India Out कहने वाले मालदीव ने अब भारत से ही मांगा ईंधन

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मालदीव ने भारत से पेट्रोलियम सप्लाई की गुहार लगाई है। जानिए 'India Out' का नारा देने वाले मुइज्जू को अब भारत की याद क्यों आई।

April 3, 2026 9:06 AM
मालदीव

Maldives Seeking Oil From India: पहले ‘India Out’ अब ‘Oil In’? मुइज्जू सरकार ने टेके घुटने।

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण आए ईंधन संकट का असर भारत के पड़ोसियों पर भी पड़ा है। श्रीलंका, नेपाल समेत कई देशों ने भारत से सप्लाई की गुहार लगाई है। वहीं, इनमें मालदीव भी शामिल है — और खास बात यह है कि मालदीव सरकार कभी भारत के खिलाफ खुलकर बात कर रही थी। बहरहाल, भारत में इन अनुरोधों पर विचार किया जा रहा है। हाल ही में ईरान ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने को लेकर भारत के दोस्तों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।

किन देशों ने भारत से मांगा ईंधन — और भारत क्या करेगा?

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि मालदीव भारत से ईंधन मांग रहा है। भारत अपने पड़ोसी देशों को लगातार ईंधन भेज रहा है। उन्होंने बताया कि भारत कॉमर्शियल समझौतों के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की सप्लाई कर रहा है। खास बात है कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है।

मालदीव की मांग

रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि मालदीव सरकार ने भी भारत से शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों आधार पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई के लिए संपर्क किया है। मालदीव के इस अनुरोध पर भारत की अपनी उपलब्धता और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है। विश्व बैंक के डाटा के अनुसार मालदीव आमतौर पर अपने ज्यादातर ईंधन की सप्लाई ओमान से लेता है।

फिलहाल, मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू की सरकार है। वह चुनाव में जीतने से पहले ‘India Out’ का नारा लगा रहे थे। साथ ही उन्होंने भारतीय सैनिकों को वापस जाने के आदेश भी जारी कर दिए थे। हालांकि, अब मोइज्जू ने हाल में ही भारत को अपना भरोसेमंद साझेदार करार दे दिया है। खबर है कि पर्यटन पर बड़े स्तर पर निर्भर यह देश उड़ानों पर पड़े प्रभाव के कारण भी मुश्किलों का सामना कर रहा है।

होर्मुज संकट पर ब्रिटेन में हुई बड़ी बैठक में भारत का क्या था रुख?

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन में आयोजित 60 से अधिक देशों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की आंशिक नाकेबंदी को लेकर भारत के रुख पर बात की। मंत्रालय ने बताया कि मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव और इस तथ्य पर बल दिया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है।

विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में बताया कि मिसरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है।

ईरान की तरफ से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे होर्मुज जलमार्ग को लगभग रोक दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस जलमार्ग से वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है — और यही वजह है कि यह संकट सिर्फ पड़ोसी देशों की नहीं, भारत की अपनी ऊर्जा सुरक्षा की भी परीक्षा ले रहा है।

FAQ

क्या मालदीव सच में भारत पर निर्भर हो गया है ईंधन के लिए?

पूरी तरह निर्भर तो नहीं कहेंगे, लेकिन अभी की स्थिति में हाँ — मालदीव ने शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों आधार पर भारत से पेट्रोलियम की मांग की है। विश्व बैंक के डाटा के मुताबिक, मालदीव का ज़्यादातर ईंधन ओमान से आता था, लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से होर्मुज जलमार्ग बाधित होने के बाद वह सप्लाई चेन डगमगा गई है। ऐसे में भारत, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, एक स्वाभाविक विकल्प बनकर सामने आया। अगर आप मालदीव की स्थिति समझना चाहते हैं — तो याद रखें, पर्यटन पर 30% से ज़्यादा निर्भर इस देश के लिए उड़ानें रुकना और ईंधन संकट एक साथ आना बड़ी मुश्किल है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से भारत को कितना नुकसान होगा?

होर्मुज जलमार्ग से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी गुज़रता है। भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है, इसलिए इस जलमार्ग की आंशिक नाकेबंदी सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन की बैठक में यह भी बताया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविक खोने वाला भारत अकेला देश है। तत्काल उपाय के तौर पर भारत अपने रणनीतिक तेल भंडार और वैकल्पिक सप्लाई रूट्स की समीक्षा कर रहा है।

मोइज्जू ने India Out का नारा लगाया था, तो अब भारत से मदद क्यों माँग रहे हैं?

राजनीति और ज़रूरत अलग-अलग चीज़ें होती हैं — शायद यही मोइज्जू की सरकार अभी समझ रही है। चुनाव जीतने के लिए India Out का नारा काम आया, लेकिन असल में मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन और बाहरी ईंधन आपूर्ति पर टिकी है। जब ओमान से सप्लाई अनिश्चित हो गई, तो भारत सबसे करीबी और भरोसेमंद विकल्प था। मोइज्जू ने हाल ही में भारत को “भरोसेमंद साझेदार” भी कह दिया है — यह बदलाव बताता है कि भूगोल और अर्थव्यवस्था की ज़रूरतें, चुनावी नारों से ज़्यादा ताकतवर होती हैं।

क्या भारत मालदीव को ईंधन देगा?

अभी तक कोई final decision नहीं आई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मालदीव के अनुरोध पर भारत की अपनी उपलब्धता और ज़रूरतों को देखते हुए विचार किया जा रहा है। भारत पहले से बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को कॉमर्शियल समझौतों के तहत ईंधन दे रहा है, तो infrastructure और capacity दोनों मौजूद हैं। “विचार किया जा रहा है” का मतलब है कि भारत अभी शर्तें और अपनी ज़रूरतें assess कर रहा है, न कि मना कर रहा है।

ईरान-अमेरिका युद्ध का असर आम भारतीय पर कैसे पड़ेगा?

सबसे सीधा असर पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर दिखेगा। होर्मुज जलमार्ग की आंशिक नाकेबंदी से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में पहले से उछाल आ चुका है। अगर यह संकट लंबा खिंचा, तो घरेलू ईंधन कीमतें बढ़ सकती हैं — और उसका असर transport, logistics और खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई पर भी पड़ेगा। ईरान ने ज़रूर कहा है कि भारत के दोस्तों को होर्मुज से निकलने की कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन इस समय कोई भी पूरी गारंटी नहीं दे सकता।

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