राम मंदिर विवाद के बाद बड़ा बदलाव: 5585 आवेदनों में से 'ऑपरेशन सिंदूर' के हीरो जीतेंद्र मिश्र बने पहले CEO
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट में यह सबसे बड़ा प्रशासनिक बदलाव है।
ट्रस्ट के कार्यकारी महामंत्री कृष्ण मोहन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस अहम फैसले की जानकारी दी। भारतीय वायुसेना में 43 साल की लंबी सेवा और 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले जीतेंद्र मिश्र अब राम मंदिर का प्रबंधन और वित्तीय मामले संभालेंगे।
चढ़ावा विवाद और ट्रस्ट में फेरबदल: क्या-क्या बदला? राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बाद ट्रस्ट के भीतर शीर्ष स्तर पर बड़े बदलाव किए गए हैं।
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इस्तीफे: विवाद के बाद 27 जून 2026 को ट्रस्ट के तत्कालीन महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसे 6 जुलाई की बैठक में स्वीकार कर लिया गया।
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नई जिम्मेदारियां: पहले कोषाध्यक्ष की भूमिका निभा रहे स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को अब ट्रस्ट का नया महामंत्री बनाया गया है। वहीं, महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। चंपत राय के इस्तीफे के बाद कृष्ण मोहन अंतरिम महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
कौन हैं जीतेंद्र मिश्र?
'ऑपरेशन सिंदूर' से राम मंदिर तक का सफर देवरिया जिले के एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले जीतेंद्र मिश्र इसी साल मई में वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के 'कमांडिंग इन चीफ' के पद से रिटायर हुए हैं।
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सैन्य करियर: उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को एक लड़ाकू विमान पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया था। उनके पास 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है।
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प्रशिक्षण: उन्होंने पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), बेंगलुरु के एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
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'ऑपरेशन सिंदूर' में भूमिका: बीते साल 26 अप्रैल 2025 को पहलगाम चरमपंथी हमले के बाद, 6-7 मई 2025 की दरमियानी रात को भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था। उस समय मिश्र पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। उन्होंने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि यह ऑपरेशन बेहद ठोस खुफिया जानकारी पर आधारित था, जिसका उद्देश्य आतंकियों को सजा देना था।
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सम्मान: राष्ट्र सेवा के लिए उन्हें 'अति विशिष्ट सेवा मेडल', 'विशिष्ट सेवा मेडल' और 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के लिए 'सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल' (SYSM) से सम्मानित किया जा चुका है।
सीईओ बनने पर क्या बोले जीतेंद्र मिश्र?
अपनी नियुक्ति के बाद समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पूर्व एयर मार्शल ने इसे अपना सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा, "43 वर्ष भारतीय वायु सेना में राष्ट्र सेवा के बाद, मुझे श्रीराम ने एक और अवसर प्रदान किया है जहाँ मैं राम मंदिर और श्रीराम के भक्तों की सेवा कर पाऊंगा।" राम मंदिर से जुड़े हालिया विवादों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बीते समय की नहीं, बल्कि आने वाले समय की बात करना चाहते हैं और भविष्य में कार्यों को बेहतरीन तरीके से पूरा करने पर उनका फोकस रहेगा।
जनेऊ, चोटी और आस्था: कैसी थी चयन प्रक्रिया?
राम मंदिर के सीईओ का पद बेहद अहम है, इसलिए इसकी चयन प्रक्रिया (Selection Process) भी काफी अनूठी और सख्त रही। ट्रस्ट द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, इस पद के लिए कुल 5,585 आवेदन आए थे। न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वी.के. चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हवारे की उच्चस्तरीय चयन समिति ने इनमें से 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया। 1 अगस्त 2026 को समिति ने तीन नाम (जीतेंद्र मिश्र, रिटायर्ड मेजर जनरल संजय पी विश्वासराव और श्रुति भारद्वाज) ट्रस्ट को भेजे थे, जिनमें अंततः जीतेंद्र मिश्र के नाम पर मुहर लगी।
इंटरव्यू में पूछे गए कुछ प्रमुख सवाल:
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क्या उम्मीदवार चोटी रखते हैं या जनेऊ पहनते हैं?
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क्या वे शुद्ध शाकाहारी हैं और शराब का सेवन तो नहीं करते?
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भगवान राम में उनकी आस्था और हिंदू धर्म की मूल परंपराओं का ज्ञान कैसा है?
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क्या वे हिंदू धर्म के अनुरूप वस्त्र पहनने में सहज हैं?
ट्रस्ट में पहली बार 'मातृशक्ति', तीन नए सदस्य शामिल सीईओ की नियुक्ति के अलावा, ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडे, दिल्ली के महेश भागचंदका (नए कोषाध्यक्ष) और उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।
निर्मला यादव ट्रस्ट में शामिल होने वाली पहली महिला सदस्य हैं। वे एक शिक्षाविद हैं और 15 साल तक कॉलेज की प्रिंसिपल रही हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के डॉ. सुरेंद्र जैन के अनुसार, निर्मला यादव का वीएचपी में कोई औपचारिक पद नहीं रहा है, लेकिन वे महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रमों में सक्रिय रही हैं। उनकी नियुक्ति पर खुशी जताते हुए स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा, "हमारा मानना है कि इस मातृशक्ति के आने से देवी सीता जी बहुत खुश होंगी। इससे राम मंदिर के संचालन में महिलाओं की सहभागिता बढ़ेगी।"
FAQ
Q: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला सीईओ (CEO) किसे नियुक्त किया गया है? A: भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है।
Q: राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति क्यों की गई? A: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले और उसके बाद ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय के इस्तीफे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए सीईओ की नियुक्ति की गई है।
Q: राम मंदिर ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य कौन हैं? A: उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद की रहने वाली शिक्षाविद निर्मला यादव राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल होने वाली पहली महिला सदस्य बनी हैं।
Q: राम मंदिर ट्रस्ट के नए महामंत्री कौन हैं? A: चंपत राय के इस्तीफे के बाद, स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज (जो पहले कोषाध्यक्ष थे) को राम मंदिर ट्रस्ट का नया महामंत्री बनाया गया है।