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रेप की सजा पर High Court की बड़ी टिप्पणी, योनि पर लिंग रखना और बिना प्रवेश के स्खलन करना बलात्कार नहीं है।

छत्तीसगढ़ High Court का बड़ा फैसला: 'बिना पेनिट्रेशन इजैक्युलेट करना रेप नहीं', कोर्ट ने बदली सजा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए रेप के एक
रेप की सजा पर High Court की बड़ी टिप्पणी, योनि पर लिंग रखना और बिना प्रवेश के स्खलन करना बलात्कार नहीं है।
रेप की सजा पर High Court की बड़ी टिप्पणी, योनि पर लिंग रखना और बिना प्रवेश के स्खलन करना बलात्कार नहीं है।

छत्तीसगढ़ High Court का बड़ा फैसला: 'बिना पेनिट्रेशन इजैक्युलेट करना रेप नहीं', कोर्ट ने बदली सजा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए रेप के एक मामले में सजा को बदल दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेल ऑर्गन को वजाइना के ऊपर रखना और फिर बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 375 के तहत 'रेप' की श्रेणी में नहीं आता। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अनुसार, यह कृत्य 'रेप की कोशिश' (Attempt to Rape) माना जाएगा और इसके लिए IPC की धारा 376/511 के तहत सजा दी जाएगी।

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क्या था पूरा मामला? 

यह मामला करीब दो दशक पुराना है। सरकारी वकील के बयान के मुताबिक, 21.05.2004 को अपील करने वाले (आरोपी) ने विक्टिम का हाथ पकड़ा और उसे ज़बरदस्ती अपने घर ले गया। वहां उसने पीड़िता के कपड़े उतार दिए और उसकी मर्ज़ी के बिना सेक्स किया। इसके बाद उसने पीड़िता को कमरे में बंद कर दिया, उसके हाथ-पैर बांध दिए और मुँह में कपड़ा ठूंस दिया।

इस घटना के बाद FIR दर्ज की गई और जांच के बाद चार्जशीट फाइल हुई। धमतरी के एडिशनल सेशंस जज ने आरोपी को IPC की धारा 376(1) और 342 के तहत दोषी पाया था। इसी सजा को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।

कोर्ट की कार्यवाही और मेडिकल एविडेंस

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने साक्ष्यों का गहराई से अध्ययन किया। सच तो ये है कि इस केस में पीड़िता के बयानों में कुछ विरोधाभास पाए गए:

  • पीड़िता का बयान: ट्रायल के दौरान पीड़िता ने पहले कहा कि आरोपी ने अपना प्राइवेट पार्ट उसकी वजाइना में डाला। हालांकि, बाद में उसने स्पष्ट किया कि आरोपी ने अपना प्राइवेट पार्ट लगभग 10 मिनट तक उसकी वजाइना के ऊपर रखा था, लेकिन उसे अंदर डाला नहीं।

  • मेडिकल रिपोर्ट: पीड़िता की जांच करने वाले डॉक्टर ने पाया कि उसका हाइमन (Hymen) सुरक्षित था। डॉक्टर ने क्रॉस-एग्जामिनेशन में कहा कि पार्शियल पेनिट्रेशन की संभावना हो सकती है क्योंकि वुल्वा में लालिमा थी, लेकिन वे रेप की पुष्टि को लेकर पक्की राय नहीं दे सके।

  • फॉरेंसिक साक्ष्य: पीड़िता के अंडरगारमेंट्स से ह्यूमन स्पर्म मिला था, जिससे इजैक्युलेशन की पुष्टि हुई।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कानूनी व्याख्या

रेप की सज़ा को रेप की कोशिश में बदलते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने कहा:

“अश्लील हमले को अक्सर रेप की कोशिश में बदल दिया जाता है। इस नतीजे पर पहुंचने के लिए कि आरोपी का बर्ताव हर हाल में, और हर तरह के विरोध के बावजूद, अपने जुनून को पूरा करने के पक्के इरादे का इशारा था, सबूत मौजूद होने चाहिए। जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है, रेप के जुर्म के लिए ज़रूरी शर्त पेनिट्रेशन है, इजैक्युलेशन नहीं। बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेशन रेप करने की कोशिश है, असल में रेप नहीं।”

कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि 2013 के अमेंडमेंट से पहले की धारा 375 के मुताबिक, रेप के लिए हल्का-सा पेनिट्रेशन भी काफी है, लेकिन उसका होना अनिवार्य है। आरोपी के वाइरिल मेम्बर का कुछ हिस्सा महिला के प्यूडेंडम के लेबिया के अंदर होना चाहिए।

कोर्ट का अंतिम फैसला (The Verdict)

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी का पीड़िता को जबरदस्ती कमरे में ले जाना और कपड़े उतारना 'जुर्म की तैयारी' का आखिरी कदम था। कोर्ट के शब्दों में:

"अपील करने वाले का विक्टिम को ज़बरदस्ती कमरे के अंदर ले जाना, सेक्स के इरादे से दरवाज़े बंद करना, जुर्म करने की 'तैयारी' का आखिरी कदम था। उसके बाद उसने विक्टिम और खुद को नंगा किया और अपने प्राइवेट पार्ट्स को विक्टिम के प्राइवेट पार्ट्स से रगड़ा और पार्शियल पेनिट्रेशन किया, जो असल में सेक्सुअल इंटरकोर्स करने की कोशिश थी।"

सजा में बदलाव:

  1. कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 376(1) (रेप) के बजाय IPC की धारा 376/511 (रेप की कोशिश) के तहत दोषी माना।

  2. उसे 3 साल 6 महीने की सज़ा और 200 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

  3. IPC की धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) के तहत उसकी पुरानी सजा बरकरार रखी गई।

  4. चूंकि आरोपी वर्तमान में जमानत पर था, इसलिए उसे शेष सजा काटने के लिए सरेंडर करने का आदेश दिया गया।

Case Title: Vasudeo Gond v. State of Chhattisgarh

FAQs

  1. क्या बिना पेनिट्रेशन के रेप का केस दर्ज हो सकता है? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अनुसार, बिना पेनिट्रेशन के कृत्य को 'रेप की कोशिश' (Attempt to rape) माना जाएगा, न कि पूर्ण रेप।

  2. IPC की धारा 376 और 511 क्या है? धारा 376 रेप की सजा के लिए है, जबकि धारा 511 किसी अपराध को करने की कोशिश (Attempt) के लिए लगाई जाती है।

  3. क्या पेनिट्रेशन के बिना इजैक्युलेशन को रेप माना जाता है? कोर्ट की ताज़ा व्याख्या के अनुसार, रेप के जुर्म के लिए पेनिट्रेशन अनिवार्य शर्त है, सिर्फ इजैक्युलेशन पर्याप्त नहीं है।

  4. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास का फैसला क्या है? जस्टिस व्यास ने स्पष्ट किया कि यदि शारीरिक अंग लेबिया के अंदर नहीं गया है, तो उसे धारा 375 के तहत रेप नहीं माना जा सकता।

  5. क्या 2013 के कानून संशोधन के बाद रेप की परिभाषा बदली है? जी हाँ, 2013 के संशोधन के बाद रेप की परिभाषा को और व्यापक बनाया गया है, लेकिन कोर्ट पुराने मामलों में उस समय लागू कानूनों के आधार पर फैसला सुनाता है।

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