Top Naxal Commander Madvi Hidma: कौन है, क्यों नहीं पकड़ा गया और क्या है JNU विवाद?

By
Last updated:
Follow Us
5/5 - (1 vote)

Top Naxal Commander Madvi Hidma: जंगल का वो नक्सली कमांडर जो पुलिस के लिए बना पहेली

माड़वी हिड़मा (Madvi Hidma), जिसे हिड़मन्ना के नाम से भी जाना जाता है, भारत का एक कुख्यात नक्सली है। सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस उसे Top Naxal Commander Madvi Hidma मानती हैं। वह प्रतिबंधित संगठन CPI (Maoist) की सबसे घातक यूनिट, ‘बटालियन नंबर 1’ का प्रमुख है।

दिल्ली (विशेषकर JNU – जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) में हाल ही में कथित तौर पर कुछ नारे या भित्ति चित्र (Graffiti) देखे गए थे जो नक्सली विचारधारा या हिड़मा जैसे नेताओं का समर्थन करते प्रतीत हुए, जिसके कारण यह नाम चर्चा में आया।

यहाँ हिड़मा और उस विवाद के बारे में पूरी जानकारी दी गई है:

1. कौन है Madvi Hidma?

हिड़मा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गाँव का रहने वाला एक आदिवासी है। वह 90 के दशक में नक्सली आंदोलन में शामिल हुआ और अपनी क्रूरता व गुरिल्ला युद्ध कौशल के कारण तेजी से संगठन में ऊपर उठा।

  • पद: वह माओवादियों की Central Committee (केंद्रीय समिति) का सदस्य है, जो नक्सलियों की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।

  • भूमिका: वह नक्सलियों की ‘पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी’ (PLGA) की बटालियन नंबर 1 का नेतृत्व करता है। यह बटालियन सुरक्षा बलों पर सबसे घातक हमलों के लिए जिम्मेदार मानी जाती है।

  • इनाम: सरकार ने हिड़मा पर लाखों रुपये का इनाम घोषित कर रखा है (विभिन्न राज्यों और एजेंसियों को मिलाकर यह राशि 25 लाख से 40 लाख रुपये तक बताई जाती है)।

Justice Surya Kant: 53वें CJI बने, खेत से Supreme Court तक का सफर

2. हिड़मा इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

हिड़मा को सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। Top Naxal Commander Madvi Hidma के नेतृत्व में हुए प्रमुख हमले:

  • 2010 दंतेवाड़ा हमला: ताड़मेटला में CRPF के 76 जवान शहीद हुए थे।

  • 2013 झीरम घाटी हमला: इसमें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व (विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल आदि) सहित 27 से अधिक लोग मारे गए थे।

  • 2017 बुर्कापाल हमला: इसमें CRPF के 25 जवान शहीद हुए थे।

  • 2021 बीजापुर-टेकुलगुड़ा मुठभेड़: इसमें 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

क्या हिड़मा अभी भी जिंदा है? (Current Status)

अक्सर सोशल मीडिया और खबरों में यह बात उड़ती है कि हिड़मा मारा गया। कभी सुनने को मिलता है कि वो बहुत बीमार है, तो कभी कहते हैं एनकाउंटर में ढेर हो गया। लेकिन सच यह है कि अभी तक इसकी कोई पक्की खबर (Official Confirmation) नहीं आई है।

जंगल का यह भेड़िया बहुत चालाक है और पुलिस को चकमा देने में माहिर है। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि वो अभी भी दंडकारण्य के जंगलों में छिपा बैठा है और अपनी टीम को ऑपरेट कर रहा है। उसकी सुरक्षा का घेरा इतना मजबूत है कि उस तक पहुँचना लोहे के चने चबाने जैसा है।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Talkaaj (@talkaaj)

3. दिल्ली में नारे और विवाद का क्या कारण है?

यह मामला मुख्य रूप से JNU (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) से जुड़ा है। समय-समय पर यहाँ कुछ छात्र संगठनों पर आरोप लगते रहे हैं कि वे वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) के प्रति सहानुभूति रखते हैं।

  • विवाद: हाल ही में और अतीत में भी, JNU कैंपस की दीवारों पर “लाल सलाम”, “नक्सलबाड़ी एक ही रास्ता” या कश्मीर और अन्य अलगाववादी मुद्दों से जुड़े नारे लिखे जाने की खबरें आई हैं।

  • हिड़मा का नाम: जब भी छत्तीसगढ़ में कोई बड़ा नक्सली हमला होता है या सुरक्षा बल हिड़मा को घेरने की कोशिश करते हैं, तो कुछ कट्टरपंथी वामपंथी समूह इसे “आदिवासियों का प्रतिरोध” बताते हुए हिड़मा या नक्सली आंदोलन के समर्थन में नारे लगाते हैं।

प्रतिक्रिया: चूंकि हिड़मा भारतीय सैनिकों और पुलिसकर्मियों की हत्या का जिम्मेदार है, इसलिए उसके समर्थन में नारे लगाना देश के एक बड़े वर्ग और सरकार द्वारा “देशविरोधी” (Anti-National) कृत्य माना जाता है।

सरल शब्दों में, Top Naxal Commander Madvi Hidma एक वांटेड नक्सली आतंकवादी है जो जंगल में छुपकर भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है। दिल्ली में उसके नाम को लेकर विवाद इसलिए होता है क्योंकि कुछ विचारधाराएँ उसे “क्रांतिकारी” मानती हैं, जबकि भारत का कानून और आम जनता उसे एक “हत्यारा और अपराधी” मानती है।

यह एक स्वाभाविक भावना है। जब कोई व्यक्ति उन आतंकवादियों या नक्सलियों का समर्थन करता है जिन्होंने हमारे देश के जवानों की हत्या की है, तो आम जनता में गुस्सा होना लाजमी है।

नारे लगाने पर क्या सजा हो सकती है? (Legal Action)

भारत के संविधान और कानून में “अभिव्यक्ति की आज़ादी” (Freedom of Speech) है, लेकिन इसकी भी एक सीमा है। यदि कोई देश की अखंडता को चुनौती देता है या हिंसा भड़काता है, तो उसके लिए सख्त सजा के प्रावधान हैं।

ऐसे नारे लगाने वालों के खिलाफ भारतीय कानून (विशेषकर नए BNS और UAPA) के तहत निम्नलिखित कार्रवाइयां और सजाएं हो सकती हैं:

1. UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम)

यह भारत का सबसे सख्त आतंकवाद विरोधी कानून है। चूंकि माड़वी हिड़मा CPI (Maoist) का कमांडर है और यह संगठन भारत में प्रतिबंधित (Banned) है, इसलिए इसके समर्थन में नारे लगाना UAPA के दायरे में आ सकता है।

  • धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधि): अगर कोई व्यक्ति ऐसी गतिविधि करता है या उसका समर्थन करता है जो भारत की संप्रभुता के खिलाफ है, तो उसे 7 साल तक की जेल हो सकती है।

  • सजा की गंभीरता: इस कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को आसानी से जमानत (Bail) नहीं मिलती और उसे लंबा समय जेल में बिताना पड़ सकता है।

2. देशद्रोह/राष्ट्रद्रोह (BNS धारा 152)

पुराने IPC की धारा 124A (राजद्रोह) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 ने ले ली है।

  • प्रावधान: अगर कोई व्यक्ति बोलकर, लिखकर या संकेतों (नारों) द्वारा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालता है, तो यह अपराध है।

  • सजा: इसमें आजीवन कारावास (Life Imprisonment) या 7 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

3. हिंसा भड़काने का आरोप

सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुसार, सिर्फ नारे लगाना ही काफी नहीं होता, बल्कि यह साबित होना चाहिए कि उन नारों से हिंसा भड़की या कानून-व्यवस्था बिगड़ी।

अगर यह साबित होता है कि नारों की वजह से दंगे हुए या हिंसा हुई, तो BNS की धारा 196 (धर्म, जाति, जन्म स्थान आदि के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत 3 से 5 साल की सजा हो सकती है।

4. विश्वविद्यालय स्तर पर कार्रवाई

कानूनी सजा के अलावा, जेएनयू (JNU) या संबंधित संस्थान अपने स्तर पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते हैं:

  • छात्र को निलंबित (Suspend) किया जा सकता है।

  • हमेशा के लिए निष्कासित (Rusticate) किया जा सकता है, जिससे उनका करियर खराब हो सकता है।

  • हॉस्टल की सुविधा छीनी जा सकती है।

वास्तविकता (Reality Check)

अक्सर देखा गया है कि पुलिस ऐसे मामलों में UAPA या देशद्रोह की धाराओं में केस दर्ज करती है, लेकिन कोर्ट में यह साबित करना कि “सिर्फ नारे लगाने से देश टूट गया या हिंसा हुई”, कई बार मुश्किल होता है। इसलिए, कई बार आरोपी कुछ महीने या साल जेल में रहने के बाद सबूतों के अभाव में बरी हो जाते हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया (Legal Process) ही उनके लिए सबसे बड़ी सजा बन जाती है।

सरकार की सरेंडर पॉलिसी (नक्सलियों के लिए मौका)

नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों (विशेषकर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा) ने ‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति’ (Surrender-cum-Rehabilitation Policy) बनाई है।

इस नीति का मुख्य मकसद है— “गोली का जवाब विकास से देना।” अगर कोई नक्सली हथियार डालता है, तो उसे जेल नहीं, बल्कि नया जीवन शुरू करने का मौका मिलता है (बशर्ते उसने जघन्य अपराध न किए हों)। यहाँ इस नीति की मुख्य बातें दी गई हैं:

1. आर्थिक मदद (Financial Support)

सरकार सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जीवन यापन के लिए तुरंत पैसा देती है:

  • तत्काल सहायता: सरेंडर करते ही 1.5 लाख से 5 लाख रुपये तक (राज्य के अनुसार अलग-अलग) की तत्काल मदद मिलती है।

  • मासिक भत्ता (Stipend): 3 साल तक हर महीने 4,000 से 6,000 रुपये का वजीफा मिलता है, ताकि वे अपना खर्च चला सकें।

  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): भविष्य के लिए सरकार उनके नाम पर एक बड़ी रकम (2-3 लाख रुपये) बैंक में जमा कर देती है, जो 3 साल बाद अच्छे आचरण पर मिलती है।

2. हथियारों के बदले इनाम (Rewards for Weapons)

अगर कोई नक्सली अपने हथियार के साथ सरेंडर करता है, तो उसे हथियार का पैसा अलग से मिलता है। इसे एक तरह का “रेट कार्ड” समझें:

  • AK-47 राइफल: लगभग 1.5 लाख से 4 लाख रुपये।

  • LMG (लाइट मशीन गन): 4-5 लाख रुपये।

  • साधारण बंदूक/पिस्तौल: 25-30 हजार रुपये।

3. पुनर्वास और रोजगार (Rehabilitation & Jobs)

सरकार यह सुनिश्चित करती है कि वे दोबारा जंगल की तरफ न भागें:

  • घर और जमीन: रहने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर या जमीन का टुकड़ा दिया जाता है।

  • नौकरी/ट्रेनिंग: उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें वोकेशनल ट्रेनिंग (जैसे मैकेनिक, ड्राइविंग, सिलाई) दी जाती है। कुछ राज्यों में उन्हें पुलिस या होमगार्ड में भर्ती भी किया जाता है (उदाहरण: ‘गोपनीय सैनिक’ के रूप में)।

4. कानूनी राहत और बड़े कमांडरों के लिए प्रावधान

यह सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। छोटे-मोटे अपराधों के केस वापस ले लिए जाते हैं। जघन्य अपराधों (जैसे हत्या) के लिए केस चलते रहते हैं, लेकिन सरेंडर करने की वजह से कोर्ट में नरमी (Leniency) बरती जा सकती है। उन्हें सामान्य जेलों के बजाय अक्सर ‘ओपन जेल’ या विशेष कैंपों में रखा जाता है जहाँ वे अपने परिवार के साथ रह सकते हैं।

हिड़मा जैसे Top Naxal Commander Madvi Hidma (जिन पर लाखों का इनाम है) के लिए नियम और भी लचीले हो सकते हैं। अक्सर नीति यह कहती है कि “जो इनाम सरकार ने उनके सिर पर रखा है, सरेंडर करने पर वह राशि उन्हें ही पुनर्वास के लिए दे दी जाएगी।”

FAQs (Top Naxal Commander Madvi Hidma)

1. माड़वी हिड़मा असल में कहाँ का रहने वाला है?

हिड़मा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। उसका गाँव पुवर्ती है, जो घने जंगलों के बीच बसा है और नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।

2. क्या हिड़मा पढ़ा-लिखा है?

वैसे तो उसकी कोई फॉर्मल डिग्री नहीं है, लेकिन वो गुरिल्ला वॉरफेयर में बहुत तेज है। कहते हैं कि जंगल की लड़ाई और रणनीति में उसका दिमाग बहुत तेज चलता है।

3. पुलिस हिड़मा को पकड़ क्यों नहीं पा रही?

वो हमेशा 4-5 लेयर की सिक्योरिटी में रहता है। उसके आसपास हमेशा हथियारबंद नक्सली होते हैं और उसे जंगल के हर रास्ते की खबर होती है, इसलिए वो पुलिस के आने से पहले ही निकल जाता है।

4. अगर हिड़मा सरेंडर कर दे तो क्या उसे सजा होगी?

चूंकि उस पर बहुत बड़े हमले और हत्या के आरोप हैं, केस तो चलेंगे। लेकिन सरेंडर पॉलिसी के तहत सरकार उसे फांसी की सजा से बचा सकती है और खुली जेल में रहने की सुविधा दे सकती है।

5. हिड़मा के बाद उसका उत्तराधिकारी कौन होगा?

नक्सलियों के बीच कई नए कमांडर तैयार हो रहे हैं, लेकिन हिड़मा जैसा प्रभाव अभी किसी का नहीं है। अगर वो पकड़ा गया या मारा गया, तो नक्सलियों के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा।

click here

India’s No. #10 Hindi news website – Deshtak.com

(देश और दुनिया की ताज़ा खबरें सबसे पहले पढ़ें Deshtak.com पर , आप हमें FacebookTwitterInstagram , LinkedIn और  Youtube पर फ़ॉलो करे)

DeshTak

DeshTak.com – Desh ki Baat, Sidhe Aap Tak DeshTak.com is a reliable and fast digital news platform dedicated to bringing every important news of the country and the world straight to you. Here you get breaking news, real-time updates, and in-depth analytical reporting - that too in both Hindi and English. From politics to technology, entertainment to sports and global events, DeshTak provides verified, unbiased content on every topic. Our aim is to give you fast, accurate and reliable information - so that you stay connected with every news, from anywhere.

For Feedback - deshtak3@gmail.com
Join Our WhatsApp Channel

Leave a Comment