Success Story: 1300 की नौकरी से करोड़ों का कारोबार, आज बना 2.5 करोड़ टर्नओवर का मालिक, अब चला रहे सफल एग्रो बिजनेस
Success Story: आजकल के दौर में जहाँ युवा सिर्फ सरकारी नौकरी के पीछे भाग रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव के लड़के ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है। हम बात कर रहे हैं नरेंद्र पटेल की, जिन्होंने ₹1300 की मामूली नौकरी से अपना सफर शुरू किया और आज एग्रो बिजनेस (Agro Business) की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुके हैं।
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के एक छोटे से गांव सुरुगांव जोशी से निकलकर नरेंद्र पटेल ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर बेरोजगार युवा के लिए प्रेरणा है। कभी पिता के पान के टब पर बैठकर पढ़ाई करने वाले नरेंद्र आज सालाना करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपए का टर्नओवर करने वाले एक सफल व्यवसायी बन चुके हैं।
संघर्ष के दिनों की वो कड़वी यादें
नरेंद्र की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उनके पिता गांव में पान का टब चलाते थे। घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नरेंद्र ने छठवीं कक्षा से ही पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। पढ़ाई और जिम्मेदारी, दोनों को साथ लेकर चलना उनके जीवन का हिस्सा बन गया था।
गांव के सरकारी स्कूल से शुरुआती शिक्षा के बाद वे सनावद चले गए। सच तो ये है कि उस समय हालात इतने खराब थे कि नरेंद्र के पास दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल था। वे बताते हैं कि हॉस्टल में टिफिन एक दिन छोड़कर आता था, इसलिए उन्हें एक दिन का भोजन दो दिन तक चलाना पड़ता था।
₹1300 की नौकरी और ₹12,000 का वो बड़ा फैसला
अपनी पढ़ाई के दौरान नरेंद्र ने कई प्राइवेट कंपनियों में छोटे-मोटे काम किए ताकि घर की मदद हो सके। उन्होंने अपनी पहली नौकरी मात्र ₹1300 प्रति माह पर शुरू की थी। धीरे-धीरे उनकी सैलरी बढ़ी, लेकिन उनके सपने इससे कहीं बड़े थे।
इसी बीच एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी कि “नौकरी में कब तक घिसोगे, अपना खुद का कुछ शुरू करो।” यह बात नरेंद्र के दिल में घर कर गई। उन्होंने हिम्मत जुटाई और अपनी जमा-पूंजी से मात्र 12 हजार रुपए निकालकर खंडवा में खाद-बीज की एक छोटी सी दुकान खोली।
दिव्या कृषि केंद्र: ईमानदारी से बनाया ब्रांड
शुरुआत में चुनौतियां बहुत थीं, लेकिन नरेंद्र का नजरिया साफ था। उन्होंने किसानों को सिर्फ सामान नहीं बेचा, बल्कि उन्हें सही सलाह (Expert Consulting) देना शुरू किया। यहाँ लोग अक्सर गलती करते हैं कि वे सिर्फ मुनाफे के पीछे भागते हैं, लेकिन नरेंद्र ने ईमानदारी को अपनी यूएसपी (USP) बनाया।
आज उनकी दुकान खंडवा के मुख्य बाजार शनि मंदिर क्षेत्र में “दिव्या कृषि केंद्र” के नाम से मशहूर है। किसानों का भरोसा इस कदर बढ़ा कि उनका छोटा सा व्यापार देखते ही देखते एक बड़े साम्राज्य में तब्दील हो गया।
नमो एग्रो एजेंसी: बिजनेस का विस्तार
व्यापार में सफलता मिलने के बाद नरेंद्र रुके नहीं। करीब तीन साल पहले उन्होंने खंडवा के पास छैगांव माखन में एक और फर्म शुरू की, जिसका नाम है “नमो एग्रो एजेंसी”। इस दुकान की जिम्मेदारी उनके बड़े भाई संभालते हैं।
आज इन दोनों दुकानों के जरिए नरेंद्र सालाना 2 से 2.5 करोड़ रुपए का बिजनेस कर रहे हैं। इस मुकाम तक पहुँचने के लिए वे अपने गुरु देवेन्द्र गुर्जर को श्रेय देते हैं, जिन्होंने कठिन समय में उन्हें सही रास्ता दिखाया।
युवाओं के लिए सफलता का मंत्र
आज के युवाओं को संदेश देते हुए नरेंद्र पटेल कहते हैं:
“छोटा काम हो या बड़ा, अगर आप लगन से करते हैं तो एक दिन बड़ा मुकाम जरूर हासिल कर सकते हैं। दूसरों की गुलामी करने या नौकरी के पीछे भागने से बेहतर है कि खुद का छोटा ही सही, लेकिन अपना काम शुरू करें। बिजनेस में धैर्य और ईमानदारी ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है।”
नरेंद्र पटेल की यह Success Story सिखाती है कि कामयाबी संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि उसे पाने के लिए अटूट संकल्प और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है।
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