Gaon Gwala Yojana Rajasthan Hindi: गाय चराओ, हर महीने ₹10,000 कमाओ
योजना का नाम सुनकर पहले हँसी आएगी, लेकिन ये सच में बढ़िया मौका है
मान लीजिए कोई आपसे कहे — “बस सुबह गाय लेकर जाओ, शाम को वापस लाओ, और हर महीने ₹10,000 पक्के।”
पहली बात तो यही लगेगी कि यार, कोई मजाक कर रहा है।
लेकिन यह मजाक नहीं है। यह राजस्थान सरकार की एक असली योजना है जिसका नाम है गांव ग्वाला योजना। और इसमें न कोई डिग्री चाहिए, न कोई इंटरव्यू का डर, न कोई office जाने की झंझट।
Gaon Gwala Yojana Rajasthan के तहत गाँव में रहने वाले लोगों को गायें चराने के बदले में हर महीने दस हजार रुपये दिए जाएंगे। राजस्थान के शिक्षा और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने इस योजना को शुरू किया है, जो गोवंश संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार का भी काम करती है।
इस article में हम आपको पूरी जानकारी देंगे — काम क्या है, पैसे कहाँ से आएंगे, कौन apply कर सकता है और यह योजना आगे कहाँ तक जाएगी।
गांव ग्वाला योजना क्या है?
यह योजना राजस्थान की भजनलाल सरकार ने शुरू की है। इसका मकसद है — गाँव की गायों की देखभाल और उन लोगों को काम देना जो अभी बेरोजगार हैं या घर पर खाली हैं।
पुराने ज़माने में गाँवों में एक परंपरा थी। सुबह होती थी, ग्वाला आता था, सबकी गायें इकट्ठी करता था, उन्हें चरने ले जाता था, और शाम को वापस छोड़ जाता था। गाँव के लोग मिलकर उसे अनाज या पैसे देते थे।
यह परंपरा अब लगभग खत्म हो चुकी है।
नतीजा यह हुआ कि गायें सड़कों पर घूमने लगीं। राजस्थान में आवारा पशुओं की वजह से हर साल सैकड़ों सड़क हादसे होते हैं। गायें खेतों में घुस जाती हैं, फसलें बर्बाद होती हैं। और गाय के मालिक खुद भी परेशान रहते हैं क्योंकि उनके पास इतना वक्त नहीं कि वे खुद गाय चराने जाएं।
गांव ग्वाला योजना इसी समस्या का जवाब है।
Pro Tip: अगर आप राजस्थान के किसी गाँव में रहते हैं और खेती के अलावा कुछ और कमाई चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए सबसे आसान विकल्पों में से एक है।
योजना की शुरुआत कहाँ से हुई?
Gaon Gwala Yojana की शुरुआत कोटा जिले के रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के खेड़ली गाँव (चेचट) से हुई।
शुरुआत बड़े ही अनोखे तरीके से की गई। मंत्री मदन दिलावर ने नए नियुक्त 14 गाँव ग्वालों को मंच पर बुलाया। उन्हें माला पहनाई, साफा बाँधा — यानी जैसे किसी खास मेहमान का स्वागत करते हैं, वैसे ही उनका शाही स्वागत हुआ।
श्रीराम स्नेही संप्रदाय (शाहपुरा पीठ) के जगतगुरु स्वामी रामदयाल महाराज भी उस दिन वहाँ मौजूद थे और उन्होंने इन सभी ग्वालों को आशीर्वाद दिया।
यह बात छोटी लग सकती है, लेकिन इसका मतलब बड़ा है। सरकार ने यह संदेश दिया कि गाय चराने का काम छोटा नहीं है — यह एक जिम्मेदारी है, एक सेवा है।
फिलहाल 14 गाँवों में एक-एक ग्वाला रखा गया है। यह pilot phase है जिससे देखा जाएगा कि यह व्यवस्था कैसे काम करती है।
कोटा आज आध्यात्मिक तेज से आलोकित हुआ, जब श्रीराम स्नेही संप्रदाय, शाहपुरा पीठ के पूज्य जगतगुरु स्वामी रामदयाल जी महाराज पधारे। दादाबाड़ी स्थित आवास पर उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।
इस अवसर पर चेचट तहसील के खेड़ली ग्राम में प्रारंभ हो रही “गोवर्धन गाँव… pic.twitter.com/e2wewFX32u
— Madan Dilawar (@madandilawar) February 22, 2026
गाँव ग्वाला का काम क्या होगा?
काम बिल्कुल सीधा है। जटिल कुछ नहीं।
सुबह: गाँव की गायें इकट्ठी करना — हर घर से।
दिन में: उन्हें गोचर भूमि यानी चरने की सरकारी जमीन पर ले जाना और पूरे दिन उनका ध्यान रखना।
शाम को: हर गाय को उसके मालिक के घर वापस छोड़ना।
बस यही काम है।
सरकार का कहना है कि लगभग 70 गायों पर एक ग्वाला रखा जाएगा। अगर किसी गाँव में गायों की संख्या ज्यादा है — मान लीजिए 200 से ऊपर — तो वहाँ दो या तीन ग्वाले रखे जा सकते हैं।
गोचर भूमि क्या होती है?
गोचर भूमि वह सरकारी जमीन होती है जो पशुओं को चराने के लिए reserve रखी जाती है। राजस्थान में गाँव-गाँव में पहले ऐसी जमीनें होती थीं। पिछले कुछ दशकों में इन जमीनों पर अतिक्रमण बढ़ा है, लेकिन अभी भी बहुत से गाँवों में यह उपलब्ध है।
इस योजना से उन जमीनों का भी सही उपयोग होगा।
यह काम शारीरिक रूप से थकाने वाला है — धूप में रहना पड़ता है, पूरे दिन बाहर रहना होता है। लेकिन जो लोग पहले से पशुपालन से जुड़े हैं या खेती करते हैं, उनके लिए यह बिल्कुल natural है।
सैलरी कैसे और कहाँ से मिलेगी?
यह सबसे जरूरी सवाल है — पैसा कौन देगा?
सरकार सीधे पैसा नहीं देगी। यह बात थोड़ी अटपटी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे एक पुरानी और समझदारी भरी सोच है।
इस योजना में भामाशाह यानी गाँव के दानी और समृद्ध लोग मदद करेंगे। हर महीने गाँव के लोग मिलकर ग्वाले को ₹10,000 देंगे।
भामाशाह कौन होते हैं?
राजस्थान में भामाशाह की परंपरा बहुत पुरानी है। यह वे लोग होते हैं जो अपनी कमाई का एक हिस्सा समाज की भलाई के लिए देते हैं। पहले मंदिर बनवाते थे, कुएँ खुदवाते थे — अब इस योजना में वे गाँव का ग्वाला पालेंगे।
अगर एक गाँव में 70 गायें हैं और हर गाय के मालिक से ₹150 महीना लिया जाए, तो ₹10,500 जुट जाते हैं। यानी बोझ किसी एक पर नहीं, बँटा हुआ।
जिन गाँवों में पहले से कोई सक्रिय ग्राम सभा या पंचायत है, वहाँ यह collection process काफी आसान हो जाती है।
इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी?
कुछ साल पहले तक राजस्थान के ज़्यादातर गाँवों में यह परंपरा थी। गाँव का एक आदमी ग्वाला होता था। सब उसे जानते थे, उस पर भरोसा करते थे।
फिर धीरे-धीरे शहरीकरण बढ़ा। लोग शहरों की तरफ गए। गाँव में काम करने वाले कम हुए। और ग्वाले की परंपरा खत्म होती चली गई।
नतीजा यह हुआ कि —
- गायें सड़कों पर घूमने लगीं
- रात में हाईवे पर खड़ी गाय से टक्कर के हादसे बढ़े
- किसानों की फसलें बर्बाद हुईं
- गाय के मालिक खुद परेशान हुए क्योंकि घर में बाँधने की जगह नहीं थी
राजस्थान में हर साल आवारा पशुओं की वजह से होने वाले हादसों में सैकड़ों लोग घायल होते हैं। यह एक असली समस्या है जिसे अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं।
गांव ग्वाला योजना इस पूरी chain को ठीक करने की कोशिश है — एक परंपरा को आधुनिक तरीके से वापस लाना।
कौन बन सकता है गांव ग्वाला?
यहाँ सरकार ने अभी तक कोई बहुत strict eligibility नहीं बताई है, लेकिन जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार —
- गाँव का स्थायी निवासी होना जरूरी है
- शारीरिक रूप से सक्षम होना चाहिए — पूरे दिन बाहर रह सकें
- पशुओं की समझ हो — गायों का स्वभाव पता हो
- कोई डिग्री जरूरी नहीं — 8वीं, 10वीं, या अनपढ़ भी apply कर सकते हैं
- उम्र सीमा — अभी तक officially घोषित नहीं, लेकिन कामकाजी उम्र (18 से 55 वर्ष) के लोगों को preference मिलती है
- पंचायत या स्थानीय प्रशासन की सिफारिश से चयन होता है
आवेदन कैसे करें?
फिलहाल योजना की pilot phase में चयन ग्राम पंचायत के माध्यम से किया जा रहा है। अगर आपके गाँव में यह योजना लागू होती है, तो —
- अपनी ग्राम पंचायत से संपर्क करें
- सरपंच या पंचायत सचिव को अपनी इच्छा बताएं
- स्थानीय स्तर पर चयन समिति आपका चयन करेगी
जैसे-जैसे योजना बड़े पैमाने पर लागू होगी, online portal भी आ सकता है। इसके लिए राजस्थान सरकार की official website rajasthan.gov.in पर नजर रखें।
योजना आगे कहाँ तक जाएगी?
अभी यह योजना 14 गाँवों से शुरू हुई है। लेकिन मंत्री मदन दिलावर ने संकेत दिए हैं कि अगर यह pilot सफल रहा तो इसे राजस्थान के सभी जिलों में फैलाया जाएगा।
राजस्थान में कुल 11,000 से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं। अगर हर पंचायत में एक ग्वाला भी रखा जाए, तो यह एक बड़ा रोजगार कार्यक्रम बन जाएगा।
2024-25 के बजट में राजस्थान सरकार ने ग्रामीण रोजगार और गोवंश संरक्षण दोनों पर जोर दिया है। इस योजना का alignment उसी दिशा में है।
अगर आप किसी ऐसे गाँव में हैं जहाँ यह योजना अभी नहीं आई है, तो अपनी ग्राम पंचायत में इसकी माँग करें। स्थानीय जनप्रतिनिधि के जरिए भी यह संभव है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. गांव ग्वाला योजना में कितनी salary मिलती है?
हर महीने ₹10,000 मिलते हैं। यह पैसा सरकार के खजाने से नहीं आता — गाँव के भामाशाह और गाय मालिक मिलकर यह राशि जुटाते हैं। हर गाय के मालिक की थोड़ी-थोड़ी हिस्सेदारी होती है, इसलिए किसी एक पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता। ₹10,000 प्रतिमाह एक छोटे गाँव में अच्छी आमदनी है, खासकर जब कोई दूसरी नौकरी नहीं है।
2. क्या महिलाएं भी गांव ग्वाला बन सकती हैं?
अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसमें 14 ग्वाले सभी पुरुष थे। लेकिन सरकार ने महिलाओं को बाहर नहीं किया है। पंचायत स्तर पर निर्णय होता है, इसलिए अगर कोई महिला सक्षम है और गाँव वाले सहमत हैं, तो संभावना है। आने वाले समय में guidelines और स्पष्ट होंगी।
3. गाय किसकी होंगी — सरकार की या गाँव वालों की?
गाँव वालों की निजी गायें। ग्वाला उन्हें सुबह इकट्ठा करेगा, चराएगा और शाम को वापस करेगा। यह एक community service model है जहाँ गाय मालिक और ग्वाला मिलकर काम करते हैं।
4. अगर गाय बीमार हो जाए या खो जाए तो क्या ग्वाला जिम्मेदार होगा?
यह एक जरूरी सवाल है। अभी इस पर कोई official guideline नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे योजना बड़ी होगी, ऐसे नियम जरूर बनेंगे। फिलहाल यह trust और community agreement पर चल रही है।
5. गोचर भूमि हर गाँव में होती है क्या?
हर गाँव में नहीं। कुछ जगहों पर गोचर भूमि पर अतिक्रमण हो गया है। लेकिन राजस्थान सरकार ऐसी जमीनें खाली कराने का प्रयास कर रही है। जिन गाँवों में गोचर भूमि उपलब्ध है, वहाँ यह योजना ज्यादा आसानी से लागू होगी।
6. क्या यह योजना सिर्फ हिंदू परिवारों के लिए है?
नहीं। यह एक government welfare योजना है, किसी धर्म विशेष के लिए नहीं। गोवंश संरक्षण इसका मुख्य उद्देश्य है, लेकिन ग्वाला कोई भी बन सकता है जो गाँव का निवासी हो और काम करने में सक्षम हो।
7. यह योजना राजस्थान के किन जिलों में चल रही है?
अभी यह योजना कोटा जिले के रामगंजमंडी क्षेत्र से शुरू हुई है। आने वाले महीनों में इसे पूरे राजस्थान में लागू करने की योजना है। अपडेट के लिए अपनी ग्राम पंचायत या जिला कलेक्ट्रेट से पूछते रहें।
एक पुरानी परंपरा का नया रूप
गांव ग्वाला योजना राजस्थान एक ऐसी योजना है जो एक साथ तीन काम करती है — बेरोजगारों को काम देती है, गायों की देखभाल सुनिश्चित करती है, और आवारा पशुओं की समस्या को कम करती है।
यह कोई बड़ी तकनीकी योजना नहीं है। कोई app नहीं, कोई portal नहीं, कोई exam नहीं। बस एक पुरानी परंपरा को वापस लाने की कोशिश है — थोड़े पैसों के साथ, थोड़े सरकारी support के साथ।
अगर आप राजस्थान के किसी गाँव में हैं और यह सोच रहे हैं कि क्या यह आपके लिए है — तो जवाब है: अगर आप शारीरिक रूप से ठीक हैं, गाँव में रहते हैं, और पशुओं के साथ काम करने में दिक्कत नहीं है — तो यह मौका आपके लिए ही है।
अपनी पंचायत से बात करें। सरपंच से मिलें। और अगर आपके गाँव में यह योजना नहीं आई है, तो माँग करें कि आए।
₹10,000 बहुत बड़ी रकम नहीं है, लेकिन खाली बैठे रहने से तो बेहतर है — और इसमें आप एक काम भी कर रहे हैं जो सच में गाँव के लिए जरूरी है।
EXTERNAL LINK SUGGESTIONS:
- rajasthan.gov.in — Official government site जहाँ योजना की official notifications मिलेंगी
- pib.gov.in — Press Information Bureau जहाँ केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की press releases होती हैं
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