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Trump Taiffs: 10% ग्लोबल टैरिफ लागू, भारत-PM मोदी की डील पर असर

Trump Taiffs: सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद अमेरिका में 10% ग्लोबल टैरिफ लागू, भारत और PM मोदी की डील पर क्या होगा असर? जब आप सो रहे थे तब अमेरिका में एक बहुत बड़ी आर्थिक और राजनीत
Trump Taiffs: 10% ग्लोबल टैरिफ लागू, भारत-PM मोदी की डील पर असर
Trump Taiffs: 10% ग्लोबल टैरिफ लागू, भारत-PM मोदी की डील पर असर

Trump Taiffs: सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद अमेरिका में 10% ग्लोबल टैरिफ लागू, भारत और PM मोदी की डील पर क्या होगा असर?

जब आप सो रहे थे तब अमेरिका में एक बहुत बड़ी आर्थिक और राजनीतिक हलचल हुई है। सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले के बाद Trump Taiffs से जुड़े कई चौंकाने वाले अपडेट सामने आए हैं।

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'10% ग्लोबल टैरिफ' लगाने का रातों-रात ऐलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि 'इंडिया डील' पूरी तरह सुरक्षित है। उनके मुताबिक, भारत के साथ हाल ही में हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पिछले टैरिफ को अवैध बताने के बावजूद, ट्रंप ने पीएम मोदी को 'महान व्यक्ति' बताते हुए कहा कि भारत के साथ व्यापार अब पूरी तरह निष्पक्ष और अमेरिका के पक्ष में है।

ट्रेड डील सुरक्षित, ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ

नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक, इस फैसले की गूंज है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आश्वस्त किया है कि भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर कोई आंच नहीं आएगी। राष्ट्रपति ने बिल्कुल साफ शब्दों में कहा कि भारत के साथ जो शर्तें तय हुई हैं, वे बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।

उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री की खुलकर तारीफ करते हुए उन्हें एक ‘महान और स्मार्ट’ इंसान बताया है।

सच तो यह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप काफी नाराज थे। उन्होंने अपने टैरिफ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘शर्मनाक’ करार देते हुए जजों को खूब खरी-खोटी सुनाई। लेकिन, इस कानूनी झटके के महज कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने अपना ‘प्लान-B’ लागू कर दिया है।

उन्होंने तुरंत ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का इस्तेमाल करते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने के एग्जीक्यूटिव आदेश पर हस्ताक्षर करने का ऐलान किया है।

ध्यान रखें, यह नया टैक्स उन सभी टैरिफ के ऊपर अलग से लगाया जाएगा जो पहले से लागू हैं। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि हमारे पास वह करने का पूरा अधिकार है जो हम देश के हित में चाहते हैं।

यह नया टैरिफ अगले तीन दिनों के भीतर प्रभावी हो सकता है। हालांकि, अमेरिकी कानून के मुताबिक इसे बिना संसद (कांग्रेस) की मंजूरी के केवल 150 दिनों के लिए ही लागू किया जा सकता है।

ट्रंप के भारत पर बड़े दावे: 'परमाणु युद्ध रोका, 3.5 करोड़ जानें बचाईं'

भारत और दक्षिण एशिया को लेकर ट्रंप ने फिर कई बड़े और सनसनीखेज दावे किए हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि उनका भारत के साथ रिश्ता बहुत शानदार है और पीएम मोदी के साथ उनकी केमिस्ट्री हमेशा से बेहतरीन रही है।

ट्रंप ने आरोप लगाया कि भारत पहले रूस से भारी मात्रा में तेल ले रहा था, लेकिन उनकी व्यक्तिगत अपील पर भारत पीछे हट गया।

यहां लोग अक्सर असली कूटनीति को समझने में गलती करते हैं, लेकिन ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच भयंकर परमाणु युद्ध होने वाला था, जिसे सिर्फ उन्होंने रोका। ट्रंप के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें 3.5 करोड़ जानें बचाने का सीधा श्रेय दिया।

उन्होंने बताया कि दोनों देशों को सख्त चेतावनी दी गई थी कि अगर तनाव नहीं रुका तो उन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाएंगे। इसी आर्थिक खौफ के बाद दोनों देशों ने शांति का रास्ता चुना।

क्या है ‘सेक्शन 122’ और इसके नियम?

सेक्शन 122 अमेरिकी व्यापार कानून (Trade Act 1974) का एक ऐसा पुराना प्रावधान है जिसका इस्तेमाल अमेरिका के इतिहास में पहले कभी नहीं किया गया।

  • इसके तहत राष्ट्रपति को व्यापार घाटे (Balance of Payments) को संतुलित करने के लिए अधिकतम 15% तक अस्थायी टैरिफ लगाने की विशेष शक्ति मिलती है।

  • ट्रंप ने इसी कानूनी लूपहोल का फायदा उठाते हुए फिलहाल 10% का बेस रेट तय किया है।

इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके लिए पहले किसी लंबी औपचारिक जांच या रिपोर्ट की जरूरत नहीं होती, जिससे सरकार बहुत तेजी से कदम उठा सकती है। ट्रंप इसे एक ‘ब्रिज’ (पुल) की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बावजूद वह आयात पर अपना नियंत्रण बनाए रख सकें।

IEEPA से यह अलग कैसे है? सुप्रीम कोर्ट ने जिस IEEPA (1977) कानून को खारिज किया, वह राष्ट्रीय आपात स्थिति में विदेशी खतरों से निपटने के लिए बनाया गया था। उसका इस्तेमाल आमतौर पर विदेशी संपत्ति फ्रीज करने के लिए होता है, सीधे टैरिफ थोपने के लिए नहीं। इसके उलट, सेक्शन 122 में अस्थायी आयात शुल्क लगाने की स्पष्ट अनुमति है।

ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को ‘राष्ट्र के लिए कलंक’ क्यों कहा?

सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले से तिलमिलाए ट्रंप ने जजों पर सीधे निजी हमले शुरू कर दिए हैं। ट्रंप उस समय व्हाइट हाउस में गवर्नर्स के साथ एक अहम बैठक कर रहे थे जब उन्हें यह खबर मिली। उन्होंने इस फैसले को ‘अपमानजनक’ करार दिया और गुस्से में तुरंत कमरे से बाहर निकल गए।

उन्होंने मीडिया से कहा कि कोर्ट के कुछ सदस्य ‘हमारे देश के लिए कलंक’ हैं। ट्रंप विशेष रूप से उन कंजर्वेटिव जजों से नाराज हैं जिन्हें उन्होंने खुद नियुक्त किया था (जैसे जस्टिस एमी कोनी बैरेट और नील गोर्सच), लेकिन उन्होंने भी टैरिफ के खिलाफ वोट देकर उदारवादी जजों का साथ दिया।

ट्रंप ने कहा कि इन जजों में वह साहस ही नहीं था जो देश के लिए सही फैसला लेने के लिए जरूरी होता है। उन्होंने इस फैसले को ‘बेहद निराशाजनक’ बताते हुए इसे अमेरिका को फिर से गरीब बनाने की एक गहरी साजिश करार दिया।

स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन से पहले ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि उनके खिलाफ वोट देने वाले जज आएं या नहीं, "मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।"

व्यापार जगत के लिए क्या है ‘सिल्वर लाइनिंग’?

भले ही ट्रंप नए सिरे से टैरिफ लेकर आए हैं, लेकिन ग्लोबल बिजनेस वर्ल्ड के लिए एक अच्छी खबर भी छिपी है।

पुराने ‘इमरजेंसी टैरिफ’ के मुकाबले अब ट्रंप जिन कानूनों का सहारा ले रहे हैं, उनमें एक तय कानूनी प्रक्रिया होती है। अब कंपनियों को रातों-रात अचानक मिलने वाले झटकों के बजाय, पहले से नोटिस और जांच का थोड़ा समय मिलेगा। इससे कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन और योजना बनाने का मौका मिलेगा।

हालांकि, ट्रंप ने फिर खुली धमकी दी है कि वह किसी भी ऐसे देश के साथ तुरंत व्यापार बंद कर सकते हैं जो अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करेगा।

वसूले गए 134 अरब डॉलर का क्या होगा हिसाब?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने यह तो कह दिया कि राष्ट्रपति के पास अकेले दम पर असीमित टैक्स थोपने की असाधारण शक्ति नहीं है ("मेजर क्वेश्चन्स डॉक्ट्रिन" का हवाला देते हुए), लेकिन एक बहुत बड़ा सवाल बिना जवाब के छोड़ दिया।

सरकार अब तक 3 लाख से ज्यादा आयातकों से लगभग 134 अरब डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये) वसूल चुकी है। अदालत ने यह नहीं बताया कि इस भारी-भरकम रकम का अब क्या किया जाए।

जस्टिस ब्रेट कवाना (जिन्होंने ट्रंप के पक्ष में असहमति जताई) ने चेतावनी दी कि रिफंड की प्रक्रिया एक बहुत बड़ा ‘मेस’ (मुसीबत) साबित होगी। इससे अमेरिकी खजाने पर भारी दबाव पड़ेगा और इकोनॉमी पर इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।

ट्रंप ने खुद इशारा किया है कि यह टैरिफ रिफंड का मामला वापस निचली अदालतों में जाएगा और यह कानूनी जंग अगले 5 साल तक घिसेगी।

भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा डील का सच

इसी महीने भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत बड़ा व्यापारिक समझौता (Trade Framework) हुआ था।

  • इस समझौते के तहत, अमेरिका भारतीय निर्यात पर 18% टैरिफ लगाएगा, जो पहले के भारी-भरकम 50% से काफी कम है।

  • बदले में भारत ने रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद करने और 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा और तकनीक उत्पाद खरीदने का बड़ा वादा किया है।

ट्रंप ने गर्व से इस डील का बखान करते हुए कहा कि अब अमेरिका भारत को कोई टैरिफ नहीं दे रहा है, जबकि भारत अमेरिका को टैरिफ दे रहा है।

भारतीय निर्यातकों को 'सुप्रीम' राहत, फिर भी पेंच बाकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को रद्द करने से भारत को बड़ी राहत मिली है। लेकिन ध्यान रहे, भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। भारत से होने वाले 8 अरब डॉलर (करीब 67,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा के कुछ विशेष निर्यात पर अभी भी भारी टैक्स जारी रहेगा।

पूर्व राजनयिक के.पी. फाबियन और ग्लोबल रिएक्शन

अमेरिकी हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने ट्रंप की टैरिफ नीति का खुलकर समर्थन किया है। उनका मानना है कि इससे अमेरिका की ट्रेड पोजिशन मजबूत हुई है।

वहीं, भारत के पूर्व राजनयिक के.पी. फाबियन ने दिलचस्प टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिकी लोकतंत्र खुद को सुधारने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि "यूरोप और भारत में इस जीत पर शैंपेन की बोतलें खुलनी चाहिए।"

दूसरी ओर, कनाडा के ट्रेड मिनिस्टर डॉमिनिक लेब्लांक ने ट्रंप के पुराने टैक्स को नाजायज बताते हुए कहा कि ऑटो और स्टील सेक्टर को इससे भारी नुकसान हुआ है। साथ ही USMCA (CUSMA) ट्रेड डील के भविष्य पर भी काले बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि ट्रंप प्रशासन इसे खत्म कर अलग-अलग समझौते करने पर विचार कर रहा है।

 FAQS

  1. ट्रंप का 10% ग्लोबल टैरिफ क्या है और यह कब से लागू होगा? यह ट्रंप द्वारा 'ट्रेड एक्ट 1974' के सेक्शन 122 के तहत लगाया गया एक नया कर है, जो अमेरिका में आने वाले सभी आयातों पर 10% अतिरिक्त लगेगा। यह अगले 3 दिन में लागू हो सकता है।

  2. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध क्यों बताया? सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि IEEPA कानून राष्ट्रपति को असीमित समय और राशि के लिए अकेले टैक्स थोपने की शक्ति नहीं देता है।

  3. क्या नए ट्रंप टैरिफ से भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर असर पड़ेगा? नहीं, ट्रंप ने साफ किया है कि भारत के साथ हुई ताज़ा ट्रेड डील पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

  4. अमेरिका द्वारा वसूले गए 134 अरब डॉलर के टैरिफ का अब क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया है। ट्रंप के मुताबिक, रिफंड का यह मामला निचली अदालतों में जाएगा और यह कानूनी लड़ाई 5 साल तक चल सकती है।

  5. सेक्शन 122 क्या है जिसका इस्तेमाल ट्रंप कर रहे हैं? यह 1974 के अमेरिकी व्यापार कानून का प्रावधान है, जो राष्ट्रपति को बिना संसद की मंजूरी के 150 दिनों तक 15% तक का अस्थायी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।

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