Rajasthan News: साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत, वायरल वीडियो और विवादों का पूरा सच | Biography & Death Mystery

January 30, 2026 3:33 AM
Rajasthan News साध्वी प्रेम बाईसा

Rajasthan News: पिता ट्रक चालक, 2 साल की उम्र में मां की मौत…आखिर कौन थी साध्वी प्रेम बाईसा? जानें पूरी कहानी

[जोधपुर, राजस्थान] [क्राइम/इनवेस्टिगेशन न्यूज़]: राजस्थान के अध्यात्म और सोशल मीडिया जगत में एक गहरा सन्नाटा पसर गया है। जोधपुर की चर्चित बाल साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। अपनी ओजस्वी वाणी, भजनों और कथाओं से लाखों लोगों के दिलों में पहचान बनाने वाली साध्वी के आकस्मिक निधन के बाद अब प्रशासन पर जांच का दबाव बढ़ गया है। यह मामला सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के दौर में अध्यात्म, विवाद और मानसिक दबाव के एक जटिल ताने-बाने का है।

संदिग्ध परिस्थितियां और अस्पताल का घटनाक्रम (The Incident)

Rajasthan News: सोशल मीडिया पर पिछले कई महीनों से लगातार चर्चाओं में रहने वाली बाल साध्वी प्रेम बाईसा का जोधपुर स्थित आश्रम में संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आश्रम में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत, जब भी किसी युवा सार्वजनिक व्यक्ति की संदिग्ध हालात में मृत्यु होती है, तो यह ‘अननेचुरल डेथ’ (Unnatural Death) की श्रेणी में आता है, जिसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे अहम साक्ष्य होती है। घटना की खबर फैलते ही देर रात पाल रोड स्थित साधना कुटीर आश्रम के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक और अनुयायी जुट गए। भीड़ ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरएलपी (RLP) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली अनुयायियों ने भी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, जिससे पुलिस प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बन गया है।

संघर्ष से शिखर तक: बचपन और आध्यात्मिक दीक्षा

प्रेम बाईसा का जीवन संघर्षों की एक लंबी दास्तान रहा है, जो उनकी प्रसिद्धि के पीछे छिपी थी। वे मूल रूप से बालोतरा जिले के परेऊ गांव की रहने वाली थीं। एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रेम बाईसा के पिता विरमनाथ पेशे से एक ट्रक चालक हैं और माता अमरू बाईसा एक गृहणी थीं। नियति ने उन्हें बहुत छोटी उम्र में ही बड़ा दुख दिया; जब वे मात्र दो साल की थीं, तब उनकी मां का निधन हो गया।

मां की अनुपस्थिति और उनकी भक्ति भावना का असर उनके अबोध मन पर गहरा पड़ा। मां के संस्कारों की छाप ही थी कि वे बचपन से ही ईश्वर की ओर उन्मुख हो गईं। इसके बाद पिता उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम ले गए। यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट (Turning Point) था। यहां संत राजाराम जी महाराज और संत कृपाराम जी महाराज की शरण में उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। गुरुओं के सानिध्य में उन्होंने कथा वाचन और भजन गायन के साथ-साथ गहन आध्यात्मिक शिक्षा ली, जिसने उन्हें एक साधारण बालिका से ‘बाल साध्वी’ के रूप में प्रतिष्ठित किया।

अलग आश्रम और बढ़ती लोकप्रियता (Rise to Fame)

समय के साथ प्रेम बाईसा अपनी भागवत कथा और भावपूर्ण भजनों के कारण लोगों में, विशेषकर युवाओं और महिलाओं में बेहद लोकप्रिय होती गईं। उनकी शैली में एक सादगी थी जो लोगों को आकर्षित करती थी। बाद में वे गुरुकृपा आश्रम से अलग होकर जोधपुर के पाल रोड के पास साधना कुटीर आश्रम में रहने लगीं।

उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस आश्रम के उद्घाटन समारोह में योग गुरु बाबा रामदेव सहित देश के कई प्रमुख संत मौजूद रहे थे। उन्होंने अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा और अपने पैतृक गांव परेऊ में भी एक आश्रम बनवाया, जहां नियमित रूप से धार्मिक आयोजन होते रहे। यह विस्तार बताता है कि उनका प्रभाव क्षेत्र केवल जोधपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे मारवाड़ क्षेत्र में फैला हुआ था।

विवादों का साया: जमीन, परिवार और वायरल वीडियो

शोहरत के साथ अक्सर विवाद भी चलते हैं, और साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन भी इससे अछूता नहीं रहा। उनके जीवन में कई विवाद भी जुड़े रहे, जिन्होंने उनकी मानसिक शांति को प्रभावित किया।

  1. जमीनी विवाद: पैतृक गांव में जमीन को लेकर परिजनों के साथ विवाद का मामला इतना बढ़ गया था कि बात पुलिस थाने तक जा पहुंची।

  2. पिता के साथ वीडियो: करीब छह माह पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें पिता के साथ एक दृश्य को लेकर सोशल मीडिया ट्रोल्स ने सवाल उठाए थे। हालांकि, पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ और इस मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी भी हुई थी। साध्वी ने उस समय उस वीडियो को लेकर गहरी नाराजगी जताई थी और इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया था।

जुलाई 2025 का वो वीडियो जिसने सब बदल दिया

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ जुलाई 2025 में आया। दरअसल, जुलाई 2025 में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने उनकी सालों की तपस्या, अध्यात्म और सौम्य छवि को एक पल में कसौटी पर कस दिया।

वायरल हुए वीडियो में उन्हें एक आदमी को गले लगाते हुए दिखाया गया था। डिजिटल दुनिया की निष्ठुरता देखिए कि बिना संदर्भ जाने, इससे उनके अनुयायियों का दिल टूट गया और समाज में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। जो लोग उन्हें देवी स्वरूप मानते थे, उन्होंने एक साध्वी के तौर पर उनसे ऐसी उम्मीद नहीं की थी। लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी कड़ी आलोचना (Trolling) की, जिससे वह अंदर तक टूट गईं।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो, जब किसी आध्यात्मिक व्यक्तित्व की निजी जिंदगी सार्वजनिक जांच के दायरे में आती है, तो ‘कॉग्निटिव डिसोनेंस’ (Cognitive Dissonance) की स्थिति पैदा होती है। साध्वी के साथ भी यही हुआ। हालांकि, दबी हुई आवाज में उन्होंने अपना पक्ष रखा, लेकिन एक वीडियो ने उनके दिल पर जो जख्म दिए हैं, वे शायद कभी भरे ही नहीं, जिसकी सजा उन्हें दुनिया को अलविदा कह कर ही मिली। यह घटना सोशल मीडिया ट्रायल (Social Media Trial) के खतरों को भी उजागर करती है।

डेथ मिस्ट्री: सोशल मीडिया पोस्ट और पुलिस जांच

मौत के बाद यह मामला तब और रहस्यमयी (Mysterious) हो गया जब उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट सामने आई। इस पोस्ट में उन्होंने सनातन धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित करने की बात लिखी थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि पोस्ट में ‘न्याय मिलने की उम्मीद’ भी जताई गई थी।

यह पोस्ट अब पुलिस के लिए ‘डिइंग डिक्लेरेशन’ (Dying Declaration) या एक अहम सुराग की तरह काम कर रही है। क्या उन्हें अपनी मौत का पूर्वाभास था? या यह किसी दबाव का संकेत था? इस पोस्ट के बाद समर्थकों में संदेह और बढ़ गया है कि यह स्वाभाविक मृत्यु नहीं है।

फिलहाल, पुलिस की फॉरेंसिक टीम (FSL) और साइबर सेल पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटी है। आश्रम के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल्स और विसरा रिपोर्ट ही अब इस राज से पर्दा उठा पाएगी कि आखिर उस रात साधना कुटीर आश्रम में क्या हुआ था।

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