NMC का बड़ा फैसला: MBBS फीस नियम बदले, इंटर्नशिप पर अब कोई चार्ज नहीं
MBBS Course Fees New Rules: National Medical Commission (NMC) ने देशभर के मेडिकल छात्रों और उनके परिवारों को एक बड़ी राहत दी है। कमीशन ने सभी मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को आदेश दिया है कि MBBS फीस नियम के तहत अब केवल साढ़े चार साल की अकादमिक पढ़ाई की फीस ली जा सकती है। इससे ज्यादा वसूली करने वाले कॉलेजों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
NMC MBBS फीस नियम 2026 — पूरा मामला क्या है?
कमीशन के पास लंबे समय से शिकायतें आ रही थीं कि कई संस्थान पांच या साढ़े पांच साल की पूरी अवधि की फीस वसूल रहे हैं। इस अवधि में एक साल की Compulsory Rotating Medical Internship (CRMI) भी शामिल होती है। NMC ने इन शिकायतों की समीक्षा के बाद यह आदेश जारी किया।
मामला सीधा है। MBBS प्रोग्राम में कुल साढ़े चार साल यानी 54 महीने की क्लासरूम पढ़ाई होती है। उसके बाद CRMI अलग होती है। दोनों को एक साथ जोड़कर फीस मांगना अब नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
इंटर्नशिप पर फीस — NMC ने इसे नियमविरुद्ध क्यों बताया
इंटर्नशिप की प्रकृति ही अलग होती है। यह क्लास में बैठकर पढ़ाई करने का समय नहीं है — यह अस्पताल में काम करते हुए सीखने का दौर है। कमीशन ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया कि जब कोई अकादमिक शिक्षा नहीं दी जा रही, तब उस अवधि की फीस मांगना पूरी तरह असंगत है।
CRMI इंटर्नशिप फीस नियम के अनुसार, यह प्रशिक्षण का हिस्सा है, पढ़ाई का नहीं। इसलिए इस एक साल की अवधि को फीस ढांचे में शामिल करना गलत है।
NMC का नया आदेश क्या है और कॉलेजों पर क्या पड़ेगा असर
NMC ने अपने आधिकारिक नोटिस में कॉलेजों को तीन बातें साफ तौर पर कही हैं।
पहली बात — फीस ढांचा पारदर्शी होना चाहिए और जो सुविधाएं दी जा रही हैं उनके अनुपात में होना चाहिए। दूसरी बात — इंटर्नशिप के साल को फीस संरचना में शामिल नहीं किया जाए। तीसरी बात — जो संस्थान इन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उन पर सख्त कानूनी और रेगुलेटरी कार्रवाई होगी।
हालांकि यह कार्रवाई कब और किस प्रक्रिया के तहत होगी, इसकी विस्तृत समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं की गई है।
MBBS में 4.5 साल की पढ़ाई और एक साल की CRMI — फर्क समझें
नियमों के मुताबिक MBBS कोर्स की अकादमिक अवधि 54 महीने यानी साढ़े चार साल की है। इस दौरान छात्र कक्षाओं में पढ़ते हैं, परीक्षाएं देते हैं और क्लिनिकल ट्रेनिंग का हिस्सा बनते हैं।
इसके बाद शुरू होती है CRMI — एक साल की अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप। यह अवधि अलग है। NMC का कहना है कि MBBS 4.5 साल की फीस सिर्फ उन्हीं 54 महीनों के लिए होनी चाहिए जब छात्र औपचारिक शिक्षा ले रहे हों।
दोनों को मिलाकर फीस वसूलना — जो अब तक कई कॉलेजों की आदत रही है — अब नियमों के दायरे से बाहर है।
अभिभावकों के लिए राहत: 5 से 10 लाख रुपये तक की बचत कैसे?
प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की एक साल की फीस अक्सर पांच से दस लाख रुपये के बीच होती है। इंटर्नशिप के साल की फीस हटने का सीधा मतलब है कि एक परिवार इतनी बड़ी रकम बचा सकता है।
अगर आपका बच्चा किसी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा है और संस्थान पूरे कोर्स की फीस मांग रहा है, तो NMC के इस आदेश का सीधे हवाला दिया जा सकता है। इससे भी काम न बने तो NMC के पास शिकायत दर्ज कराने का विकल्प मौजूद है — कमीशन ने छात्र अधिकारों की रक्षा के लिए यह रास्ता खुला रखा है।
मेडिकल शिक्षा सुधार की दिशा में यह आदेश एक ठोस कदम है। कॉलेज फीस नियंत्रण को लेकर यह पहली बार इतनी स्पष्ट भाषा में निर्देश जारी हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MBBS की फीस कितनी होती है?
प्राइवेट कॉलेजों में MBBS की सालाना फीस आमतौर पर पांच लाख से लेकर बीस लाख रुपये तक होती है — कॉलेज की रैंकिंग और राज्य के आधार पर यह बदलती है। NMC के नए आदेश के बाद यह फीस सिर्फ 54 महीने की अकादमिक पढ़ाई के लिए ली जाएगी। इंटर्नशिप के एक साल की रकम इसमें नहीं जुड़ेगी, जिससे कुल खर्च में पांच से दस लाख रुपये तक की कमी आ सकती है। अपने कॉलेज से लिखित में फीस का ब्योरा मांगें और NMC के आदेश का संदर्भ दें।
NMC के आदेश के बाद भी कॉलेज फीस मांगे तो क्या करें?
अगर कोई कॉलेज इस आदेश के बावजूद इंटर्नशिप की फीस मांगता है, तो NMC की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत में कॉलेज का नाम, फीस की मांग का लिखित सबूत और NMC के आदेश की प्रति संलग्न करें। कमीशन ने स्पष्ट किया है कि उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई होगी। शुरुआत में कॉलेज प्रबंधन को लिखित नोटिस देना बेहतर रहेगा।
MBBS में इंटर्नशिप कितने समय की होती है?
MBBS पूरी करने के बाद एक साल की अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप — जिसे CRMI कहते हैं — करनी होती है। यह अस्पताल में विभिन्न विभागों में काम करते हुए पूरी की जाती है। इस दौरान छात्र डॉक्टर की तरह काम करते हैं, लेकिन यह अकादमिक पढ़ाई का हिस्सा नहीं है। NMC ने इसी आधार पर इंटर्नशिप की फीस को नियमविरुद्ध बताया है।
क्या सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी यह नियम लागू होगा?
NMC का यह आदेश सभी मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों पर लागू होता है — सरकारी और प्राइवेट दोनों पर। हालांकि सरकारी कॉलेजों में फीस पहले से बहुत कम होती है और वहां इंटर्नशिप पर अलग से फीस लेने की शिकायतें कम रही हैं। मुख्य असर प्राइवेट संस्थानों पर पड़ेगा जहां फीस विवाद सबसे ज्यादा सामने आए हैं।
CRMI और MBBS की पढ़ाई में क्या फर्क है?
MBBS की पढ़ाई 54 महीने की होती है — इसमें कक्षाएं, परीक्षाएं और क्लिनिकल रोटेशन शामिल हैं। CRMI यानी Compulsory Rotatory Medical Internship इससे अलग है। यह डिग्री मिलने के बाद एक साल का व्यावहारिक प्रशिक्षण है जिसमें छात्र अस्पताल के अलग-अलग विभागों में काम करते हैं। दोनों की प्रकृति अलग है — इसीलिए NMC ने इन्हें फीस के मामले में भी अलग रखने का आदेश दिया है।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, NMC आधिकारिक नोटिस










