IT Rules बदलाव: सेफ हार्बर खत्म, सोशल मीडिया जिम्मेदार
केंद्र सरकार ने IT Rules 2021 में बदलाव का नया मसौदा जारी कर दिया है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सरकारी निर्देशों की अनदेखी नहीं कर सकेंगे। उन्हें निर्देश, गाइडलाइन, एडवाइजरी — यानी हर मध्यस्थ दिशानिर्देश — माने ही होंगे। यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित डिजिटल मीडिया कंपनियां सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराई जाएंगी।
इससे इन कंपनियों को सेफ हार्बर के तहत मिलने वाली कानूनी ढाल खत्म कर दी जाएगी। IT नियम 2021 में सबसे अहम बदलाव यह है कि प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए हर कंटेंट — यानी यूजर जनरेटेड कंटेंट — के लिए खुद जिम्मेदार होंगे। फिलहाल 14 अप्रैल तक सरकार ने इस मसौदा नियम 2025 पर सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
नए IT नियमों में डेटा डिलीट नहीं होगा — वित्त, टैक्स और जांच के मामले सुरक्षित रखने होंगे
नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी अन्य कानून के तहत डेटा सुरक्षित रखना जरूरी है तो प्लेटफॉर्म उसे डिलीट नहीं कर सकेंगे। वित्त, टैक्स या जांच से जुड़े मामलों को सुरक्षित रखना होगा।
अभी डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड सिर्फ न्यूज पब्लिशर्स पर लागू होता था, लेकिन सोशल मीडिया पर न्यूज या करंट अफेयर्स पोस्ट करने वाले यूजर भी इसके दायरे में होंगे।
सरकार किसी भी कंटेंट से जुड़े मामले को सीधे समीक्षा कमेटी के पास भेज सकती है। इसके लिए कंटेंट हटाने का आदेश देने से पहले किसी की शिकायत का इंतजार करना जरूरी नहीं होगा।
सेफ हार्बर क्या होता है और सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुरक्षा कब मिलती है?
कानूनी ढाल: यह सोशल मीडिया कंपनियों को मिला एक सुरक्षा कवच है, जो कहता है कि अगर किसी यूजर ने प्लेटफॉर्म पर कोई गलत पोस्ट या वीडियो डाला है, तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।
शर्तिया सुरक्षा: यह सुरक्षा तभी तक मिलती है जब तक कंपनियां सरकार के नियमों को मानती हैं। अगर वे शिकायत मिलने पर 3 घंटे के भीतर SGI नहीं हटातीं, तो यह सुरक्षा कवच खत्म हो जाता है और पुलिस कंपनी पर भी केस दर्ज कर सकती है।
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन का आरोप: नए IT नियम ऑनलाइन अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला हैं
IT नियमों में बदलाव का विरोध शुरू हो गया है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि सरकार ऑनलाइन कंटेंट मॉडरेशन की आड़ में सेंसरशिप लगाना चाहती है। इसका मकसद सरकार पर तंज कसने, मखौल उड़ाने, नकल करने वाले कंटेंट पर अंकुश लगाना है। सरकार सेफ हार्बर पर चोट करके सोशल मीडिया पर सरकारी नियंत्रण कसना चाह रही है — और IFF का कहना है कि इसका असल निशाना आम यूजर्स हैं, बड़ी कंपनियां नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
IT नियम 2021 में क्या बदलेगा और इसका असर किस पर पड़ेगा?
सरकार का नया मसौदा मुख्य रूप से तीन चीजें बदलता है — सेफ हार्बर की शर्तें, डेटा सुरक्षा के नियम, और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड का दायरा। अब तक जो सुरक्षा सिर्फ बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलती थी, उस पर सीधी चोट पड़ेगी। आम यूजर जो न्यूज या करंट अफेयर्स पोस्ट करते हैं, वो भी अब एथिक्स कोड के दायरे में आ जाएंगे। 14 अप्रैल तक आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं — यानी अभी यह नियम लागू नहीं हुआ है, बस मसौदा है। फिर भी ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए यह बदलाव बड़े हैं।
सोशल मीडिया कंपनियों का सेफ हार्बर कैसे खत्म होगा?
IT एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अभी यह सुरक्षा मिली हुई है कि यूजर के पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं होगी। नए नियमों के मुताबिक, अगर कंपनी सरकारी निर्देश, गाइडलाइन या एडवाइजरी को नजरअंदाज करती है, तो यह ढाल तुरंत हट जाएगी। उदाहरण के लिए, SGI कंटेंट को 3 घंटे में नहीं हटाया तो पुलिस कंपनी पर भी केस दर्ज कर सकती है। जो कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करतीं, उन्हें अब भारी कानूनी जोखिम उठाना होगा।
क्या नए IT नियमों से आम यूजर पर भी असर पड़ेगा?
सीधा जवाब — हां, खासकर उन यूजर्स पर जो सोशल मीडिया पर न्यूज या करंट अफेयर्स शेयर करते हैं। अब तक डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड सिर्फ पेशेवर न्यूज पब्लिशर्स पर लागू था। नए मसौदे में इसका दायरा बढ़ाकर आम यूजर्स तक ले जाया गया है। इसका मतलब यह नहीं कि हर पोस्ट पर कार्रवाई होगी, लेकिन कानूनी ढांचा अब ज्यादा सख्त जरूर हो जाएगा। अभी मसौदा है — जब तक अंतिम नियम नहीं आते, घबराने की जरूरत नहीं।
सरकार बिना किसी की शिकायत के कंटेंट हटवा सकती है क्या?
नए मसौदे के मुताबिक हां — सरकार किसी भी कंटेंट से जुड़े मामले को सीधे समीक्षा कमेटी के पास भेज सकती है। इसके लिए किसी की शिकायत का इंतजार नहीं करना होगा। यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि पहले सिस्टम शिकायत-आधारित था। इस प्रावधान पर सबसे ज्यादा बहस होने की संभावना है — यह कहां तक जाएगा, इस पर कोई भी अभी पूरे भरोसे से नहीं बोल सकता। तुरंत उठाने वाला कदम यह है कि 14 अप्रैल से पहले सरकारी पोर्टल पर अपनी आपत्ति या सुझाव दर्ज करें।
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन जैसे संगठन इन नियमों का विरोध क्यों कर रहे हैं?
IFF का कहना है कि ये नियम सरकार की आलोचना करने वाले कंटेंट — तंज, मखौल, पैरोडी — पर सीधी लगाम लगाने का जरिया बन सकते हैं। उनके मुताबिक सेफ हार्बर पर चोट करके असल निशाना बड़ी कंपनियां नहीं, बल्कि आम यूजर्स हैं जो सरकार की नीतियों की नकल उड़ाते हैं या उन पर टिप्पणी करते हैं। ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े ये सवाल कोर्ट में भी जा सकते हैं। इस मसले पर दोनों तरफ मजबूत तर्क हैं।
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