PM Surya Ghar 2.0: केंद्र सरकार पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana) का अगला चरण यानी PM Surya Ghar 2.0 तैयार कर रही है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की एक ब्रेनस्टॉर्मिंग बैठक में लंबी अवधि की मेंटेनेंस गारंटी, अपार्टमेंट निवासियों के लिए ग्रुप और वर्चुअल नेट मीटरिंग, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की भूमिका और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे प्रस्तावों पर चर्चा हुई। मौजूदा योजना के तहत मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों को कवर करने का लक्ष्य है, जिसमें अब तक 40 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं।
13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च की गई पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PMSG:MBY) देश की सबसे बड़ी रूफटॉप सोलर स्कीम है। इस योजना पर सरकार ने 75,021 करोड़ रुपये का बजट तय किया है और लक्ष्य है कि मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाए जाएं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 40 लाख से ज्यादा इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं, जिनका फायदा 48 लाख से अधिक परिवारों को मिल रहा है। अब मंत्रालय इस योजना के अगले संस्करण, यानी सूर्य घर 2.0 पर काम कर रहा है, ताकि योजना को और असरदार और लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके।
MNRE की ब्रेनस्टॉर्मिंग बैठक के मुख्य फैसले (PM Surya Ghar 2.0 Updates)
MNRE के संयुक्त सचिव जे. वी. एन. सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मंत्रालय के अधिकारियों और सोलर इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने पीएम सूर्य घर 2.0 की दिशा तय करने वाले कई बदलावों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में सामने आया कि योजना के अगले चरण में सिर्फ नए इंस्टॉलेशन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि पहले से लगे सिस्टम की गुणवत्ता, सर्विस और बिजली उत्पादन की गारंटी पर भी उतना ही जोर दिया जाएगा।
लंबी अवधि की मेंटेनेंस और सर्विस गारंटी (Maintenance Guarantee)
बैठक में सबसे अहम प्रस्ताव उपभोक्ताओं को लंबी अवधि तक मेंटेनेंस और सर्विस सपोर्ट देने का रहा। अधिकारियों ने बताया कि बड़ी संख्या में घर मालिकों को अपने सोलर सिस्टम (PM Surya Ghar 2.0) की मरम्मत या वारंटी सर्विस नहीं मिल पा रही, क्योंकि जिन वेंडरों ने इंस्टॉलेशन किया था, वे या तो बंद हो चुके हैं या कारोबार से बाहर निकल गए हैं। इसी वजह से अगले चरण में सख्त मेंटेनेंस शर्तें और पूरे सिस्टम की उम्र भर बिजली उत्पादन की गारंटी सुनिश्चित करने वाला तंत्र शामिल किए जाने की संभावना है।
- MNRE की ब्रेनस्टॉर्मिंग बैठक के मुख्य फैसले (PM Surya Ghar 2.0 Updates)
- लंबी अवधि की मेंटेनेंस और सर्विस गारंटी (Maintenance Guarantee)
- अपार्टमेंट और बिना उपयुक्त छत वाले घरों के लिए ग्रुप और वर्चुअल नेट मीटरिंग
- बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) पर नए सिरे से मंथन
- डिजिटल मॉनिटरिंग और इंस्टॉलेशन क्वालिटी पर जोर
- अभी योजना की स्थिति कहां तक पहुंची
- पीएम सूर्य घर 2.0 (PM Surya Ghar 2.0) से घर मालिकों को क्या फायदा हो सकता है
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
अपार्टमेंट और बिना उपयुक्त छत वाले घरों के लिए ग्रुप और वर्चुअल नेट मीटरिंग
अभी तक यह योजना मुख्य रूप से उन घरों के लिए फायदेमंद रही है जिनके पास अपनी छत उपलब्ध है। अगले चरण में इसका दायरा अपार्टमेंट में रहने वालों और उन घरों तक भी बढ़ाया जा सकता है जिनके पास सोलर लगाने लायक छत नहीं है। इसके लिए ग्रुप नेट मीटरिंग (Group Net Metering) और वर्चुअल नेट मीटरिंग (VNM) मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें एक ही साझा सोलर इंस्टॉलेशन से कई उपभोक्ताओं को फायदा मिल सकेगा। छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक अपार्टमेंट में लगाए गए 60 किलोवाट के शेयर्ड सोलर सिस्टम से 20 परिवारों को सालाना करीब साढ़े छह लाख रुपये की बचत होने की जानकारी सामने आ चुकी है, जो दिखाता है कि यह मॉडल व्यावहारिक रूप से काम कर सकता है।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) पर नए सिरे से मंथन
बैठक में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैटरी सिस्टम दिन में बनने वाली अतिरिक्त सोलर बिजली को स्टोर कर सूर्यास्त के बाद इस्तेमाल करने की सुविधा देते हैं, लेकिन इनकी कीमत अभी भी काफी ज्यादा है। एक अधिकारी के मुताबिक मौजूदा योजना में बैटरी को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि इससे लागत बढ़ती और आम उपभोक्ताओं के लिए योजना तक पहुंचना मुश्किल हो जाता। लेकिन रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में तेजी से हो रही बढ़ोतरी और सोलर तथा नॉन-सोलर घंटों के दौरान बिजली प्रबंधन की जरूरत को देखते हुए अब BESS को फिर से परखने की जरूरत महसूस की जा रही है। मंत्रालय यह अध्ययन करने की योजना बना रहा है कि बैटरी स्टोरेज को घर के स्तर पर, पड़ोस के ट्रांसफॉर्मर के स्तर पर या फिर यूटिलिटी स्तर पर लगाना ज्यादा बेहतर रहेगा, और इसके बाद ही सबसे उपयुक्त मॉडल पर फैसला लिया जाएगा।
डिजिटल मॉनिटरिंग और इंस्टॉलेशन क्वालिटी पर जोर
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार रूफटॉप सोलर सिस्टम की डिजिटल मॉनिटरिंग पर भी विचार कर रही है। साथ ही इंस्टॉलेशन की गुणवत्ता सुधारने, इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को मानकीकृत करने और फाइनेंसिंग को आसान बनाने की जरूरत पर भी बल दिया गया, ताकि रूफटॉप सोलर आम लोगों के लिए किफायती और भरोसेमंद बना रहे। अधिकारियों ने बताया कि बैठक में आए सभी सुझावों की समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना 2.0 पर एक विस्तृत नीति पत्र (पॉलिसी पेपर) तैयार किया जाएगा।
अभी योजना की स्थिति कहां तक पहुंची
केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत जुलाई 2026 तक 40 लाख से ज्यादा घरों में सोलर सिस्टम इंस्टॉल हो चुके हैं, जिनका फायदा 48 लाख से अधिक परिवारों को मिल रहा है। इस साल की पहली तिमाही में देश में करीब 2.7 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता जुड़ी, जिसमें रेजिडेंशियल यानी घरेलू सेक्टर की हिस्सेदारी 82 प्रतिशत रही और इसे मुख्य रूप से पीएम सूर्य घर योजना ने ही आगे बढ़ाया। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात इस तिमाही में सबसे ज्यादा इंस्टॉलेशन वाले राज्य रहे। मंत्रालय ने हाल के महीनों में डिस्कॉम की देरी से जुड़े नेट मीटरिंग मामलों में राहत देने और उपकरणों की गुणवत्ता से जुड़े नियमों को स्पष्ट करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं।
पीएम सूर्य घर 2.0 (PM Surya Ghar 2.0) से घर मालिकों को क्या फायदा हो सकता है
- सिस्टम खराब होने या वेंडर बंद होने पर मरम्मत और वारंटी सर्विस मिलने की गारंटी बेहतर होगी।
- जिन घरों की छत सोलर लगाने लायक नहीं है, वे भी ग्रुप और वर्चुअल नेट मीटरिंग के जरिए सोलर बिजली का फायदा उठा सकेंगे।
- बैटरी स्टोरेज पर होने वाला अध्ययन आगे चलकर बिजली कटौती वाले इलाकों में रात के समय भी सोलर बिजली इस्तेमाल करना आसान बना सकता है।
- डिजिटल मॉनिटरिंग से सिस्टम की परफॉर्मेंस पर नजर रखना और शिकायत दर्ज कराना आसान होगा।
- उपकरणों के मानकीकरण से घटिया क्वालिटी के पैनल और इनवर्टर लगने का खतरा कम होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: PM Surya Ghar 2.0 कब लागू होगी?
अभी मंत्रालय ब्रेनस्टॉर्मिंग बैठक में आए सुझावों की समीक्षा कर रहा है। इसके बाद एक विस्तृत नीति पत्र तैयार होगा, इसलिए आधिकारिक लॉन्च की तारीख अभी तय नहीं है।
सवाल: क्या मौजूदा पीएम सूर्य घर योजना के तहत बैटरी स्टोरेज की सुविधा मिलती है?
नहीं, अभी की योजना में बैटरी स्टोरेज शामिल नहीं है क्योंकि इससे लागत बढ़ जाती। सूर्य घर 2.0 में इसे शामिल करने पर अध्ययन चल रहा है।
सवाल: अपार्टमेंट में रहने वाले लोग पीएम सूर्य घर योजना का फायदा कैसे उठा सकते हैं?
सूर्य घर 2.0 में प्रस्तावित ग्रुप और वर्चुअल नेट मीटरिंग मॉडल के जरिए अपार्टमेंट के कई परिवार मिलकर एक साझा सोलर इंस्टॉलेशन से बिजली का फायदा उठा सकेंगे।
सवाल: मौजूदा योजना का लक्ष्य क्या है और अब तक कितनी प्रगति हुई है?
योजना का लक्ष्य मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाना है। अब तक 40 लाख से ज्यादा इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं, जिनसे 48 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
सवाल: सोलर सिस्टम की मरम्मत को लेकर अभी सबसे बड़ी दिक्कत क्या है?
कई मामलों में जिस वेंडर ने सिस्टम लगाया था, वह बाद में कारोबार बंद कर देता है, जिससे उपभोक्ताओं को वारंटी या मरम्मत सर्विस नहीं मिल पाती। इसी समस्या को दूर करने के लिए सूर्य घर 2.0 में सख्त मेंटेनेंस शर्तें प्रस्तावित हैं।