है जो रिटेल और इंश्योरेंस के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सेक्टर है — यानी नुकसान की मार पूरी अर्थव्यवस्था तक पहुंच रही है। अगर संकट जल्द नहीं थमा तो 2026 का अनुमानित 6.46 लाख करोड़ का टर्नओवर टारगेट भी खतरे में पड़ सकता है।

रेस्टोरेंट बंद क्यों हो रहे हैं — क्या सिर्फ LPG की कमी की वजह से?

LPG की कमी सबसे बड़ा कारण है, लेकिन अकेला नहीं। गैस न मिलने से ऑपरेशन्स ठप होते हैं, मेन्यू सिकुड़ता है, सर्विस की क्वालिटी गिरती है — और फिर ग्राहक खुद कम आने लगते हैं। इस चक्र में फंसकर अभी करीब 10 फीसदी रेस्टोरेंट ने अस्थायी तौर पर शटर गिरा दिए हैं। छोटे और मझोले रेस्टोरेंट सबसे ज्यादा प्रभावित हैं क्योंकि उनके पास इंडक्शन जैसे महंगे विकल्पों में तुरंत निवेश करने की क्षमता नहीं होती।

क्या LPG संकट का असर जोमेटो और स्विगी जैसे फूड डिलीवरी ऐप्स पर भी पड़ रहा है?

हां, सीधा असर पड़ रहा है। जब रेस्टोरेंट अपनी पूरी क्षमता पर काम नहीं कर पाते तो फूड डिलीवरी ऐप्स के ऑर्डर भी देरी से पूरे होते हैं। कई QSR चेन अभी सिर्फ 50 फीसदी क्षमता पर चल रही हैं और कई स्टोर के ऑर्डर एक ही मुख्य आउटलेट से फुलफिल हो रहे हैं। इससे डिलीवरी टाइम बढ़ा है और कस्टमर एक्सपीरियंस खराब हुआ है। जोमेटो (एटरनल) और स्विगी के शेयरों पर इस संकट का दबाव बाजार में दिख सकता है।

रेस्टोरेंट LPG के बदले कौन-से विकल्प इस्तेमाल कर रहे हैं?

60 से 70 फीसदी रेस्टोरेंट अभी इंडक्शन कुकटॉप्स और दूसरे इलेक्ट्रिक उपकरणों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। यह तत्काल समाधान तो है लेकिन सस्ता नहीं — उपकरण खरीदने की लागत और बढ़ा हुआ बिजली बिल मिलाकर ऑपरेशनल कॉस्ट और ऊपर चली जाती है। कुछ बड़े रेस्टोरेंट पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन की तरफ भी देख रहे हैं, लेकिन वह इंफ्रास्ट्रक्चर हर जगह उपलब्ध नहीं है। अगर आप रेस्टोरेंट चलाते हैं तो अभी से PNG कनेक्शन के लिए आवेदन करना शुरू कर दें — वेटिंग लिस्ट लंबी है।

LPG संकट से कितनी नौकरियां खतरे में हैं?

रेस्टोरेंट सेक्टर से देश में 80 लाख लोग सीधे जुड़े हैं। मौजूदा अनुमान के मुताबिक इनमें से 5 से 7 लाख नौकरियां सीधे खतरे में हैं। 7 लाख का मतलब है एक पूरे मझोले शहर जितना कार्यबल जिसकी रोजी दांव पर है। संकट लंबा खिंचा तो यह संख्या और बढ़ सकती है। इस सेक्टर में काम करने वाले लोग अभी से किसी वैकल्पिक स्किल ट्रेनिंग या सरकारी रोजगार योजना की जानकारी लेना शुरू कर सकते हैं।

Aryan Tank

Aryan Tank is an experienced SEO Content Writer with over 2 years of expertise in digital news writing. He has been consistently contributing high-quality content to DeshTak for the past two years. Aryan specializes in writing on topics such as politics, government schemes, trending news, technology, and viral stories.

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