Iran-Israel War: भारत में LPG-Petrol-Diesel पर कितना असर? 10 Points में समझें

Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर क्या असर होगा? क्या LPG-Petrol-Diesel के दाम बढ़ेंगे? रिफिल में 25 दिन की वेटिंग क्यों है? 10 पॉइंट्स में पूरी सच्चाई और सरकार की तैयारी जानें।

March 10, 2026 9:21 PM

Iran-Israel War: भारत में LPG-Petrol-Diesel की सप्लाई और कीमतों पर कितना असर? 10 Points में समझें पूरी कहानी

Iran-Israel War Update: मिडिल ईस्ट में जारी जंग से भारत की ऊर्जा आपूर्ति, विशेषकर LPG-Petrol-Diesel और कच्चे तेल (Crude Oil) पर गहरा असर पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का 90% तेल और अधिकांश एलपीजी आयात (Import) करता है।

इस वैश्विक संकट को देखते हुए, सरकार ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, रिफिल वेटिंग पीरियड बढ़ाने, वैकल्पिक स्रोत तलाशने और रूस से तेल खरीद बढ़ाने जैसे सख्त और एहतियाती कदम उठाए हैं।

इस खबर की मुख्य बातें:

  • LPG उत्पादन बढ़ा, रिफिल वेटिंग पीरियड 25 दिन हुआ

  • रूस से कच्चा तेल खरीद बढ़ी, वैकल्पिक स्रोत तलाश रहा भारत

  • पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे, रणनीतिक भंडार सुरक्षित रहेगा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जंग और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के खतरे से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। मिडिल ईस्ट में जारी इस जंग के चलते कच्चे तेल की कीमतें एक समय 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई है।

लिक्विड नैचुरल गैस (एलएनजी) और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) भी संकट की स्थिति में हैं। बता दें ये तीनों ही किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। एक तरफ ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो सकता है लेकिन तब तक ऊर्जा और तेल आपूर्ति दुनिया भर के लिए तनाव का मुद्दा बना हुआ है।

भारत की नजर से देखें तो मिडिल ईस्ट की जंग ने ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डाला है। बता दें, भारत अपने कच्चे तेल का 90 प्रतिशत दूसरे देशों से आयात करता है, जबकि एलपीजी 60 प्रतिशत और एलएनजी का आधे से अधिक आयात होता है। यह आपूर्ति मुख्यत खाड़ी देशों (Gulf Countries) से ही होती है। ऐसे में भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, इस पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।

भारत की ऊर्जा स्थिति और LPG-Petrol-Diesel की सप्लाई चैन को समझने के लिए यहां 10 महत्वपूर्ण बिंदु दिए गए हैं:

1. LPG उत्पादन तेजी से बढ़ाया जाएगा

सरकार ने देश की ऑयल रिफाइनरी को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए खाना पकाने वाली गैस (LPG) का उत्पादन तुरंत प्रभाव से बढ़ाने का निर्देश दिया है।

देश में वर्तमान में 33.1 करोड़ से अधिक LPG उपयोगकर्ता हैं। सोमवार को जारी एक निर्देश में, सरकार ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स सहित ऑयल रिफाइनरी को निर्देश दिया कि वे प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटेन जैसे C3 और C4 धाराओं के उत्पादन को अधिकतम करें।

इन एलपीजी सोर्स को सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को आपूर्ति के लिए एलपीजी पूल में भेजा जाएगा। ध्यान रखें, इस व्यवस्था के तहत उत्पादित एलपीजी का वितरण केवल और केवल घरेलू उपभोक्ताओं को किया जाएगा, ताकि आम घरों में चूल्हा जलता रहे।

2. LPG रिफिल के लिए वेटिंग पीरियड बढ़ाया गया

पैनिक बाइंग (Panic Buying) को रोकने के लिए LPG रिफिल के लिए न्यूनतम वेटिंग बढ़ाई गई है। तेल बेचने वाली कंपनियों ने घरेलू LPG रिफिल बुक करने की न्यूनतम वेटिंग को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है

इस कदम का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी (Hoarding) को रोकना और खाना पकाने के गैस सिलेंडरों की भारी कमी से बचना है। यह बदलाव पिछले सप्ताह किए गए संशोधन के बाद आया है, जब न्यूनतम बुकिंग अंतराल को पहले के 15 दिनों से बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया था।

तेल कंपनियों द्वारा पर्याप्त भंडार बनाए रखने पर जोर देते हुए, सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि बुकिंग की अवधि बढ़ाने का उद्देश्य उपभोक्ताओं द्वारा घबराहट में की जाने वाली बुकिंग को रोकना है। यहां लोग अक्सर गलती करते हैं कि डर के मारे एक्स्ट्रा सिलेंडर बुक कर लेते हैं, जिससे सिस्टम पर दबाव पड़ता है।

अधिकारियों ने साफ तौर पर बताया कि एक सामान्य परिवार एक साल में लगभग छह से सात घरेलू LPG सिलेंडर (प्रत्येक सिलेंडर की क्षमता 14.2 किलोग्राम) का उपभोग करता है और आमतौर पर इसे लगभग 50 से 55 दिनों के बाद ही रिफिल कराने की आवश्यकता होती है।

3. वैकल्पिक सोर्स (Alternative Sources) पर गंभीरता से विचार

भारत एलपीजी के लिए अब सिर्फ मिडिल ईस्ट पर निर्भर नहीं है, बल्कि वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर विचार कर रहा है। मौजूदा तनाव को देखते हुए भारत अमेरिका, अल्जीरिया, नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों से एलपीजी आपूर्ति के नए स्रोत तलाश रहा है।

अधिकारियों ने बताया है कि भारत ने कई देशों के साथ एलपीजी आपूर्ति समझौते किए हैं, लेकिन लंबी परिवहन दूरी (Long-distance freight) और जहाजरानी मार्गों में व्यवधान (जैसे लाल सागर का संकट) के कारण आपूर्ति में थोड़ी देरी हो रही है। फिलहाल माल की आपूर्ति जारी है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति व्यवस्था और बेहतर होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक ऊर्जा स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और सप्लाई चेन (Supply Chains) में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव रणनीतिक कदम उठा रही है।

4. LPG: इन अति-आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता

पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि गैर-घरेलू उपयोग के लिए आयातित एलपीजी की आपूर्ति में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। संकट के समय स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों, यह सरकार का पहला लक्ष्य है।

मंत्रालय ने बताया कि रेस्तरां, होटल और विभिन्न उद्योगों सहित अन्य गैर-घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए एलपीजी के अनुरोधों की समीक्षा करने और उनका आवंटन निर्धारित करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है।

5. कमर्शियल सेक्टर: इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर

सच तो यह है कि वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में रुकावट का सीधा खामियाजा कमर्शियल सेक्टर को उठाना पड़ रहा है। इस वजह से रेस्तरां और इंडस्ट्री जैसे गैर-घरेलू LPG उपभोक्ताओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार द्वारा घरेलू उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति को प्राथमिकता देने के कारण, वाणिज्यिक (Commercial) एलपीजी सिलेंडरों का वितरण धीमा हो गया है, जिससे होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे के ढाबों को गैस की अनिश्चित स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन के अनुसार, हालात ऐसे हैं कि बेंगलुरु में छोटे और मीडियम स्तर के भोजनालयों को मंगलवार तक अपना संचालन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, क्योंकि उनका कमर्शियल खाना पकाने की गैस का स्टॉक खत्म होने की आशंका है।

6. भारत ने रूस से बढ़ाई कच्चे तेल की बंपर खरीद

मिडिल ईस्ट में फंसे कच्चे तेल की खेपों की भरपाई के लिए भारत ने मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) की खरीद बढ़ा दी है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने भारत को रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए 30 दिन की छूट दी है, जबकि भारतीय अधिकारियों का कड़ा कहना है कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए कभी भी किसी देश से अनुमति की आवश्यकता नहीं पड़ी है।

फरवरी में भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता (Top Supplier) बना रहा। भारत ने अपनी बेहतरीन ऊर्जा कूटनीति के तहत कच्चे तेल की आपूर्ति का दायरा बढ़ाया है और छह महाद्वीपों में फैले आपूर्तिकर्ता देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 40 कर दी है।

इसके परिणामस्वरूप, देश की ऊर्जा सुरक्षा अब होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं है। भारत में वर्तमान में 25 करोड़ बैरल से अधिक, यानी लगभग 40 करोड़ लीटर कच्चे तेल और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार सुरक्षित है। यह भंडार ऊर्जा प्रणाली में लगभग सात से आठ सप्ताह की आपूर्ति के बराबर बफर प्रदान करता है।

7. आम आदमी को राहत: नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

सोमवार को ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 2022 के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इसके बावजूद सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट बताया कि भारत में खुदरा LPG-Petrol-Diesel ईंधन की कीमतों में वृद्धि की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने आश्वस्त करते हुए कहा, ‘क्रूड के मामले में हमारी स्थिति बहुत मजबूत है। आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की संभावना नहीं है, भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतें 110-120 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहें।’

8. ‘इंडिया फर्स्ट’ (India First) की नीति पर मजबूती से काम करेगा भारत

एक सरकारी सूत्र के अनुसार, भारत वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को कम करने के उद्देश्य से रणनीतिक तेल भंडार जारी करने की अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की पहल में भाग नहीं लेगा। भारत अपने हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।

यह संकट (जिसके कारण कीमतें बढ़ीं) हमारी देन नहीं है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को ही इससे निपटना होगा और कीमतों को कम करने के लिए उपाय करने होंगे।

एक सरकारी सूत्र ने पीटीआई को बताया, साथ ही यह साफ किया कि भारत किसी दूसरे देश के दबाव में अपने सुरक्षित भंडार का उपयोग नहीं करेगा। अधिकारियों ने बताया कि भारत के रणनीतिक भंडार का उपयोग केवल देश में गंभीर आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में ही किया जाना चाहिए। देश इस समय पूरी तरह से ‘इंडिया फर्स्ट’ की स्वतंत्र नीति पर काम करेगा।

9. सप्लाई चेन के लिए सरकार ने किए कड़े उपाय

होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी शिपमेंट में रुकावट होने की स्थिति से निपटने के लिए भारत ने पहले ही आपातकालीन कदम उठाए हैं। सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस आवंटन की प्राथमिकता सूची को संशोधित किया है।

जिससे LPG उत्पादन, CNG और पाइप्ड खाना पकाने की गैस (PNG) को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके बाद कृषि के लिए उर्वरक क्षेत्र को दूसरी, और चाय बागान व विनिर्माण (Manufacturing) आदि को तीसरी प्राथमिकता दी है। इससे देश के महत्वपूर्ण और बुनियादी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

10. भारत की महंगाई (Inflation) पर बड़ा असर नहीं

अर्थव्यवस्था को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, आमतौर पर कच्चे तेल की कीमत में 10% की वृद्धि होने से महंगाई लगभग 0.3% तक ही बढ़ती है। चूंकि सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं और सप्लाई चेन को डायवर्ट कर लिया है, इसलिए फिलहाल देश में इस संकट की वजह से किसी बड़ी महंगाई की आशंका नहीं है।

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