दुबई का ‘सफेद सोना’: ऊंटनी का दूध ₹3000/लीटर, जानें Dubai Camel Farm का पूरा सच
गाय-भैंस का दूध तो सबने पिया है — लेकिन एक लीटर दूध के लिए ₹3000 चुकाने की सोची है? दुबई में यही हो रहा है। और लोग खुशी-खुशी दे रहे हैं।
दुबई में ऊंटनी का दूध ‘White Gold’ कैसे बना?
दुबई का नाम सुनते ही दिमाग में आता है — Burj Khalifa, Gold Souk, luxury cars। लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां एक और चीज ने वैसी ही चमक पकड़ी है। वो है ऊंटनी का दूध।
इसे ‘White Gold’ यानी सफेद सोना कहा जाने लगा है। और यह सिर्फ कहने की बात नहीं है — इसकी कीमत, इसकी डिमांड और इसका export volume देखें तो समझ आता है कि यह नाम क्यों पड़ा।
रेगिस्तान के जहाज को हम सदियों से जानते हैं। ऊंट ने अरब सभ्यता को जिंदा रखा — सफर में, जंग में, व्यापार में। लेकिन आज 2024 में ऊंट एक नई भूमिका में है। वो अब किसी की सवारी नहीं बनता — वो एक economy चलाता है।
Dubai Camel Farm की कहानी असल में अरब की उस सोच का नतीजा है जो तेल के खत्म होने से पहले अगले 50 साल की तैयारी कर रही है। और इस तैयारी में ऊंटनी का दूध एक बड़ा दांव है।
अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ एक niche product है — तो जान लीजिए कि global camel milk market 2024 में करीब $4.5 billion की है और 2030 तक $10 billion पार करने का अनुमान है।
यह दूध है, बिज़नेस है, और एक पूरी revolution है।
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Dubai Camel Farm — 4200 एकड़ का साम्राज्य {#camel-farm}
दुबई के बाहरी इलाके में फैला Emirates Industry for Camel Milk and Products (EICMP) का फार्म कोई साधारण डेयरी नहीं है।
4200 एकड़ — यानी करीब 1700 हेक्टेयर जमीन पर हजारों ऊंट और ऊंटनियां आधुनिक तरीके से पाली जाती हैं। यहां पुराना तरीका नहीं चलता। Automated milking machines हैं। Climate-controlled sheds हैं। Veterinary teams 24 घंटे काम करती हैं।
यह अरब क्षेत्र की सबसे बड़ी camel dairy operation है।
यहां क्या-क्या होता है?
फार्म पर ऊंटनियों की दूध देने की क्षमता बढ़ाने के लिए Hybrid breeding का इस्तेमाल होता है। एक सामान्य ऊंटनी दिन में 2-3 लीटर दूध देती है। लेकिन यहां के hybrid camels रोजाना 7 से 8 लीटर तक दूध देते हैं। यह कोई छोटी बात नहीं — यह तीन गुना ज्यादा production है।
दूध निकालने के बाद उसे तुरंत cold chain में भेजा जाता है। कुछ हिस्सा यहीं process होता है — fresh milk, flavored milk, और skincare products के लिए। बाकी दूध को Austria भेजा जाता है जहां world-class processing facility में camel milk chocolate बनती है।
फिर वो चॉकलेट वापस दुबई आती है — और दुनिया भर में export होती है।
गर कभी दुबई जाएं तो Al Ain Camel Market जरूर देखें। यह UAE का सबसे बड़ा traditional camel market है और आपको समझ आएगा कि ऊंट यहां की संस्कृति में कितने गहरे हैं।
ऊंटनी का दूध इतना महंगा क्यों है?
यही सवाल सबके मन में आता है। ₹3000 प्रति लीटर? गाय का दूध ₹50-60 में मिलता है। तो इसमें ऐसा क्या है?
जवाब दो हिस्सों में है — supply की कमी और demand की ताकत।
Supply क्यों कम है?
ऊंटनी का दूध निकालना आसान नहीं होता। ऊंटनी तभी दूध देती है जब उसका बच्चा (बछड़ा) पास हो। उसे देखकर या उसकी गंध से ही ऊंटनी का दूध उतरता है। यह गाय से बिल्कुल अलग है।
एक ऊंटनी साल में सिर्फ एक बच्चा देती है। और दूध देने का period भी limited होता है। इसलिए production naturally कम रहती है — चाहे फार्म कितना भी बड़ा हो।
Demand क्यों बढ़ रही है?
यहीं से असली कहानी शुरू होती है। ऊंटनी का दूध सिर्फ “दूध” नहीं रहा। यह अब एक health product बन चुका है।
International market में इसकी कीमत ₹2000 से ₹3000 प्रति लीटर है। Specialty stores और online platforms पर यह और भी महंगा बिकता है। UAE के भीतर local market में यह थोड़ा सस्ता मिलता है — लेकिन फिर भी गाय के दूध से कई गुना ज्यादा।
गाय के दूध से कितना अलग है ऊंटनी का दूध?
यहां कोई marketing नहीं है — सिर्फ facts हैं।
| पोषक तत्व | ऊंटनी का दूध | गाय का दूध |
|---|---|---|
| Fat | कम | ज्यादा |
| Vitamin C | 3 गुना ज्यादा | कम |
| Calcium | ज्यादा | अच्छा |
| Iron | ज्यादा | कम |
| Potassium | ज्यादा | कम |
| Lactose | कम | ज्यादा |
| Immunoglobulins | ज्यादा (immunity के लिए) | कम |
Lactose कम होने का मतलब है कि जिन लोगों को गाय का दूध नहीं पचता, वे ऊंटनी का दूध पी सकते हैं। यह अकेला factor millions of people के लिए game-changer है।
Health Claims — Science क्या कहता है?
यहां honestly बताना जरूरी है — camel milk पर research अभी growing stage में है। लेकिन जो studies आई हैं, वो promising हैं।
कई studies में यह देखा गया है कि ऊंटनी के दूध में मौजूद insulin-like proteins type 1 diabetes के patients में blood sugar control में मदद कर सकते हैं। WHO-affiliated researchers ने भी camel milk को malnourished children की recovery में useful पाया है।
Autism पर भी कुछ preliminary studies हुई हैं — जिनमें camel milk के positive effects देखे गए। हालांकि यह अभी conclusive नहीं है।
पाचन के लिए, immunity के लिए, skin के लिए — इन सब पर काम जारी है। और जैसे-जैसे evidence बढ़ रहा है, demand भी बढ़ रही है।
जो लोग इसे “miracle milk” कहते हैं, उन पर blindly भरोसा मत करें। लेकिन जो nutritional data है, वो genuinely impressive है।
₹700 की चॉकलेट — पूरी कहानी
अब बात करते हैं उस चीज की जो दुबई camel milk को दुनिया के drawing rooms तक ले गई — camel milk chocolate।
करीब 70 ग्राम की एक bar की कीमत ₹700 से ₹1000 के बीच होती है। यह दुनिया की सबसे महंगी chocolates में गिनी जाती है।
यह इतनी महंगी क्यों है?
- Raw material: ऊंटनी का दूध खुद महंगा है
- Processing: दूध Austria की high-end facility में process होता है
- Transport: दूध और तैयार chocolate दोनों की international shipping होती है
- Brand value: “Dubai chocolate” अब एक status symbol बन चुका है
- Limited production: EICMP के फार्म से सालाना करीब 200 टन chocolate बनती है — यह बड़ी मात्रा है, लेकिन global demand के मुकाबले अभी भी limited
यह chocolate यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में खूब बिकती है। Gulf countries में तो यह gifting का एक premium option बन चुकी है।
सिर्फ Chocolate नहीं — पूरी Product Range है
Dubai Camel Farm सिर्फ दूध और chocolate नहीं बेचता। Product range में शामिल हैं:
- Fresh camel milk (plain और flavored)
- Camel milk powder
- Camel milk skincare products (face cream, soap, lotion)
- Camel milk ice cream
- Camel milk cheese (कुछ limited quantities में)
- Camel milk soap bars — जो दुबई के सबसे popular souvenirs में से एक हैं
Global Market: तेल के बाद अब यह कारोबार
यह सिर्फ एक dairy business नहीं है। यह एक strategic economic move है।
अरब देश जानते हैं कि तेल हमेशा नहीं रहेगा। Saudi Arabia का Vision 2030 और UAE का अपना economic diversification plan — दोनों में agriculture और food security को बड़ी जगह दी गई है। Camel milk industry इसी बड़े plan का हिस्सा है।
Saudi Arabia और UAE आज दुनिया के सबसे बड़े camel milk producers हैं। इनके अलावा Kazakhstan, Somalia और Sudan में भी camel dairy industries develop हो रही हैं।
Global camel milk market 2023 में करीब $4.5 billion की थी। 2030 तक यह $10 billion पार कर सकती है। यह growth rate किसी भी traditional dairy product से कहीं ज्यादा है।
Europe और North America में camel milk को “superfood” की category में रखा जा रहा है। Amazon और specialty health stores पर camel milk powder, camel milk kefir और camel milk protein supplements अब easily मिलते हैं।
अगर आप food business में हैं या invest करना चाहते हैं — camel milk products का import-export एक genuinely emerging opportunity है। India में अभी इस market में almost कोई नहीं है।
भारत में क्या हो रहा है? थार की खोई हुई दौलत
यह section थोड़ा दर्दनाक है।
भारत में थार रेगिस्तान है। राजस्थान में ऊंटों की पुरानी परंपरा है। Camel milk की हर वो जरूरत यहां पूरी हो सकती है जो दुबई में है। फिर भी हम पीछे हैं — और बहुत पीछे हैं।
ऊंटों की घटती संख्या
2012 की livestock census में राजस्थान में करीब 3.3 लakh ऊंट थे। 2019 की census में यह संख्या घटकर 2.5 lakh से भी कम हो गई। Trend अभी भी नीचे की तरफ है।
कारण कई हैं — mechanization से ऊंट की सवारी की जरूरत कम हुई, pastoral land कम हुई, और camel milk dairy का कोई organized system नहीं बना।
कुछ उम्मीद की किरणें
Saras Dairy (Rajasthan) ने कुछ साल पहले limited scale पर camel milk sell करना शुरू किया था।
Maru Garima जैसे NGO-backed projects ने Bikaner और Jaisalmer के इलाकों में camel milk collection और marketing की कोशिश की है।
NRCE (National Research Centre on Camel), Bikaner — यह India का एकमात्र camel research center है। यहां hybrid breeding और milk production बढ़ाने पर research हो रही है।
2023-24 में Rajasthan government ने camel dairy development के लिए कुछ schemes announce कीं — लेकिन implementation अभी धीमी है।
असली सवाल
भारत के पास जमीन है, ऊंट हैं, research center है, और एक growing health-conscious middle class है जो ₹500 का protein shake पीती है।
फिर भी camel milk ₹50 में खरीदने वाला कोई नहीं, और ₹3000 में बेचने का सिस्टम तो दूर की बात है।
यह gap एक problem है। लेकिन किसी entrepreneur के लिए यह एक बड़ा opportunity भी है।
FAQ: Dubai Camel Farm
1. दुबई में ऊंटनी के दूध की कीमत कितनी है?
International market में एक लीटर ऊंटनी के दूध की कीमत ₹2000 से ₹3000 के बीच होती है। UAE के local market में यह थोड़ा कम — करीब ₹800-1200 प्रति लीटर — मिल सकता है। कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि दूध fresh है, powdered है, या किसी product में process हुआ है। Online international retailers पर camel milk powder और specialty products और भी महंगे होते हैं।
2. Dubai Camel Farm कहां है और कैसे visit करें?
Emirates Industry for Camel Milk and Products (EICMP) का फार्म दुबई के Al Ain highway के पास स्थित है। Tourist visits limited हैं और advance booking जरूरी होती है। हालांकि, दुबई में camel milk products airport, malls और specialty stores में आसानी से मिलते हैं। Al Ain Camel Market एक public destination है जो visitors के लिए open है।
3. क्या ऊंटनी का दूध सच में डायबिटीज में फायदेमंद है?
Several studies ने यह दिखाया है कि camel milk में insulin-like proteins होते हैं जो blood sugar regulate करने में मदद कर सकते हैं — खासकर Type 1 diabetes के patients में। एक study जो Diabetes Care journal में publish हुई थी, उसमें Type 1 diabetic patients में camel milk consumption के बाद insulin requirements में कमी देखी गई। लेकिन इसे किसी prescribed medicine का replacement नहीं समझना चाहिए। Doctor की सलाह जरूरी है।
4. ऊंटनी का दूध पीने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
Fresh camel milk को सीधे पीना सबसे अच्छा माना जाता है। Pasteurized version भी available है जो shelf life बढ़ाता है। कुछ लोग इसे smoothie में, tea में, या cereal के साथ लेते हैं। Camel milk powder उन लोगों के लिए convenient option है जिन्हें fresh milk easily नहीं मिलती। भारत में फिलहाल online कुछ suppliers हैं जो camel milk powder deliver करते हैं।
5. क्या भारत में camel milk easily मिलती है?
अभी नहीं — यही सबसे बड़ी problem है। Rajasthan के कुछ शहरों में locally मिल सकती है, लेकिन organized retail में नहीं है। कुछ online platforms पर camel milk powder import करके बेचा जाता है, लेकिन वो काफी महंगा पड़ता है। अगर industry properly develop हो जाए, तो भारत में camel milk ₹200-400 प्रति लीटर तक आ सकती है।
6. ऊंटनी का दूध गाय के दूध से बेहतर है?
“बेहतर” एक relative term है। जो लोग lactose intolerant हैं, उनके लिए camel milk clearly better है क्योंकि इसमें lactose कम होता है। Vitamin C तीन गुना ज्यादा है। Iron और immunoglobulins भी ज्यादा हैं। लेकिन taste थोड़ा अलग और saltier होता है। और कीमत बहुत ज्यादा है। रोजाना पीने के लिए practical नहीं है — लेकिन health supplement की तरह इस्तेमाल करने के लिए यह एक genuinely strong option है।
7. Camel milk chocolate कहां से खरीद सकते हैं?
Dubai airport duty-free और मॉल्स पर आसानी से मिलती है। Internationally, Al Nassma (दुबई की famous camel milk chocolate brand) की products Amazon और specialty gourmet stores पर मिलती हैं। India में कुछ premium gift shops और online retailers import करके बेचते हैं — ₹700 से ₹1500 तक एक bar के लिए।
conclusion
दुबई ने एक बार फिर साबित किया है कि vision और execution मिल जाएं तो रेत से सोना निकाला जा सकता है — literally।
ऊंटनी का दूध, जो सदियों से Bedouin communities का हिस्सा था, आज एक $4.5 billion की global industry बन चुका है। Dubai Camel Farm इस revolution का सबसे बड़ा symbol है — जहां tradition और technology एक साथ काम कर रही हैं।
अगर राजस्थान का कोई भी जिला दुबई model को seriously copy करे — तो “सफेद सोना” सिर्फ दुबई की पहचान नहीं रहेगी।
क्या आप camel milk के बारे में और जानना चाहते हैं? या राजस्थान में camel dairy business opportunity को explore करना चाहते हैं? नीचे comment करें — और इस article को उन लोगों तक share करें जो सच में कुछ नया सोचते हैं।
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