SIP का ट्रिपल 5 फॉर्मूला: 55 की उम्र में ₹5 करोड़ और ₹2.5 लाख ‘पेंशन’
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि रिटायरमेंट मतलब 60 की उम्र, थोड़ी-बहुत सेविंग्स और बस… ज़िंदगी कट गई? और क्या 5 करोड़ रुपये का सपना आपको बस सपना ही लगता है?
अगर हाँ, तो आज मैं आपसे कुछ ऐसा शेयर करने जा रहा हूँ, जिसने मेरी तो आँखें खोल दीं। यह एक ऐसा फॉर्मूला है जिसके बारे में, सच कहूँ तो, अपने आधे इंडिया को पता ही नहीं है। मैं बात कर रहा हूँ SIP के ट्रिपल 5 फॉर्मूला की।
यकीन मानिए, अगर आपने इसे दिल से समझ लिया और अपना लिया, तो आप भी 55 की उम्र में शान से रिटायर हो सकते हैं। और रिटायरमेंट भी कैसा? ऐसा-वैसा नहीं! हर महीने ₹2.5 लाख से ज़्यादा की ‘पेंशन’ आपके बैंक अकाउंट में होगी।
ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस थोड़ी सी समझदारी और थोड़ा अनुशासन (discipline) चाहिए। तो चलिए, अपनी चाय का कप पकड़ लीजिए और समझते हैं ये जादुई फॉर्मूला।
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ये ‘ट्रिपल 5’ फॉर्मूला आखिर है क्या?
जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर है, इसमें तीन ‘5’ हैं। आइए, एक-एक करके इन्हें समझते हैं।
पहला 5: 5 साल पहले रिटायरमेंट का प्लान

दोस्तों, हमारा पहला ‘5’ कहता है – रिटायरमेंट के लिए 60 साल तक घिसटने की ज़रूरत नहीं है! हम 5 साल पहले, यानी 55 की उम्र में भी ‘फाइनेंशियल फ्रीडम’ (Financial Freedom) पा सकते हैं।
सोचिए, 55 की उम्र में आपके पास करोड़ों का फंड हो और आप अपनी मर्ज़ी के मालिक हों। ये फॉर्मूला मानता है कि असली आज़ादी उम्र पर नहीं, आपकी प्लानिंग पर टिकी है।
इसके लिए सबसे ज़रूरी है – जल्दी शुरुआत। अगर आप, मान लीजिए, 25 की उम्र से ही SIP शुरू कर देते हैं, तो 55 तक पहुँचते-पहुँचते (यानी 30 सालों में) आप आराम से 5 करोड़ का फंड बना सकते हैं। कैसे? क्योंकि तब आपका सबसे बड़ा साथी, ‘कंपाउंडिंग’ (Compounding), आपके लिए दिन-रात काम कर रहा होता है।
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दूसरा 5: हर साल SIP में 5% की बढ़ोतरी
अब आता है दूसरा ‘5’, जो मेरी नज़र में इस पूरे प्लान की जान है। ये कहता है – हर साल अपनी SIP को सिर्फ 5% बढ़ाएँ। इसे ‘स्टेप-अप’ (Step-up) SIP कहते हैं।
अरे घबराइए नहीं! ये बहुत आसान है। मान लीजिए आपने आज 10,000 रुपये महीने की SIP शुरू की।
- अगले साल आपकी तनख्वाह थोड़ी बढ़ी, तो आपने इसे 5% बढ़ा दिया, यानी 10,500 रुपये कर दिया।
- तीसरे साल, यह 11,000 रुपये (लगभग) हो गया… और बस, ऐसे ही बढ़ाते रहना है।
अक्सर हमारी सैलरी भी तो हर साल थोड़ी-बहुत बढ़ती ही है, है न? बस उसी का एक छोटा सा हिस्सा आपको अपने निवेश में जोड़ना है। आपको पता भी नहीं चलेगा, लेकिन ये छोटा सा 5% का हाइक आपके फंड पर इतना ज़बरदस्त असर डालेगा कि आप सोच भी नहीं सकते।
याद रखिए, SIP सिर्फ एक निवेश नहीं है, ये एक आदत है। और ये आदत ही समय के साथ आपकी दौलत बनाती है।
सुरक्षित, सबसे व्यवस्थित और सबसे विशेषज्ञ-प्रबंधित तरीका प्रदान करते हैं।

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तीसरा 5: 5 करोड़ का बड़ा टारगेट
और ये है हमारा तीसरा ‘5’ – ₹5 करोड़ का टारगेट।
मुझे पता है, मुझे पता है… 5 करोड़! सुनने में ही ये रकम कितनी बड़ी लगती है, है न? कई लोग तो यहीं सोचकर पीछे हट जाते हैं कि ‘अरे, हमसे न हो पाएगा’।
लेकिन रुकिए! यहीं तो कंपाउंडिंग का जादू काम आता है।
आइए, हिसाब लगाते हैं:
- आपने 25 की उम्र में शुरू किया।
- आप 55 तक (30 साल) निवेशित रहे।
- आप हर साल अपनी SIP 5% बढ़ाते रहे।
- और मान लेते हैं कि आपको अपनी SIP पर औसतन 11% का सालाना रिटर्न मिला (जो अच्छे म्यूच्यूअल फंड्स में लंबी अवधि में मुमकिन है)।
अगर आप ये सब करते हैं, तो 30 साल बाद आपका फंड पता है कितना होगा? लगभग ₹5.20 करोड़!
है न कमाल?
जो लोग सोचते हैं कि 10-15 हज़ार की SIP से क्या होगा, वो ये देखकर सच में हैरान रह जाएँगे कि एक छोटा सा, अनुशासित निवेश भी वक्त के साथ करोड़ों में कैसे बदल जाता है।

कंपाउंडिंग की ताकत: आपकी ‘पैसे छापने की मशीन’
मैं बार-बार ‘कंपाउंडिंग’ कह रहा हूँ। इसे थोड़ा आसान भाषा में समझाता हूँ।
कंपाउंडिंग को आप ऐसे समझिए, जैसे बर्फ का एक छोटा सा गोला जो किसी पहाड़ी से लुढ़कना शुरू होता है। जैसे-जैसे वो नीचे आता है, वो अपने ऊपर और बर्फ लपेटता जाता है और बड़ा… और बड़ा… और बहुत बड़ा होता जाता है।
आपका पैसा भी बिलकुल ऐसा ही करता है। जब आप निवेश करते हैं, आपको उस पर रिटर्न (ब्याज़) मिलता है। अगले साल, आपको अपने असली पैसे (मूलधन) + पहले साल के रिटर्न, दोनों पर रिटर्न मिलता है।
बस! यही है वो सीक्रेट। रिटर्न पर रिटर्न… रिटर्न पर रिटर्न… जितना ज़्यादा समय आप अपने पैसे को देंगे, वो उतनी ही तेज़ी से बढ़ेगा। आपका निवेश अपने आप आपके लिए काम करने लगता है।
इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ, जल्दी शुरू करने का मतलब है – ज़्यादा लंबा वक्त और ज़बरदस्त कंपाउंडिंग।

रिटायरमेंट के बाद की पेंशन: ₹5.20 करोड़ पर हर महीने ₹2.5 लाख से ज़्यादा!
अब आते हैं उस हिस्से पर, जो हम सबको सबसे ज़्यादा पसंद है – रिटायरमेंट के बाद की टेंशन-फ्री इनकम!
सोचिए, आप 55 के हो गए हैं। आपके पास ₹5.20 करोड़ का एक मोटा कॉर्पस (फंड) है।
अब आपको नौकरी करने की ज़रूरत नहीं है। आप बस इस पैसे को किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि मान लीजिए FD या किसी अच्छे डेब्ट फंड (Debt Fund) में लगा देते हैं, जहाँ से आपको बहुत रिस्क लिए बिना, औसतन 6% का सालाना रिटर्न मिल जाता है।
हिसाब लगाएँ?
- ₹5.20 करोड़ का 6% सालाना = ₹31.20 लाख
- यानी हर महीने… ₹2.60 लाख!
जी हाँ! हर महीने ₹2.60 लाख की ‘पेंशन’, वो भी बिना किसी बॉस की डांट सुने और बिना काम किए।
और सबसे अच्छी बात जानते हैं क्या है? ये आपकी अपनी मेहनत की, आपकी अपनी सेविंग्स से मिलने वाली “स्वतंत्र आय” होगी। अब आप इस पैसे से दुनिया घूमिए, अपने शौक पूरे कीजिए, परिवार के साथ वक्त बिताइए… जो मर्ज़ी वो कीजिए!

SIP ही क्यों है सबसे आसान रिटायरमेंट फॉर्मूला?
देखिए, हममें से ज़्यादातर लोग रिटायरमेंट की प्लानिंग को “कल पर” टालते रहते हैं। “अरे, अभी तो बहुत टाइम है,” “पहले बच्चों की पढ़ाई हो जाए,” “पहले घर बन जाए”… ये ‘कल’ कभी नहीं आता।
लेकिन सच्चाई ये है कि आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, उतना ही कम बोझ आप पर पड़ेगा और उतना ही आसान होगा ये बड़ा कॉर्पस बनाना।
SIP इसीलिए हम जैसे आम लोगों के लिए खास है:
- बड़ी रकम एकसाथ नहीं चाहिए: आप 5,000 या 10,000, जितनी आपकी जेब इजाज़त दे, उतने से शुरू कर सकते हैं।
- बाज़ार के उतार-चढ़ाव का डर नहीं: जब आप हर महीने निवेश करते हैं, तो आपको ‘रूपी कॉस्ट एवरेजिंग’ का फायदा मिलता है। बाज़ार नीचे हो या ऊपर, आपकी खरीदारी चलती रहती है, जिससे रिस्क कम हो जाता है।
- अनुशासन सिखाती है: SIP आपकी ज़िंदगी में एक फाइनेंशियल डिसिप्लिन लाती है।
इसका मतलब साफ़ है – SIP सिर्फ आपका पैसा नहीं बढ़ाती, वो आपकी आदतें भी बदलती है।

“अगर देर हो गई तो क्या?”
ये एक सवाल है जो बहुत से लोगों के मन में आ रहा होगा। “भाई, मैं 25 का नहीं, 35 या 40 का हो गया हूँ… तो क्या ये फॉर्मूला मेरे लिए काम नहीं करेगा?”
जवाब है – हाँ, बिल्कुल करेगा! ‘देर आए दुरुस्त आए’।
बस थोड़ा सा फ़र्क आएगा।
- हो सकता है 30 साल की जगह आपके पास 20 या 25 साल ही बचे हों।
- ऐसे में, 5 करोड़ का टारगेट पाने के लिए शायद आपको अपनी शुरुआती SIP राशि थोड़ी ज़्यादा रखनी होगी।
- या, हो सकता है आपका फाइनल कॉर्पस 5 करोड़ की जगह 3 या 4 करोड़ बने।
लेकिन एक बात पक्की है – कंपाउंडिंग तब भी आपके लिए काम करेगी! बस आपको अपने टारगेट और अपनी निवेश की रकम को अपनी उम्र के हिसाब से थोड़ा बदलना (adjust) होगा। पर शुरू न करने से तो हज़ार गुना बेहतर है कि आप आज ही शुरू करें।
Conclusion: पैसा लगाइए, और वक्त को अपना साथी बनाइए
दोस्तों, 5 करोड़ का सपना सुनने में बहुत बड़ा लगता है, लेकिन SIP का ट्रिपल 5 फॉर्मूला इसे हकीकत में बदलने का एक प्रैक्टिकल रास्ता दिखाता है।
बस तीन बातें गाँठ बाँध लीजिए:
- जल्दी शुरुआत करें (अगर नहीं की है, तो आज ही करें!)
- हर साल निवेश थोड़ा-थोड़ा बढ़ाएँ (वो 5% वाला नियम)
- लंबा वक्त दीजिए (धैर्य रखें, कंपाउंडिंग को अपना काम करने दें)
क्योंकि पैसा तब नहीं बढ़ता जब आप उसके बारे में टेंशन लेते हैं, पैसा तब बढ़ता है जब आप उसे सही जगह लगाकर ‘समय’ देते हैं।
और यही है रिटायरमेंट की सबसे स्मार्ट प्लानिंग – कम मेहनत, ज़्यादा कंपाउंडिंग!

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