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Sarkari Teacher बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है? पूरी जानकारी (योग्यता, सैलरी और नियम)

Sarkari Teacher बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है? 2026 Guide सरकारी टीचर बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है? जानें पूरा रोडमैप नेशनल एजुकेशन पॉलिसी कहती है कि भारत में हर 30 स्टूडे
Sarkari Teacher बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है? पूरी जानकारी (योग्यता, सैलरी और नियम)
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Sarkari Teacher बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है? 2026 Guide

सरकारी टीचर बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है? जानें पूरा रोडमैप

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नेशनल एजुकेशन पॉलिसी कहती है कि भारत में हर 30 स्टूडेंट्स पर एक टीचर होना चाहिए. लेकिन देश के असल हालात इससे काफ़ी अलग दिखते हैं.

आंकड़े बताते हैं कि शिक्षकों के लाखों पद खाली पड़े हैं. हर साल-दो साल में बड़ी संख्या में इनसे जुड़ी भर्तियां भी निकलती रहती हैं.

मतलब ये कि देश में शिक्षकों की ज़रूरत भी है और आपके लिए यह मौक़ा भी है. बस सही रास्ते और योग्यताएं जानना ज़रूरी है.

आम तौर पर माना जाता है कि भारत में टीचर बनना है तो बैचलर ऑफ़ एजुकेशन यानी बीएड (B.Ed.) की डिग्री ज़रूरी होती है.

लेकिन इसके अलावा भी कई कोर्स हैं, जो टीचर की नौकरियों तक ले जा सकते हैं.

करियर कनेक्ट की आज की कड़ी में समझेंगे कि सरकारी टीचर बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है, कौन से ऐसे कोर्स हैं जो इसकी राह बना सकते हैं और इसका पूरा रोडमैप क्या है?

टीचर बनना कैसे है सही विकल्प?

दिल्ली नगर निगम के स्कूल में प्राइमरी टीचर सचिन पिछले पंद्रह साल से बच्चों को पढ़ा रहे हैं. वो स्कूल के अलावा ज़रूरतमंदों को टीचिंग के क्षेत्र में जाने के लिए गाइडेंस भी देते हैं.

उन्होंने ये प्रोफेशन क्यों चुना, इस पर वो कहते हैं, "अगर आप बदलाव लाना चाहते हैं तो जड़ से लाइए. अगर आप जड़ों के साथ काम करेंगे तो भले ही समय लगे, लेकिन जो बदलाव आएगा, वो मनचाहा होगा."

शिक्षकों के लिए ज़रूरी पात्रता परीक्षा यानी TET की तैयारी करवाने वाले सौरव कहते हैं कि देश में साक्षरता दर बढ़ रही है, रोज़ नए-नए शैक्षणिक संस्थान खुल रहे हैं और सरकार भी शिक्षा क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए कई पहल कर रही है.

ऐसे में टीचर की डिमांड भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ रही है.

दोनों इस बात पर एकमत हैं कि टीचिंग एक ऐसा पेशा है, जो स्थिर करियर देता है.

सौरव कहते हैं, "प्राइवेट स्कूल में नौकरी थोड़ी रिस्की हो सकती है क्योंकि स्कूल कैसा है, वहां कितने स्टूडेंट्स हैं, माहौल क्या है...इन सबका असर पड़ता है.

लेकिन सरकारी नौकरी अच्छी सैलरी के साथ स्टेबिलिटी देती है. छह घंटे काम करने के लिए सैलरी की शुरुआत 50 हज़ार रुपये से होती है. प्रमोशन मिलता है, वर्क-लाइफ़ बैलेंस अच्छा होता है."

हिमांशी सिंह शिक्षकों के परिवार से आती हैं और ख़ुद भी शिक्षक भर्ती से जुड़ी परीक्षाओं की तैयारी करवाती हैं.

वो कहती हैं, "देश में शिक्षकों के लाखों पद खाली हैं. शिक्षा में सरकार का निवेश बढ़ा है, नई शिक्षा नीति आई है. साथ ही स्कूलों में एड-टेक प्लेटफॉर्म में क्वॉलिफ़ाइड टीचर्स की मांग तेज़ी से बढ़ी है. ऐसे में शिक्षक बनने के लिए ये समय सही है."

कितने तरह के होते हैं टीचर?

शिक्षक बनने के रास्ते किसी कैंडिडेट के पढ़ाने के स्तर के हिसाब से बदलते हैं. जैसे:

  • प्राइमरी स्कूल टीचर (पीआरटी): जो कक्षा एक से पांचवीं क्लास तक के बच्चों को पढ़ाते हैं.

  • ट्रेंड ग्रैजुएट टीचर (टीजीटी): ये छठी से आठवीं क्लास तक के बच्चों को पढ़ाते हैं.

  • पोस्ट ग्रैजुएट टीचर (पीजीटी): ये सीनियर सेकेंडरी क्लास यानी ग्यारहवीं और बारहवीं क्लास के बच्चों को पढ़ाते हैं.

इनके लिए भी ज़रूरी शैक्षिक योग्यताएं हैं:

  1. प्राइमरी टीचर: 12वीं पास हों + डीएलएड/जूनियर बेसिक ट्रेनिंग या 12वीं के बाद चार साल की बीएलएड (बैचलर ऑफ़ एलिमेंट्री एजुकेशन) डिग्री की हो.

  2. टीजीटी: ग्रैजुएशन के साथ बीएड अनिवार्य है.

  3. पीजीटी: संबंधित विषय में पोस्ट ग्रैजुएशन + बीएड की हो.

अब जो कैंडिडेट इन पदों पर निकली भर्तियों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके लिए एक बुनियादी ज़रूरत ये है कि इन्हें केंद्रीय या राज्य स्तर का टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी CTET या STET को भी क्लीयर करना होता है.

हिमांशी सिंह बताती हैं कि प्राइवेट स्कूलों में भी शिक्षकों की भर्ती के लिए नियम एक से हैं. ख़ासतौर पर बड़े और नामी निजी स्कूलों में.

मसलन किसी भी वैकेंसी पर आवेदन करने वालों का CTET या TET क्लीयर होना ज़रूरी है. उनके पास संबंधित विषयों में ग्रैजुएशन/पोस्ट ग्रैजुएशन के साथ बीएड/बीएलएड जैसी डिग्री होना भी ज़रूरी है.

आमतौर पर ये स्कूल अपनी वेबसाइट, जॉब पोर्टल्स वगैरह पर वैकेंसी की जानकारी देते हैं और वहीं पर आवेदन की पूरी प्रक्रिया भी बताई गई होती है.

सरकारी टीचर बनने के लिए उम्र सीमा (Age Limit)

बहुत से लोग पूछते हैं कि टीचर बनने के लिए सही उम्र क्या है? तो देखिए, अगर आप प्राइमरी टीचर (PRT) बनना चाहते हैं, तो आपकी उम्र आमतौर पर 18 से 30 साल के बीच होनी चाहिए.

वहीं, TGT और PGT के लिए अधिकतम उम्र सीमा 35 से 40 साल तक हो सकती है.

राहत की बात ये है कि अगर आप आरक्षित श्रेणी (OBC/SC/ST) से आते हैं या महिलाएं हैं, तो आपको उम्र में 3 से 5 साल तक की छूट भी मिल जाती है.

ये परीक्षाएं होती हैं ज़रूरी

TET वो एग्ज़ाम होते हैं जो नौकरी तो नहीं देते, लेकिन इन्हें क्लीयर करे बग़ैर सरकारी नौकरी मिलती भी नहीं है.

सबसे अहम होता है CTET यानी सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट. इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) करवाता है.

ये परीक्षा कठिन मानी जाती है क्योंकि जानकार बताते हैं कि इसका क्वालिफिकेशन रेट सिर्फ़ 14-15 फ़ीसदी ही है.

ये एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जो कैंडिडेट को केंद्र सरकार के स्कूलों जैसे केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय या केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूलों में टीचर बनने की पात्रता देती है.

CTET की तर्ज़ पर ही कई राज्य भी शिक्षकों की पात्रता के लिए परीक्षाएं करवाते हैं. जैसे:

  • UPTET (उत्तर प्रदेश)

  • HTET (हरियाणा)

  • MAHA TET (महाराष्ट्र)

  • REET (राजस्थान)

  • TNTET (तमिलनाडु)

  • WBTET (पश्चिम बंगाल)

  • KARTET (कर्नाटक)

  • OTET (ओडिशा)

  • TSTET (तेलंगाना)

  • APTET (आंध्र प्रदेश)

  • Assam TET (असम)

  • PSTET (पंजाब)

इन परीक्षाओं को पास करने वाले हर कैंडिडेट के पास सरकारी शिक्षकों की भर्तियों के लिए आवेदन करने की पात्रता आ जाती है.

फिर संबंधित राज्य के भर्ती बोर्ड अपनी ज़रूरतों के हिसाब से शिक्षकों की भर्तियां निकालते हैं और कैंडिडेट को स्टेट रिक्रूटमेंट बोर्ड की परीक्षाओं के अलग-अलग लेवल को पार कर आख़िर में नौकरी मिल सकती है.

हालांकि, केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति पूरे भारत में अपने टीचिंग स्टाफ़ की भर्ती के लिए अलग परीक्षाएं करवाते हैं.

दिल्ली सबॉर्डिनेट सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड (DSSSB) भी दिल्ली सरकार के तहत आने वाले स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती अलग से करता है.

सरकारी टीचर बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है?

12वीं पास करने के बाद कोई भी कैंडिडेट टीचिंग से जुड़े अलग-अलग कोर्स चुन सकता है. फिर वो ग्रैजुएशन के लिए हो, डिप्लोमा हो या इंटीग्रेटेड डिग्री प्रोग्राम. ये सभी कोर्स प्राइवेट स्कूल में टीचिंग के लिए भी ज़रूरी हैं.

1. B.ED (बैचलर ऑफ एजुकेशन): ये ग्रैजुएशन के बाद दो साल का कोर्स है, जो अलग-अलग लेवल पर टीचर बनने के लिए कैंडिडेट को तैयार करता है. हालांकि, कुछ कॉलेजों में ग्रैजुएशन के साथ चार साल का इंटीग्रेटेड बीएड प्रोग्राम भी होता है. जिसमें ग्रैजुएशन और बैचलर्स इन एजुकेशन दोनों साथ में हो जाते हैं.

2. ITEP (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम): नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत ये एक नया प्रोग्राम लाया गया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया-मिल्लिया इस्लामिया, बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटीज़ में ये कोर्स शुरू हो गया है. इसे करने वाले छात्र ग्रैजुएशन और बीएड एक साथ करते हैं. फ़ायदा ये कि पांच साल की बजाय कोर्स चार साल में पूरा होता है.

3. B.EL.ED (बैचलर ऑफ़ एलिमेंट्री एजुकेशन): ये भी चार साल का अंडरग्रैजुएट टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम है. जिसमें साइकोलॉजी, पेडागोजी और प्रैक्टिल टीचिंग स्किल जैसी चीज़ें होती हैं.

4. D.EL.ED (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन): ये दो साल का डिप्लोमा प्रोग्राम है जिसे प्राइमरी और अपर-प्राइमरी लेवल के टीचर्स को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार किया गया है.

इसके सिलेबस में चाइल्ड डेवलेपमेंट, पेडागोजी और प्रैक्टिल क्लासरूम ट्रेनिंग जैसी चीज़ें होती हैं, ताकि कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाया जा सके. पेडागोजी को आसान शब्दों में बताएं तो ये पढ़ाने का तरीका और प्रैक्टिस से जुड़ा विषय है.

5. D.ED (डिप्लोमा इन एजुकेशन): ये भी दो साल का टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम है, जो कक्षा एक से आठवीं तक के सभी विषयों के शिक्षक बनने से जुड़ी ट्रेनिंग के लिए तैयार किया गया है.

6. NTT (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग): नर्सरी टीचर ट्रेनिंग एक दो साल का स्पेशलाइज़्ड डिप्लोमा सर्टिफ़िकेशन प्रोग्राम है, उनके लिए जो नर्सरी और प्री-स्कूल लेवल पर टीचर बनना चाहते हैं.

सौरव कहते हैं कि बीएड एक लोकप्रिय रास्ता तो है लेकिन प्री-प्राइमरी, स्पेशल एजुकेशन, स्किल बेस्ड टीचिंग जैसे कोर्सों का चुनाव कर डिप्लोमा या सर्टिफ़िकेट के आधार पर भी प्राइवेट संस्थानों में एंट्री ले सकते हैं.

सैलरी कितनी मिलती है? (Salary Structure)

अब बात करते हैं कमाई की. एक सरकारी टीचर की सैलरी उसके पद पर निर्भर करती है.

  • प्राइमरी टीचर (PRT): इनकी शुरुआती सैलरी करीब 35,000 से 45,000 रुपये महीना होती है.

  • TGT टीचर: इनकी सैलरी 45,000 से 55,000 रुपये के आसपास रहती है.

  • PGT टीचर: सबसे ज्यादा सैलरी इनकी होती है, जो 50,000 से 70,000 रुपये तक जा सकती है.

इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट (HRA) और मेडिकल जैसी सुविधाएं सरकारी नौकरी में अलग से मिलती हैं.

क्या हो परीक्षा की तैयारी की रणनीति?

सबसे पहले एग्ज़ाम के पैटर्न को समझिए. टीईटी या सीटीईटी जैसी परीक्षाओं में दो पेपर होते हैं. पेपर वन उनके लिए जो पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाना चाहते हैं और पेपर टू उनके लिए जो छठी से आठवीं तक पढ़ाना चाहते हैं.

हर पेपर में मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन (MCQs) होते हैं, जिनमें चाइल्ड डेवलेपमेंट और पेडागोजी, लैंग्वेज, मैथमैटिक्स, एनवायरमेंटल स्टडीज़ और सोशल स्टडीज़ जैसे विषयों के सवाल होते हैं.

पर इसकी तैयारी कैसे करें? इसके जवाब में सचिन बताते हैं, "पहला सोर्स एनसीईआरटी की किताबें ही हैं, जो बुनियादी कॉन्सेप्ट के लिए ज़रूरी हैं. सामान्य ज्ञान के लिए लुसेंट की बुक, इंग्लिश के लिए चेतनानंद की 'इंग्लिश इज़ इज़ी' और हिंदी के लिए मानक हिंदी व्याकरण काफ़ी मददगार होते हैं."

"इसके अलावा पिछले सालों के एग्ज़ाम में पूछे गए सवालों को सुलझाने से भी आपको पता लग जाता है कि सवाल कैसे आते हैं. अब तो ऑनलाइन फ़्री कंटेंट आसानी से मिल जाता है कि स्टूडेंट को कोई दिक्कत नहीं है और कई लोग इनकी मदद से टीचर बन रहे हैं. लेकिन फिर भी किताबों को पढ़कर परीक्षा देना मेरी निजी पसंद है."

किसी स्टूडेंट को तैयारी में कितना समय लग सकता है, इसके जवाब में हिमांशी सिंह कहती हैं, "स्टूडेंट मॉक टेस्ट देते रहें और अपनी तैयारी का आकलन उन क्षेत्रों को देखते हुए करें, जिनमें उन्हें सुधार की ज़रूरत है.

साथ ही वह कितने समय में सवालों को सुलझा पा रहे हैं, इस पर गौर करें. अगर ये सब आपने तीन महीने में कर लिया तो आपके लिए तीन महीने ही तैयारी के लिए काफ़ी हैं."

वहीं सौरव कहते हैं, "तैयारी की रणनीति आसान लेकिन निरंतर होनी चाहिए. कंटेंट की स्पष्टता, पैडागोजी की समझ और नियमित अभ्यास टीईटी की तैयारी के लिए ज़रूरी हैं."

इन बातों का ध्यान रखना भी ज़रूरी

बीएड, बीएलएड जैसे हर कोर्स को मान्यता एनसीटीई यानी नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन से मिलती है.

कई बार स्टूडेंट प्राइवेट संस्थानों से ये कोर्स करते हैं. इसलिए जानकार कोई भी कोर्स चुनते समय यह ध्यान रखने की हिदायत देते हैं कि कोर्स एनसीटीई से मंज़ूर हो.

सौरव कहते हैं कि ये ध्यान रखें कि कोर्स का करिकुलम यानी सिलेबस अपेडेटेड हो, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कैसी है यानी टीचिंग प्रैक्टिस की क्वॉलिटी क्या है, इंटर्नशिप स्कूल कैसा है, उन स्कूलों का स्टैंडर्ड क्या है और एनसीटीई गाइडलाइंस के हिसाब से कोर्स है या नहीं.

अगर आप सही कोर्स और सही रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे, तो सरकारी टीचर बनने के लिए कौन सा कोर्स जरूरी है, यह सवाल आपकी कामयाबी के आड़े नहीं आएगा.

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या मैं 12वीं पास करने के तुरंत बाद सरकारी टीचर बन सकता हूँ?

हाँ, बिल्कुल! 12वीं के बाद आप D.El.Ed (डिप्लोमा) या B.El.Ed (4 साल का डिग्री कोर्स) करके प्राइमरी टीचर (कक्षा 1 से 5) बनने के लिए एलिजिबल हो जाते हैं.

Q2: क्या बिना बीएड (B.Ed) किए सरकारी टीचर बन सकते हैं?

जी हाँ, प्राइमरी टीचर बनने के लिए बीएड जरूरी नहीं है, वहां डीएलएड (D.El.Ed) चलता है. लेकिन अगर आपको बड़ी क्लास (TGT/PGT) को पढ़ाना है, तो बीएड करना बहुत जरूरी है.

Q3: सरकारी टीचर बनने के लिए अधिकतम उम्र (Age Limit) क्या है?

आमतौर पर जनरल कैटेगिरी के लिए यह 30 से 40 साल के बीच होती है (राज्य और पोस्ट के हिसाब से). लेकिन अगर आप OBC, SC या ST कैटेगिरी से हैं, तो आपको उम्र में 3 से 5 साल की छूट मिल जाती है.

Q4: क्या CTET पास करने के बाद सीधे नौकरी मिल जाती है?

नहीं, CTET सिर्फ एक पात्रता (Eligibility) परीक्षा है. इसे पास करने के बाद आप KVS, NVS या राज्यों की शिक्षक भर्ती परीक्षा (जैसे SuperTET, DSSSB) में बैठने के लिए योग्य हो जाते हैं. नौकरी फाइनल भर्ती परीक्षा पास करने पर ही मिलती है.

Q5: सरकारी टीचर की सैलरी प्राइवेट से कितनी ज्यादा होती है?

काफी फर्क होता है. सरकारी टीचर (शुरुआती) को भी सारे भत्ते मिलाकर 40-50 हजार रुपये महीना आराम से मिल जाता है, साथ ही नौकरी की सुरक्षा (Job Security) भी रहती है, जो प्राइवेट में कम देखने को मिलती है.

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