India EV Sound Rule 2026: अब खामोश नहीं रहेंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियां, जानें AIS-173 नियम और असर
अक्टूबर 2026 से भारत की सड़कों पर इलेक्ट्रिक कारों की खामोशी टूटने वाली है। सरकार ने MoRTH (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) और ARAI के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए ‘Artificial sound’ यानी Acoustic Vehicle Alerting System (AVAS) को अनिवार्य करने का फैसला किया है।
यह केवल शोर मचाने के लिए नहीं, बल्कि Pedestrian Safety (पैदल यात्रियों की सुरक्षा) के लिए एक गेम-चेंजिंग कदम है। आइए, एक एक्सपर्ट की नज़र से समझते हैं कि AIS-173 स्टैंडर्ड क्या है, यह तकनीक कैसे काम करती है, और एक EV बायर (Buyer) के तौर पर आपको क्या जानना जरूरी है।
सरकार का अल्टीमेटम: अक्टूबर 2026 और 2027 की समयसीमा
ज्यादातर लोग सिर्फ़ ‘अक्टूबर’ की बात कर रहे हैं, लेकिन एक समझदार बायर के तौर पर आपको दोनों डेडलाइन्स पता होनी चाहिए। ARAI के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार यह नियम दो चरणों में लागू होगा:
-
न्यू मॉडल लॉन्च (New Models): 1 अक्टूबर 2026 से लॉन्च होने वाले सभी नए इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल्स में AVAS फैक्ट्री-फिटेड होना अनिवार्य होगा।
-
मौजूदा मॉडल्स (Existing Models): जो गाड़ियां अभी प्रोडक्शन में हैं और बिक रही हैं, उन्हें 1 अक्टूबर 2027 तक इस नियम का पालन करना होगा।
AVAS और AIS-173 स्टैंडर्ड: तकनीकी डिटेल्स (Technical Deep Dive)
आपके मन में सवाल होगा कि आखिर यह सिस्टम काम कैसे करेगा? क्या यह हॉर्न जैसा होगा? बिल्कुल नहीं। यह सिस्टम AIS-173 (Automotive Industry Standard) के तहत काम करेगा, जो वैश्विक UN R138 मानकों के अनुरूप है।
यह सिस्टम 3 प्रमुख स्थितियों में एक्टिव होगा:
-
स्पीड लिमिट (0-20 kmph): जब गाड़ी स्टार्ट होकर 0 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर होगी, तब यह एक ‘Low-Frequency Hum’ (इंजन जैसी धीमी गूंज) पैदा करेगा। 20 kmph के बाद, टायर का घर्षण (Tyre Noise) और हवा की आवाज काफी होती है, इसलिए यह सिस्टम ऑटोमैटिकली बंद हो जाएगा।
-
फ्रीक्वेंसी शिफ्ट (Frequency Shift): यह एक स्मार्ट साउंड है। जैसे-जैसे आप एक्सीलरेटर दबाएंगे, आवाज की पिच (Pitch) बढ़ेगी। इससे पास खड़े व्यक्ति को पता चलेगा कि गाड़ी Accelerate (तेज) हो रही है या Decelerate (धीमी) हो रही है।
-
रिवर्स मोड (Reverse Mode): बैक करते समय गाड़ी एक अलग चेतावनी वाली टोन देगी, क्योंकि पीछे का ब्लाइंड स्पॉट (Blind Spot) सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।
किन गाड़ियों पर लागू होगा यह नियम? (Vehicle Categories)
यह नियम सिर्फ़ आपकी पर्सनल कार तक सीमित नहीं है। नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह Category M (यात्री वाहन – जैसे कार और बसें) और Category N (मालवाहक वाहन – जैसे इलेक्ट्रिक ट्रक) पर लागू होगा।
लेटेस्ट अपडेट (Jan 2026): सरकार ई-रिक्शा (E-Rickshaws) और ई-कार्ट्स को भी इस दायरे में लाने पर विचार कर रही है, क्योंकि शहर की तंग गलियों में सबसे ज्यादा जोखिम इन्हीं से होता है।
‘साइलेंट किलर’ क्यों है EV की खामोशी?
EVs का सबसे बड़ा यूएसपी (USP) उनका साइलेंट होना था, लेकिन यही अब Road Safety के लिए चुनौती बन गया है।
-
Visually impaired के लिए खतरा: ब्लाइंड या कम नज़र वाले लोग कानों से सुनकर सड़क पार करते हैं। उनके लिए एक शांत EV “अदृश्य” समान है।
-
Smartphone distraction: आज के दौर में जब पैदल यात्री फोन में व्यस्त रहते हैं, तो बिना इंजन की आवाज वाली गाड़ी का पास आ जाना एक्सीडेंट का बड़ा कारण बन रहा है।
यूरोप (EU Regulation 540/2014) और अमेरिका (NHTSA) में यह नियम पहले से ही सख्ती से लागू है। भारत अब उन्हीं ग्लोबल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को अपना रहा है।
पुराने EV मालिकों का क्या होगा? (Retrofitment Queries)
यह सबसे बड़ा सवाल है—”क्या मेरी पुरानी नेक्सन (Nexon) या जेडएस ईवी (ZS EV) में यह लगवाना पड़ेगा?”
फिलहाल, ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में पुराने बिक चुके वाहनों के लिए Rateofitment (बाद में लगवाना) अनिवार्य नहीं किया गया है। यह नियम मुख्य रूप से OEMs (Original Equipment Manufacturers) के लिए है कि वे शोरूम से निकलने वाली गाड़ियों में इसे लगाकर दें। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से भविष्य में आफ्टरमार्केट किट्स (Aftermarket Kits) का विकल्प आ सकता है।
Moto Watch Review & Launch: 13 दिन की बैटरी वाली यह स्मार्टवॉच क्या है Best Deal?
(देश और दुनिया की ताज़ा खबरें सबसे पहले पढ़ें Deshtak.com पर , आप हमें Facebook, Twitter, Instagram , LinkedIn और Youtube पर फ़ॉलो करे)










