AI vs Humans: Nvidia ने बताया AI से बहुत सस्ते हैं इंसान, फिर क्यों हो रही छंटनी?

Nvidia का दावा है कि इंसान AI से काफी सस्ते हैं। MIT की रिपोर्ट के अनुसार 77% नौकरियों में इंसान ही किफायती हैं। जानिए फिर क्यों कंपनियां AI पर अरबों खर्च कर रही हैं।

April 30, 2026 9:07 AM
Nvidia AI Cost VS Human Labor

AI VS Human Cost: ‘AI से बहुत सस्ते हैं इंसान’ — NVIDIA ने बताई हकीकत, फिर भी क्यों हो रही है छटनी?

Nvidia AI Cost VS Human Labor: Layoffs.fyi के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 2026 में अब तक टेक सेक्टर में 92,000 से ज्यादा लोगों की नौकरी जा चुकी है — लगभग 100 कंपनियों में। यह रफ्तार पिछले पूरे साल से भी तेज़ है।

NVIDIA जैसी दिग्गज कंपनी ने खुद माना है — AI इंसानों से महंगा है। और फिर भी Meta, Microsoft जैसी कंपनियां हज़ारों लोगों को निकाल रही हैं।

यही वो विरोधाभास है जो टेक इंडस्ट्री को इस वक्त सबसे ज़्यादा परेशान कर रहा है।

तो असल खेल क्या है?

इंसान सस्ता, AI महंगा — NVIDIA VP का सीधा बयान

NVIDIA के वाइस प्रेसिडेंट ब्रायन कटनजारो ने साफ कहा:

“मेरी टीम के लिए, कंप्यूट (AI चलाने की शक्ति और संसाधनों) की लागत, कर्मचारियों की लागत से कहीं अधिक है।”

MIT की एक रिसर्च भी यही बात पुष्ट करती है। मौजूदा वक्त में सिर्फ 23% विजन-आधारित नौकरियों में AI का इस्तेमाल आर्थिक रूप से फायदेमंद है। बाकी 77% मामलों में इंसानों से काम कराना अभी भी सस्ता पड़ता है।

77%. यह कोई छोटी संख्या नहीं है।

फिर कंपनियां AI पर अरबों क्यों बहा रही हैं?

बावजूद इसके, Morgan Stanley के अनुसार टेक कंपनियों ने 2026 में AI बुनियादी ढांचे पर 740 अरब डॉलर खर्च करने की घोषणा की है। पिछले साल से 69% ज़्यादा।

Gartner के मुताबिक दुनियाभर में IT खर्च इस साल 6.31 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है — 2025 से 13.5% ज्यादा। इसकी बड़ी वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर और क्लाउड सर्विसेज़ हैं।

टेक्निकल समस्याओं के बावजूद भारी बजट

खर्च सिर्फ बढ़ नहीं रहा — बजट उड़ा भी रहा है।

Uber के CTO प्रवीण नेपल्ली नागा ने कहा कि AI कोडिंग टूल्स अपनाने के बाद उनका पूरा 2026 का बजट पहले ही खर्च हो चुका है। उन्हें शुरू से सोचना पड़ रहा है। समस्या सिर्फ खर्च की नहीं — भरोसे की भी है। एक इंजीनियर ने बताया कि AI टूल ने उसका पूरा डेटाबेस और नेटवर्क मिटा दिया।

और इसी वजह से ज़्यादातर टीमें अभी भी critical काम के लिए इंसानों पर निर्भर हैं।

AI के सस्ते होने का इंतजार — कितना लंबा?

एक्सपर्ट कीथ ली का कहना है कि यह थोड़े समय की बात है। हार्डवेयर की कमी और बिजली की खपत अभी AI को महंगा बना रही है।

लेकिन Gartner की रिपोर्ट बताती है कि अगले चार सालों में बड़े AI मॉडल्स को चलाने की लागत 90% तक गिर सकती है।

McKinsey के अनुमान के मुताबिक AI खर्च 2030 तक 5.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है — जिसमें 1.6 ट्रिलियन डेटा सेंटर और 3.3 ट्रिलियन IT उपकरणों पर खर्च होगा।

भविष्य में AI कंपनियां इस्तेमाल के आधार पर पैसा लेंगी। लेकिन AI के इंसानों की जगह लेने की बात तभी होगी जब वो सस्ता भी हो — और गलतियां भी न करे।

फिलहाल दोनों शर्तें एक साथ पूरी होती नहीं दिख रहीं।

(Source: Fortune, Axios, Gartner — अप्रैल 2026)

FAQ

Q: क्या AI सच में इंसानों की नौकरियां ले लेगा? A: अभी नहीं। MIT की रिसर्च बताती है कि 77% मामलों में इंसानों से काम कराना AI से सस्ता है। NVIDIA जैसी कंपनियों ने भी माना है कि AI चलाने की लागत अभी कर्मचारियों के वेतन से ज़्यादा है। जब तक AI सस्ता और भरोसेमंद दोनों नहीं हो जाता, पूरी तरह इंसानों की जगह लेना मुश्किल है।

Q: NVIDIA के VP ने AI cost को लेकर क्या कहा? A: NVIDIA के वाइस प्रेसिडेंट ब्रायन कटनजारो ने Axios को बताया कि उनकी टीम के लिए AI compute की लागत कर्मचारियों की सैलरी से कहीं ज़्यादा है। यह बयान उस धारणा को सीधे चुनौती देता है कि कंपनियां AI को इंसानों की जगह इसलिए ला रही हैं क्योंकि यह सस्ता है।

Q: टेक कंपनियां AI पर इतना खर्च क्यों कर रही हैं, जबकि यह महंगा है? A: कंपनियां इसे भविष्य में निवेश मान रही हैं। Morgan Stanley के अनुसार इस साल 740 अरब डॉलर AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होने हैं। उम्मीद है कि जैसे-जैसे लागत घटेगी, AI असल में फायदेमंद साबित होगा। लेकिन अभी तक उत्पादकता में कोई ठोस बढ़ोतरी नहीं दिखी है।

Q: AI की लागत कब तक कम होगी? A: Gartner की रिपोर्ट के मुताबिक अगले चार साल में बड़े AI मॉडल्स की लागत 90% तक गिर सकती है। लेकिन इसके लिए हार्डवेयर, एनर्जी और AI की विश्वसनीयता — तीनों में एक साथ सुधार ज़रूरी है।

Q: Meta और Microsoft की छटनी का AI से क्या कनेक्शन है? A: Meta ने 8,000 कर्मचारियों को निकालने का ऐलान किया है और Microsoft ने बड़े पैमाने पर voluntary buyout दिए हैं। लेकिन Yale Budget Lab समेत कई एजेंसियों के पास इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं हैं कि ये छटनियां सीधे AI की वजह से हुई हैं। कंपनियां एक साथ AI पर पैसा भी लगा रही हैं और लोगों को निकाल भी रही हैं — दोनों अलग-अलग वजहों से।

(देश और दुनिया की ताज़ा खबरें सबसे पहले पढ़ें Deshtak.com पर , आप हमें FacebookTwitterInstagram , LinkedIn और  Youtube पर फ़ॉलो करे)

deshtak

DeshTak.com – Desh ki Baat, Sidhe Aap Tak DeshTak.com is a reliable and fast digital news platform dedicated to bringing every important news of the country and the world straight to you. Here you get breaking news, real-time updates, and in-depth analytical reporting - that too in both Hindi and English. From politics to technology, entertainment to sports and global events, DeshTak provides verified, unbiased content on every topic. Our aim is to give you fast, accurate and reliable information - so that you stay connected with every news, from anywhere.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment