PM Rahat Scheme in Hindi 2026: सड़क हादसे में 1.5 लाख तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज, जानें पूरा प्रोसेस
कमाल की है ये सरकारी स्कीम! मुफ्त मिलेगा 1.5 लाख तक का इलाज।
सरकार ने हाल ही में PM Rahat Scheme in Hindi 2026 (पीएम राहत) योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य सड़क हादसों में घायल लोगों को तुरंत और कैशलेस इलाज देना है।
इस योजना के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा, ताकि पैसे की कमी के कारण किसी की जान न जाए। योजना का मुख्य फोकस “Golden Hour” यानी हादसे के पहले एक घंटे में इलाज उपलब्ध कराना है। इस योजना के सभी फायदे क्या है और अन्य डिटेल्स क्या है, ये बताते हैं।
PM Rahat Scheme 2026 असल में क्या है?
सच तो ये है कि हमारे देश में हर साल लाखों लोग सही समय पर इलाज न मिलने की वजह से अपनी जान गवां देते हैं। इसी को रोकने के लिए सरकार ने एक ठोस कदम उठाया है।
सरकार ने हाल ही में पीएम राहत योजना (PM Rahat Scheme) शुरू की है, जिसका पूरा नाम है पीएम राहत (Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment) स्कीम है। ये योजना सड़क हादसे में घायल लोगों को तुरंत इलाज देने के लिए शुरू की गई है।
पैसे की कमी से कोई जान न जाए, इसी मकसद से ये बनाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए पीएमओ बिल्डिंग ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने के बाद अपना पहला फैसला इसी योजना को मंजूरी देने का लिया।

“गोल्डन आवर” की अहमियत और कैशलेस ट्रीटमेंट
अक्सर एक्सीडेंट के बाद लोग इस डर से अस्पताल नहीं जाते कि मोटा बिल कौन भरेगा। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
ये स्कीम पिछले हफ्ते लॉन्च हुई है और इसका मकसद गोल्डन आवर में यानी हादसे के पहले घंटे में इलाज पहुंचाना है, क्योंकि रिपोर्ट्स कहती हैं कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों में से आधी को अगर पहले घंटे में अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो रोका जा सकता है।
इस योजना के तहत हर सड़क हादसे का शिकार व्यक्ति, चाहे वो नेशनल हाईवे पर हो, स्टेट रोड पर या शहर की गली में, वो कैशलेस इलाज पा सकता है। इसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के तय अस्पतालों (Designated Hospitals) को शामिल किया गया है।
क्या-क्या फायदा मिलेगा? (Eligibility & Benefits)
ध्यान रखें: इस योजना के अनुसार, अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का इलाज बिना पैसे दिए मिलेगा।
ये कवर हादसे की तारीख से सात दिनों तक चलेगा। अगर हादसा लाइफ-थ्रेटनिंग नहीं है तो स्टेबलाइजेशन ट्रीटमेंट 24 घंटे तक मिलेगा। अगर जान को खतरा है तो 48 घंटे तक।
यहाँ लोग गलती करते हैं: कई बार लोग सोचते हैं कि बिना पुलिस केस के इलाज हो जाएगा। लेकिन नियम साफ हैं। इलाज के लिए पुलिस की पुष्टि जरूरी है, जो एक इंटीग्रेटेड डिजिटल सिस्टम से होती है। ये पुष्टि नॉन-लाइफ-थ्रेटनिंग केस में 24 घंटे में और लाइफ-थ्रेटनिंग में 48 घंटे में होनी चाहिए। इससे फर्जी दावों (Fake claims) को रोका जा सकेगा।
इमरजेंसी में क्या करें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
अगर हादसा हो जाए तो पीड़ित, राह-वीर मदद करते हैं या कोई भी मौके पर मौजूद व्यक्ति 112 नंबर पर कॉल करें।
ये इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम है, जहां से सबसे नजदीकी डिजाइनेटेड अस्पताल की जानकारी मिलेगी और एम्बुलेंस भी मंगवाई जा सकती है। अस्पताल पहुंचने पर तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा। आपको बस इतना करना है कि समय न गवाएं।
अस्पताल को पैसा कैसे और कहाँ से मिलेगा?
मरीजों के मन में सवाल आता है कि अगर हम पैसा नहीं देंगे, तो प्राइवेट अस्पताल इलाज क्यों करेंगे? इसका बैकएंड सिस्टम बहुत मजबूत बनाया गया है।
ये स्कीम मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी मिलकर चला रही है। अस्पताल को इलाज का पैसा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से मिलेगा।
अगर वाहन का इंश्योरेंस है तो जनरल इंश्योरेंस कंपनियों से आता है।
अगर नहीं है या हिट एंड रन केस है तो सरकार के बजट से।
क्लेम अप्रूव होने के बाद स्टेट हेल्थ एजेंसी अस्पताल को 10 दिनों के अंदर पैसा दे देगी। यानी अस्पताल वालों को भी अपने पेमेंट के लिए महीनों इंतज़ार नहीं करना होगा।
क्या है पूरा प्रोसेस ? (Digital & Transparent)
ये सारा प्रोसेस डिजिटल है। हादसे की रिपोर्ट eDAR प्लेटफॉर्म (e-Detailed Accident Report) से जुड़ी है और अस्पताल का क्लेम ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 (TMS 2.0) से। इससे सब कुछ तेज और ट्रांसपरेंट होता है।
अगर कोई अस्पताल आपको भर्ती करने से मना करता है या पैसा मांगता है, तो आपको चुप नहीं बैठना है। अगर कोई शिकायत हो तो डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमिटी के चेयरमैन यानी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर या मजिस्ट्रेट के पास ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर से संपर्क कर सकते हैं।
हर सड़क यात्री के लिए जीवनदान
ये योजना भारतीयों के लिए बहुत बड़ी राहत है क्योंकि हमारे यहां हर साल हजारों सड़क हादसे होते हैं और कई बार पैसे न होने से इलाज में देरी हो जाती है। अब अस्पताल बिना पैसे की चिंता किए इलाज देगा और सरकार पैसा देगी।
इससे गोल्डन आवर में इलाज मिलेगा और जानें बचेंगी। अगर आप या कोई जानने वाला हादसे में फंस जाए तो सबसे पहले 112 डायल करें, अस्पताल पहुंचें और इलाज लें। ये स्कीम सभी रोड यूजर्स के लिए है, चाहे कोई भी व्यक्ति हो।
FAQs (PM Rahat Scheme 2026)
1. PM Rahat Scheme का लाभ किसे और कहाँ मिलेगा? यह योजना देश के हर नागरिक और विदेशी यात्री के लिए है जो भारत की सड़कों (नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या गली) पर दुर्घटना का शिकार होता है। इसका लाभ सरकार द्वारा तय किए गए सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों में मिलेगा।
2. क्या हिट एंड रन (Hit and Run) केस में भी मुफ्त इलाज मिलेगा? हाँ, बिल्कुल। अगर टक्कर मारने वाले वाहन का पता नहीं चलता है या उस वाहन का इंश्योरेंस नहीं है, तो भी मरीज को 1.5 लाख तक का इलाज मिलेगा। इसका पैसा सीधे सरकार के बजट से अस्पताल को दिया जाएगा।
3. 1.5 लाख रुपये की लिमिट खत्म होने के बाद या 7 दिन बाद क्या होगा? अगर इलाज का खर्च 1.5 लाख रुपये से ज्यादा होता है या मरीज को 7 दिन से ज्यादा भर्ती रहने की जरूरत पड़ती है, तो आगे का खर्च मरीज के निजी स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance), आयुष्मान भारत योजना, या खुद मरीज को वहन करना होगा।
4. “राह-वीर” (Good Samaritan) को क्या करना होगा, क्या पुलिस परेशान करेगी? अगर आप राह चलते किसी घायल की मदद करते हैं (राह-वीर बनते हैं), तो आपको सिर्फ 112 पर कॉल करके मरीज को अस्पताल पहुँचाना है। नए नियमों के तहत पुलिस आपसे कोई पूछताछ कर के परेशान नहीं कर सकती। आपका काम सिर्फ जान बचाना है।
5. अस्पताल अगर कैशलेस इलाज करने से मना करे तो शिकायत कहाँ करें? अगर कोई अस्पताल मुफ्त इलाज देने से इनकार करता है, तो आप तुरंत जिले के डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमिटी के चेयरमैन (जो आमतौर पर जिलाधिकारी या डीएम होते हैं) के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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