World Biggest Shivling: बिहार में स्थापित, जानिए 33 फीट ऊंचे महालिंग की खासियत

January 19, 2026 7:48 PM

world biggest shivling in bihar: बिहार में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग, पढ़ें इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब

दुनिया का सबसे बड़ा 33 फीट ऊंचा शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित Virat Ramayan Mandir में 17 जनवरी को स्थापित हुआ।

यह ब्लैक ग्रेनाइट के एक ही पत्थर से बना है, जिसका वजन 210 मीट्रिक टन है और इस पर 1008 सहस्त्रलिंगम उत्कीर्ण हैं। इस स्टोरी में इस शिवलिंग से जुड़े सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं।

  • दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग बिहार में स्थापित हुआ।

  • 33 फीट ऊंचा, 210 टन वजनी, ब्लैक ग्रेनाइट से निर्मित।

  • तमिलनाडु से 2565 किमी की यात्रा कर बिहार पहुंचा।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में दुनिया के सबसे बड़े ‘अखंड शिवलिंग’ की स्थापना 17 जनवरी 2026 को हुई। इस खास अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दोनों उपमुख्यमंत्री समेत तमाम नेता और अधिकारी मौजूद रहे।

इस खबर में हम शिवलिंग जुड़े सारे सवालों के जवाब दे रहे हैं, तो आइए तमाम फैक्ट्स पर एक नजर डालते हैं-

World Biggest Shivling
World Biggest Shivling

दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग कहां स्थित है?

World Biggest Shivling (सहस्त्र लिंगम) बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया स्थित जानकी नगर स्थित विराट रामायण मंदिर में विराजित है।

सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग कितना बड़ा है और किससे बना है?

Virat Ramayan Mandir में स्थापित शिवलिंग 33 फीट ऊंचा है और इसे ब्लैक ग्रेनाइट के Monolithic पत्थर से बनाया गया है।

बिहार का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग क्यों है इतना खास?

33 फीट ऊंचे इस अखंड शिवलिंग पर 1008 सहस्त्रलिंगम भी उकेरे गए हैं। इस शिवलिंग को 354 टन वजनी एक ही पत्थर से बनाया गया है। इसका वजन 210 मीट्रिक टन है।

एक ही पत्थर से इतने बड़े सहस्त्रलिंगम का निर्माण पहली बार हुआ है। शिवलिंग में तीन भाग बनाए गए हैं। प्रथम भाग ब्रह्मा, मध्य भाग विष्णु व शीर्ष भाग को शिव भाग कहते हैं।

ब्रह्मा भाग छह फीट, विष्णु भाग नौ फीट व शिव भाग 18 फीट है। ब्रह्मा भाग आधार पीठ के अंदर रखा जाता है। विष्णु भाग में अर्घा निर्माण होता है और शिव भाग में जलाभिषेक।

इसे आकार देने में सात साल लगे। शिवलिंग का शिव भाग आधार पीठ के शीर्ष व अर्घा के अग्र में होगा। 36 फीट ऊंचे आधार पीठ व 18 फीट ऊंचे शिव भाग को मिला इसकी ऊंचाई भूतल से 54 फीट है।

किसने बनवाया बिहार का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग?

बिहार धार्मिक न्यास पर्षद ने इसे बनवाया। उस समय इसके अध्यक्ष अशोक कुणाल थे, जो कि सांसद शांभवी चौधरी के ससुर भी हैं।

इस शिवलिंग को किसने बनाया?

शिवलिंग निर्माण की पूरी प्रक्रिया शिल्पकार हेमलता देवी की निगरानी में हुआ है। इसमें शिल्पकारों के एक पूरे दल का श्रम लगा है। उसमें हेमलता के पुत्र विनायक बैकट रमण भी प्रमुख हैं।

शिवलिंग को कहां बनाया गया है?

इस शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाड़ू गांव में तैयार किया गया है।

तमिलनाडु से कैसे पहुंचा शिवलिंग?

12 नवंबर 2025 को महाबलीपुरम से रवाना हुआ था और आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से होते हुए करीब 2565 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर 46 दिनों बाद बिहार आया।

शिवलिंग बनाने में कितने दिन लगे और कितना खर्च आया?

शिवलिंग को बनाने में करीब 10 साल लगे और करीब 3 करोड़ का खर्च आया है।

क्या है सहस्त्रलिंगम का असली मतलब?

बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘सहस्त्रलिंगम’ का मतलब क्या होता है। आसान भाषा में समझें तो जब एक मुख्य शिवलिंग के ऊपर छोटे-छोटे हजार शिवलिंग बने होते हैं, तो उसे सहस्त्रलिंगम कहते हैं।

माना जाता है कि World Biggest Shivling के दर्शन करने से आपको एक साथ 1008 शिवलिंगों की पूजा का फल मिल जाता है। आठवीं शताब्दी में ऐसे शिवलिंग बनाने की परंपरा थी, जिसे बिहार में फिर से जिंदा किया गया है।

विराट रामायण मंदिर की क्या खासियत है?

सहस्त्र लिंगम को विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया गया है। यह मंदिर 120 एकड़ में फैला हुआ है। मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा।

इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी।

विराट रामायण मंदिर की स्थापना कब हुई?

विराट रामायण मंदिर का निर्माण 20 जून 2023 से चल रहा है, अभी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है।

विराट रामायण मंदिर का शिलान्यास किसने किया था?

इस मंदिर का शिलान्यास बिहार धार्मिक न्यास पर्षद के तत्कालीन अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल ने किया था।

विराट रामायण मंदिर कैसे पहुंचें?

अगर आप भी इस भव्य शिवलिंग के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो यहां पहुंचना काफी आसान है:

  • हवाई जहाज से: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कुशीनगर (UP) है जो करीब 60-70 किमी दूर है। पटना एयरपोर्ट से दूरी थोड़ी ज्यादा है।

  • ट्रेन से: चकिया रेलवे स्टेशन और मोतिहारी (बापूधाम) रेलवे स्टेशन सबसे पास पड़ते हैं। वहां से आप ऑटो या टैक्सी ले सकते हैं।

  • सड़क मार्ग: यह मंदिर केसरिया बौद्ध स्तूप के पास है, जो मुजफ्फरपुर-गोरखपुर हाइवे के नजदीक पड़ता है। आप अपनी गाड़ी से आसानी से यहां आ सकते हैं।

बिहार के लिए यह गौरव की बात है कि World Biggest Shivling अब यहां स्थापित हो चुका है। जैसे ही मंदिर का काम पूरा होगा, यह जगह पूरी दुनिया में पर्यटन का बड़ा केंद्र बन जाएगी।

FAQs 

Q1. क्या विराट रामायण मंदिर में आम लोग पूजा कर सकते हैं?

फिलहाल मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। शिवलिंग की स्थापना हो चुकी है, लेकिन आम भक्तों के लिए विधिवत पूजा-अर्चना मंदिर के पूरा बनकर तैयार होने के बाद ही शुरू होने की उम्मीद है।

Q2. यह शिवलिंग भोजपुर के शिव मंदिर से कितना बड़ा है?

मध्य प्रदेश का भोजपुर मंदिर अपने विशाल शिवलिंग के लिए जाना जाता है जिसकी ऊंचाई करीब 18 फीट है (आधार सहित)। लेकिन बिहार का यह World Biggest Shivling 33 फीट ऊंचा है, जो उसे साइज में काफी बड़ा बनाता है।

Q3. ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर ही क्यों चुना गया?

ब्लैक ग्रेनाइट बहुत मजबूत पत्थर होता है। यह हजारों साल तक खराब नहीं होता और इस पर की गई नक्काशी (सहस्त्रलिंगम) मिटती नहीं है। इसी मजबूती के कारण दक्षिण भारत से खास यह पत्थर मंगवाया गया।

Q4. क्या शिवलिंग के दर्शन के लिए कोई टिकट लगता है?

नहीं, मंदिर में दर्शन पूरी तरह निशुल्क होगा। हालांकि, अभी निर्माण कार्य जारी है इसलिए एंट्री के नियम वहां की मौजूदा स्थिति पर निर्भर करेंगे।

Q5. पूर्वी चंपारण में घूमने के लिए और क्या है?

विराट रामायण मंदिर के पास ही दुनिया का सबसे ऊंचा ‘केसरिया बौद्ध स्तूप’ है। आप शिवलिंग के दर्शन के साथ-साथ वहां भी घूमने जा सकते हैं।

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