Dirty Politics: MLA आवास में VIP लड़कियों की सप्लाई: नेताओं के काले कारनामे

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नेताओं की डर्टी सीक्रेट: MLA आवास में हाई-प्रोफाइल लड़कियों की सप्लाई का काला सच | Operation Dirty Politics

‘नाम नहीं पूछते, बस खुश करके आ जाते हैं’: MLC आवास में जाने वाली लड़की का बड़ा खुलासा

‘मैं MLC (विधायक) फ्लैट में जाती हूँ। फ्लैट से बाहर निकलते ही सब भूल जाती हूँ। रोज ऐसे ही हाई प्रोफाइल नेताओं के पास जाना होता है। किस-किस का नाम याद रखें। हम लोग तो नाम तक नहीं पूछते हैं। खुश करना है, खुश करके आ जाते हैं। मोबाइल नंबर न देते हैं, न लेते हैं। पॉलिटिशियन और बिजनेसमैन जिसे भी चाहिए, वे बॉस को कॉल करते हैं। काम का ऑर्डर आता है, हम एड्रेस पर पहुँच जाते हैं। हम लोग सिर्फ बड़े-बड़े काम करते हैं, VIP के पास ही जाते हैं।’ यह चौंकाने वाला खुलासा उस लड़की ने किया जो हाई प्रोफाइल नेताओं को ऐश कराने के लिए जाती है। पटना में MLC आवास में एंट्री करने वाली इस लड़की तक पहुँचने से पहले, हमारी टीम उस पूरे काले नेटवर्क से गुज़री जो नेताओं के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लड़कियाँ मंगाता है। ऑपरेशन डर्टी पॉलिटिक्स पार्ट-2 में पढ़िए और देखिए नेताओं की डर्टी ख्वाहिशें पूरी करने के लिए कैसे चलता है यह पूरा धंधा।

BJP नेता का सेक्स स्कैंडल: गर्ल्स हॉस्टल से नेताओं को लड़कियों की सप्लाई

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Table of Contents

नेताओं की डिमांड और एजेंट्स का नेटवर्क: पर्दे के पीछे की डील

नेताओं को लड़कियाँ सप्लाई करने वाली एक भाजपा की महिला लीडर फूल जोशी से लड़कियों की डिमांड करने वाले पॉलिटिशियन को एक्सपोज़ करने के लिए हमने पूरे नेटवर्क को खंगाला। एजेंट्स से डील करने के बाद नेताओं का टेस्ट और उनकी डिमांड जानने के लिए, भास्कर की टीम ने खुफिया कैमरे पर उन लड़कियों से भी बात की जो हाई प्रोफाइल नेताओं के पास जाती हैं। एजेंट्स ने हमें पटना के आरपीएस मोड़ के पास स्थित होटल बेली ग्रैंड में कमरा बुक करने को कहा। एजेंट्स के बात कराते ही होटल के मैनेजर ने सेफ कमरा दे दिया। स्पाई कैमरा इंस्टॉल करने के बाद, एजेंट्स ने पहले वॉट्सऐप पर फोटो मांगी और फिर 30 मिनट इंतज़ार के बाद अंकिता को भेजा, जो सिर्फ VIP लोगों को सर्विस देती थी।

हाई-प्रोफाइल कॉलगर्ल ‘अंकिता’ से एक्सक्लूसिव बातचीत

रिपोर्टर: आपको पूरा प्लान पता होगा?

अंकिता: बॉस ने बताया है, हमारा तो काम ही वही है।

रिपोर्टर: पॉलिटिकल पार्टियों के बड़े लीडर्स को खुश करना है।

अंकिता: अपनी तो पूरी सर्विस उन्हीं लोगों की होती है।

रिपोर्टर: किन-किन बड़े नेताओं के पास आप लोग जाती हो?

अंकिता: नाम नहीं पूछते, बॉस को सब पता रहता है। मैं तो बस बहुत हाई लेवल वालों के पास जाती हूँ।

रिपोर्टर: मतलब, किस तरह के हाई लेवल?

अंकिता: बड़े-बड़े नेता, वीआईपी और बड़े बिजनेसमैन के पास। चाणक्या होटल के पीछे MLC आवास में MLC लोगों के फ्लैट में जाती हूँ।

रिपोर्टर: नेताओं की चॉइस पूरी करना आसान नहीं होगा?

अंकिता: नेताओं की चॉइस पूरी करना आसान नहीं, हम जैसे लोग जो ये करते हैं, वहीं कर सकते हैं। हाई प्रोफाइल के लिए ही कॉल आती है।

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‘नेता भी मेरी डिमांड करेंगे’: पढ़ी-लिखी रवीशा और कॉन्ट्रैक्ट की बातें

अंकिता से बातचीत के दौरान एजेंट्स लगातार फोन कॉल पर था। एजेंट्स ने दावा किया कि वो एक और हाई-प्रोफाइल कॉलगर्ल भेज रहा है, जिसकी डिमांड काफी है। उसने कहा कि वह पढ़ी-लिखी है और नेताओं को पल भर में पिघला देती है। इस दावे के साथ, रवीशा नाम की दूसरी कॉलगर्ल को होटल में भेजा गया ताकि हम उनका पॉलिटिशियन के साथ एक्सपीरियंस जान सकें। रवीशा ने बताया कि उन्हें बाहर से बुलाया गया है और वे सिर्फ नेताओं और वीआईपी लोगों के लिए काम करती हैं।

रवीशा से बातचीत: चुनाव, डिमांड और रेट का फंडा

रिपोर्टर: चुनाव में काम करना है, हाई प्रोफाइल लड़कियाँ ही चाहिए।

रवीशा: हम लोग नेताओं और वीआईपी लोगों के लिए ही काम करते हैं। बहुत बड़े वालों के पास हम जाते हैं, आप तो काम देकर देखिए, नेता भी डिमांड मेरी ही करेगा।

रिपोर्टर: आपका चार्ज क्या है?

रवीशा: वो बॉस ही बताएंगे, हम लोग बॉस से हिसाब करते हैं। जब अगला इंसान खुश हो जाता है तो पैसा की कोई बात नहीं, इनाम भी मिलता है।

रिपोर्टर: डे और नाइट का अलग-अलग होता है क्या?

रवीशा: डे और नाइट ही नहीं, पर्सन टू पर्सन रेट अलग-अलग है। सामने वाले पर डिपेंड है, उसकी चॉइस क्या है।

दिल्ली से नेपाल तक फैला डिंपल का नेटवर्क: ‘घरेलू’ और ‘नई कुंवारी’ लड़कियों की सप्लाई

पटना में अंकिता और रवीशा से मिलाने वाले एजेंट्स ने हमें यूपी से लेकर दिल्ली तक एक्टिव नेटवर्क से जोड़ने के लिए डिंपल से मिलवाया। डिंपल पश्चिमी चंपारण की रहने वाली है और वह दिल्ली की सप्लायर के ज़रिए लड़कियों को बिहार से लेकर कई राज्यों में सप्लाई करती है। वह बिहार की लड़कियों को दिल्ली में रखती है और वहीं से उनकी अलग-अलग राज्यों में डिमांड के हिसाब से सप्लाई कराती है। डिंपल का नेटवर्क दिल्ली से लेकर नेपाल सीमा तक फैला है। उसने अपना ठिकाना यूपी बॉर्डर पर इसलिए बनाया है कि वह यूपी के रास्ते दिल्ली तक की लड़कियों को बुला सके और दूसरी तरफ नेपाल से भी लड़कियों को बिहार में बुला ले।

डिंपल से बातचीत: एग्रीमेंट और ‘दवा’ का इस्तेमाल

रिपोर्टर: चुनाव के लिए ऐसी लड़की चाहिए जो नेताओं को पसंद आए।

डिंपल: सब वही हैं। आपने जो फोटो देखी है, वह बिल्कुल नई कुंवारी है। (मोबाइल पर फोटो दिखाते हुए)

रिपोर्टर: क्या इन लड़कियों को एग्रीमेंट पर भेजा जाएगा?

डिंपल: मैं एग्रीमेंट करूँगी, फिर काम के लिए आपको दूँगी। सैलरी और कॉन्टैक्ट दोनों तरह से हो जाएगा।

रिपोर्टर: घरेलू किस टाइप की?

डिंपल: अच्छे-अच्छे घरों की हैं, माँ-बाप पैसे नहीं देते हैं, तो सुंदरता का फायदा उठा रही हैं।

रिपोर्टर: नेता के पास तो बहुत ही अच्छी लड़कियों को भेजना होगा।

डिंपल: दवा ऐसी है कि पता ही नहीं चलेगा कि लड़की नई है या पहले कहीं गई है।

रिपोर्टर: कौन नेता दवा नहीं लेगा, बिहार से यूपी तक ऐश कराने के लिए भेजते हैं।

डिंपल: पंचायत चुनाव लड़ने वालों से लेकर बड़का-बड़का नेता मांगते हैं।

100 लड़कियों की डील: विदेशी सप्लाई और पुलिस मैनेजमेंट का सच

इस पूरी पड़ताल के दौरान राहुल और संतोष दो बड़े एजेंट्स हमारे लिए सबसे अहम कड़ी साबित हुए। दोनों चुनाव में सप्लाई के लिए 100 से अधिक हाई प्रोफाइल लड़कियाँ देने को तैयार हो गए। उन्होंने दिल्ली से लेकर सभी राज्यों में हमारे सामने ही डील भी कर ली। इनका बिहार, यूपी, बंगाल, एमपी, झारखंड, छत्तीसगढ़ और दिल्ली तक बड़ा नेटवर्क फैला है। इनका संबंध अपराधियों से भी है, क्योंकि ये उन्हें भी लड़कियाँ देते हैं।

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राहुल से बातचीत: विदेशी लड़कियों की सप्लाई का राज

रिपोर्टर: विदेशी भी हैं क्या? मिल जाएँगी ना?

राहुल: हाँ-हाँ, ऑन डिमांड सब हो जाएगा।

रिपोर्टर: कैसे आती हैं विदेशी?

राहुल: लोकल के अलावा टूरिस्ट वीज़ा पर विदेशी लड़कियाँ लाई जाती हैं।

रिपोर्टर: कैसे मैनेज होता है?

राहुल: पुलिस को मैनेज करना पड़ता है, सब कुछ हो जाता है। मेरे पास 5 थाई लड़कियाँ थीं, बोलिए फिर आ जाएँगी। विदेशी से अच्छा पैसा मिलता है।

रिपोर्टर: वीज़ा कैंसिल हो जाता है तो?

राहुल: वीज़ा कैंसिल हो जाता है तो छिपाकर रखना होता है। थोड़ा सा रिस्क रहता है, लेकिन सब मैनेज करना पड़ता है।

संतोष का दावा: ट्रेंड लड़कियाँ और ‘गरीबी’ का फायदा

संतोष ने दावा किया कि वह चुनाव के दौरान 100 से अधिक हाई प्रोफाइल लड़कियों की व्यवस्था करा सकता है। वह लोकल लड़कियों से ज़्यादा अन्य राज्यों से लड़कियाँ बुलाकर काम करने पर ज़ोर देता है।

रिपोर्टर: एक दम ट्रेंड लड़कियाँ चाहिए।

संतोष: मज़बूत टीम मिलेगी, इसलिए डिमांड भी अधिक होगी। जो आएगी, एक दम बड़ी प्रोफाइल वाली दिखेगी, पूरी तरीके से प्रोफेशनल, फुल ट्रेंड 6–7 साल से काम कर रही।

रिपोर्टर: कहाँ से दिलाएँगे फिर?

संतोष: पैसा कमाना है तो ऐसा स्टेट पकड़िए जहाँ गरीबी हो। वहाँ से सस्ते में लाया जाए, सुंदर देखकर।

रिपोर्टर: ऑर्केस्ट्रा वाली न दे दें?

संतोष: अरे नहीं, पूरी तरीके से प्रोफेशनल देंगे, अंग्रेजी अच्छी बोलने वाली होंगी।

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Q1. MLC आवास में लड़कियों की सप्लाई कौन करता है?

MLC आवास और VIP स्थानों पर लड़कियों की सप्लाई एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से की जाती है। इसमें डिंपल, राहुल और संतोष जैसे एजेंट्स शामिल होते हैं, जो सीधे बॉस या बड़े नेताओं के संपर्क में रहते हैं।

Q2. इस नेटवर्क में विदेशी लड़कियाँ कहाँ से आती हैं?

विदेशी लड़कियाँ मुख्य रूप से थाईलैंड जैसे देशों से टूरिस्ट वीज़ा पर लाई जाती हैं। वीज़ा की अवधि खत्म होने पर, पुलिस को मैनेज करके उन्हें अवैध रूप से भारत में छिपाकर रखा जाता है।

Q3. क्या इन लड़कियों को कोई स्पेशल ‘दवा’ दी जाती है?

एजेंट्स के खुलासे के अनुसार, वे लड़कियों को एक खास दवा का इस्तेमाल करवाते हैं। इसका दावा है कि इससे नेताओं को यह पता नहीं चलता कि लड़की पहले से यह काम कर रही है या नई है।

Q4. नेताओं के लिए काम करने वाली लड़कियों का रेट कैसे तय होता है?

रेट फिक्स्ड नहीं होता। कॉलगर्ल के अनुसार, रेट “पर्सन टू पर्सन” और सामने वाले की चॉइस पर निर्भर करता है। यह डे या नाइट के हिसाब से नहीं, बल्कि ग्राहक की प्रोफाइल (VIP, नेता, बड़ा बिजनेसमैन) पर आधारित होता है।

Q5. क्या इस सप्लाई नेटवर्क में ‘घरेलू’ लड़कियाँ भी शामिल हैं?

हाँ, एजेंट्स ने बताया कि उनके पास अच्छे घरों की लड़कियाँ भी हैं। ये लड़कियाँ कथित तौर पर इसलिए इस काम में आती हैं क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें पैसे नहीं देते और वे अपनी सुंदरता का फायदा उठाना चाहती हैं।

Q6. चुनाव के दौरान इस नेटवर्क का काम कैसे बढ़ जाता है?

चुनाव के समय पॉलिटिशियनों और उनके कैंपेनिंग स्टाफ के बीच डिमांड तेज हो जाती है। एजेंट्स ने बिहार चुनाव के लिए 100 से अधिक हाई-प्रोफाइल लड़कियों की डील करने का दावा किया, जो दिल्ली से लेकर गोरखपुर तक सप्लाई की जानी थीं।

Q7. क्या ये लड़कियाँ किसी ‘एग्रीमेंट’ या ‘सैलरी’ पर काम करती हैं?

एजेंट्स सैलरी और कॉन्टैक्ट दोनों तरह से डील करने को तैयार थे। एक एजेंट ने जॉब के लिए एक एग्रीमेंट करने का भी ज़िक्र किया, जिससे यह काला धंधा एक पेशेवर काम की तरह दिखता है।

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