Google Chrome चुपके से डाउनलोड कर रहा 4GB का AI मॉडल — डिलीट करो तो फिर आ जाता है
आपने कुछ डिलीट नहीं किया, कोई नया ऐप इंस्टॉल नहीं किया — फिर भी लैपटॉप की स्टोरेज अचानक कम हो गई। वजह? गूगल क्रोम। वह चुपचाप आपके सिस्टम में 4GB का एक AI मॉडल डाउनलोड कर रहा है — बिना पूछे, बिना बताए।
ये मामला आया कहाँ से सामने?
स्वीडन के कंप्यूटर वैज्ञानिक Alexander Hanff ने अपने ब्लॉग पोस्ट में इस बात का खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि क्रोम ब्राउजर यूजर्स की परमिशन के बिना ही OptGuideOnDeviceModel फोल्डर के अंदर एक फाइल डाउनलोड करता है — नाम है weights.bin।
यह कोई छोटी-मोटी फाइल नहीं है। पूरे 4GB की है।
यह फाइल है क्या आखिर?
यह और कुछ नहीं — गूगल का अपना AI मॉडल Gemini Nano है।
वही Gemini Nano जो गूगल के असिस्टेंट, Pixel फोन और अब Chrome में भी घुसता जा रहा है।
और यहाँ असली बात आती है — यह मॉडल तब डाउनलोड होता है जब आपने Chrome में कुछ AI features चालू किए हों। जैसे ‘Help Me Write’ या ‘On-Device Scam Detection’।
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Chrome Gemini Nano: एक नज़र में ज़रूरी बातें
- Google Chrome बिना explicit permission के Gemini Nano AI मॉडल (4GB) यूजर के सिस्टम पर डाउनलोड कर लेता है।
- यह मॉडल
OptGuideOnDeviceModelफोल्डर मेंweights.binनाम की फाइल के रूप में मिलता है। - डाउनलोड तब होता है जब ‘Help Me Write’ या ‘On-Device Scam Detection’ जैसे Chrome AI features enabled हों।
- फाइल डिलीट करने पर Chrome उसे automatically दोबारा डाउनलोड कर लेता है।
- Google ने 2024 में Chrome में Gemini Nano को officially integrate किया था।
- Settings → System → On-Device AI option बंद करने से यह रुक जाता है।
डिलीट किया, फिर भी वापस आ गया?
यही सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है।
अगर आपने weights.bin फाइल ढूंढकर डिलीट कर दी, तो Chrome उसे फिर से डाउनलोड कर लेगा — जब तक AI feature चालू है, यह सिलसिला नहीं रुकेगा।
The Verge की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे छुटकारा पाने का एकमात्र तरीका यह है कि Chrome Settings में जाएं, फिर System में जाएं, और ‘On-Device AI’ को बंद कर दें।
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प्राइवेसी का सवाल — जो कोई नहीं उठा रहा
सच पूछें तो Gemini Nano की मंशा बुरी नहीं है। यह डेटा को cloud पर नहीं भेजता — सारा काम आपके device पर ही होता है।
Google का कहना है कि यह model scam detection और ‘Help Me Write’ जैसे features को इस तरह power करता है कि आपकी जानकारी बाहर नहीं जाती।
लेकिन सवाल data का नहीं — सवाल permission का है।
4GB कोई छोटी जगह नहीं होती, खासकर उन लोगों के लिए जिनके लैपटॉप में 128GB या 256GB SSD है। और अगर यूजर को बताया ही नहीं गया कि यह डाउनलोड हो रहा है, तो “on-device privacy” वाला argument थोड़ा खोखला लगता है।
Google ने 2024 में की थी इसकी शुरुआत
9to5Google को दिए एक बयान में Google ने कहा कि वे 2024 से ही Chrome के लिए Gemini Nano को एक lightweight, on-device model के रूप में उपलब्ध करा रहे हैं।
Storage की दिक्कत होने पर यह model अपने आप delete भी हो जाता है — यह गूगल का खुद का कहना है।
लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि यह पहली बार download होते वक्त consent क्यों नहीं लेता।
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तो अब क्या करें?
अगर आप इस AI model को अपने सिस्टम पर नहीं रखना चाहते, तो यह तरीका अपनाएं:
- Chrome खोलें
- Settings में जाएं (तीन dots → Settings)
- “System” सेक्शन में जाएं
- “On-Device AI” का option ढूंढें
- उसे बंद कर दें
बस इतना काफी है।
इसके बाद Chrome Gemini Nano को दोबारा download नहीं करेगा।
People Also Ask — FAQ
Q1: गूगल क्रोम में 4GB की weights.bin फाइल क्या होती है और क्या इसे डिलीट करना सेफ है?
A: weights.bin दरअसल Google का Gemini Nano AI model है जो Chrome अपने on-device AI features के लिए automatically download करता है। इसे डिलीट करना safe है, लेकिन अगर Chrome में ‘Help Me Write’ या ‘On-Device Scam Detection’ feature चालू है, तो यह फाइल वापस download हो जाएगी। इससे permanently छुटकारा पाने के लिए Chrome Settings → System → On-Device AI option बंद करना होगा।
Q2: क्या Google Chrome बिना परमिशन के AI model डाउनलोड कर सकता है — यह legal है?
A: यह technically एक grey area है। Google का कहना है कि यह download तभी होता है जब user ने Chrome AI features को enable किया हो — जो कि एक implicit consent माना जाता है। लेकिन कई privacy experts का मानना है कि 4GB की फाइल बिना explicit notification के install होना user rights का उल्लंघन है। Alexander Hanff जैसे researchers ने इस पर openly सवाल उठाए हैं। फिलहाल इस मामले में कोई legal action नहीं हुई है।
Q3: Chrome में On-Device AI बंद करने से क्या-क्या features बंद हो जाएंगे?
A: On-Device AI बंद करने पर ‘Help Me Write’, ‘On-Device Scam Detection’, और Gemini Nano से जुड़े कुछ local AI features काम करना बंद कर देंगे। हालांकि Chrome की basic browsing, extensions, और cloud-based Gemini assistant पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जो features internet connection के बिना काम करते थे, वही प्रभावित होंगे।
Q4: Gemini Nano और regular Gemini में क्या फर्क है — और Chrome में कौन सा है?
A: Gemini Nano Google का सबसे lightweight AI model है जो directly device पर run होता है — बिना internet के भी। यह cloud-based Gemini से कमज़ोर है लेकिन fast और private है। Chrome में यही Gemini Nano use होता है, जबकि Chrome का chatbot assistant cloud-based Gemini से connected है। दोनों अलग-अलग काम करते हैं।
Q5: क्या सिर्फ Chrome में यह होता है या Firefox और Edge में भी AI models ऐसे install होते हैं?
A: फिलहाल यह मामला specifically Google Chrome और Gemini Nano का है। Mozilla Firefox में ऐसा कोई on-device AI model background में install नहीं होता। Microsoft Edge में Copilot integration है, लेकिन वह primarily cloud-based है और इस तरह silent background download की कोई confirmed report नहीं है। Chrome का यह behavior इस वक्त unique है — और इसीलिए यह बड़ी खबर बनी।
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