RBI MPC Meeting 2026: रेपो रेट पर आया बड़ा फैसला, क्या महंगी होगी EMI?

RBI MPC Meeting 2026 का फैसला आ गया है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जानिए आपकी होम लोन EMI और जीडीपी ग्रोथ पर इसका क्या असर पड़ेगा। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

April 9, 2026 7:52 PM
RBI MPC Meeting 2026, Repo Rate:

RBI MPC Meeting 2026: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार — आपकी EMI पर क्या असर?

RBI MPC Meeting 2026, Repo Rate: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 8 अप्रैल 2026 को केंद्रीय बैंक की लेटेस्ट मौद्रिक नीति का फैसला सुना दिया है। गवर्नर ने बुधवार को कहा कि रेपो रेट को स्थिर रखा गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो दर का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया और अपने रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल ब्याज दरों में तुरंत बदलाव की संभावना कम है।

रेपो रेट 5.25% पर बरकरार — MPC का सर्वसम्मत फैसला

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 6 अप्रैल से शुरू तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए इन निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा, “एमपीसी ने आम सहमति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय किया है।”

इसके साथ ही एमपीसी ने मौद्रिक नीति के मामले में ‘तटस्थ’ रुख को बनाये रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान को बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं चालू वित्त वर्ष 2026-27 में इसके 6.9 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी है। चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

फरवरी 2025 से अब तक 125 बेसिस पॉइंट की कटौती

आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक नीतिगत रेपो दर में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर चुका है। रेपो दर में यह कमी अलग-अलग मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठकों में चरणबद्ध तरीके से की गई।

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वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान

तिमाही महंगाई अनुमान
वित्त वर्ष 2027 (पूरा) 4.6%
पहली तिमाही 4.0%
दूसरी तिमाही 4.4%
तीसरी तिमाही 5.2%
चौथी तिमाही 4.7%

वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी का अनुमान

तिमाही GDP अनुमान पहले का अनुमान
पहली तिमाही 6.8% 6.9%
दूसरी तिमाही 6.7% 7.0%
तीसरी तिमाही 7.0%
चौथी तिमाही 7.2%

रेपो रेट क्या होता है — और आम आदमी की EMI से इसका कनेक्शन

रेपो रेट (Repo Rate) वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जरूरत पड़ने पर बैंकों को अल्पकाल के लिए लोन देता है। अगर हम इसे आसान भाषा में समझें तो जब किसी बैंक को पैसों की कमी होती है, तो वह RBI से उधार लेता है। केंद्रीय बैंक जिस ब्याज दर पर यह पैसा देता है, उसी को रेपो रेट कहा जाता है।

होम लोन और कार लोन EMI पर रेपो रेट का सीधा असर

अगर रेपो रेट बढ़ता है तो फिर बैंकों के लिए पैसा महंगा होगा। जिससे होम लोन, कार लोन आदि महंगे हो सकते हैं। वही, रेपो रेट घटेगा तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता होगा। जिससे लोन सस्ते हो सकते हैं।

फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है, इसलिए होम लोन और कार लोन की मौजूदा EMI में तत्काल कोई बदलाव नहीं आएगा। अगर आप नया लोन लेने की सोच रहे हैं, तो अभी ब्याज दरें पिछले 14-16 महीनों की तुलना में काफी नीचे हैं।

विशेषज्ञों की राय: स्थिर रेपो रेट से MSME और घर खरीदारों को क्या फायदा

‘RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर बिना किसी बदलाव के बनाए रखने और पॉलिसी के रुख को ‘न्यूट्रल’ रखने का फैसला किया है। यह उन छोटे उद्यमियों को स्थिरता और अनुमान लगाने की क्षमता देता है जो बाजार की अनिश्चित स्थितियों का सामना कर रहे हैं। हालांकि, अगर रेट में और कटौती होती तो इससे गति और तेज हो जाती, लेकिन पिछले 14-16 महीनों में कुल मिलाकर लगभग 1.25% की ढील MSME सेक्टर को लगातार सहारा दे रही है। उन छोटे व्यवसायों के लिए जो 8-10% जितने कम मार्जिन पर काम करते हैं, उधार लेने की लागत में निश्चितता उतनी ही जरूरी है जितनी कि उसमें कमी।

स्थिर रेट का माहौल उद्यमियों को अपने कैश फ़्लो की योजना बनाने, इन्वेंट्री चक्रों को संभालने और विस्तार के बारे में सोच-समझकर फ़ैसले लेने में मदद करता है। RBI का आज का यह कदम समझदारी भरा है, क्योंकि यह मौजूदा वैश्विक बाहरी स्थितियों के अनुरूप है और साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि अर्थव्यवस्था की विकास गति बनी रहे।’

— लक्ष्मी वेंकटरमण वेंकटेशन, फाउंडिंग और मैनेजिंग ट्रस्टी, भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट

‘RBI का रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखना सही और संतुलित फैसला है, खासकर जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। इससे घर खरीदने वालों का भरोसा बढ़ता है और होम लोन की शर्तें स्थिर रहती हैं। पहली बार घर खरीदने वाले और अपने रहने के लिए घर लेने वाले लोगों के लिए यह बहुत अहम है। अगर रेट कम होता तो लोन सस्ता हो सकता था, लेकिन अभी रेट स्थिर रहने से बैंकों और ग्राहकों दोनों को साफ समझ मिलती है और पहले लिए गए फैसलों का पूरा फायदा मिल पाता है।’

— प्रतीक तिवारी, मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रतीक ग्रुप

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

होम लोन की EMI अभी कम होगी या नहीं?
अभी EMI में कोई बदलाव नहीं होगा क्योंकि रेपो रेट 5.25% पर ही रखा गया है। हालांकि, फरवरी 2025 से अब तक 125 बेसिस पॉइंट की कटौती हो चुकी है, जिसका फायदा उन्हें मिल रहा है जिनका लोन floating rate पर है। अगर आपके बैंक ने अभी तक पुरानी कटौती का फायदा EMI में नहीं दिया है, तो अपने बैंक से संपर्क करें।
अभी RBI रेपो रेट कितना है?
अप्रैल 2026 की MPC बैठक के बाद रेपो रेट 5.25% है। यह फरवरी 2025 के 6.50% से 125 बेसिस पॉइंट नीचे है। RBI ने इसे ‘तटस्थ’ रुख के साथ बनाए रखा है, यानी आगे बदलाव की गुंजाइश दोनों तरफ है।
रेपो रेट में कटौती अगली बार कब होगी?
RBI ने कोई टाइमलाइन नहीं दी है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और तीसरी तिमाही में महंगाई के 5.2% तक जाने के अनुमान को देखते हुए अगली कटौती FY2027 की दूसरी छमाही से पहले मुश्किल लगती है। हालांकि, अगर महंगाई 4% के करीब रही, तो RBI जल्दी भी एक्शन ले सकता है।
रेपो रेट घटने से क्या बैंक तुरंत लोन सस्ता कर देते हैं?
नहीं — बैंक तुरंत नहीं बदलते। ज्यादातर बैंक रेपो रेट से लिंक्ड external benchmark lending rate (EBLR) इस्तेमाल करते हैं, जो आमतौर पर 1-3 महीने में अपडेट होती है। अगर आपका लोन MCLR-linked है, तो बदलाव और देर से आता है — कभी-कभी 6 से 12 महीने बाद।
MSME कारोबारियों के लिए रेपो रेट स्थिर रहना अच्छा है या बुरा?
ज्यादातर MSME के लिए यह mixed news है। एक तरफ, उधार लागत में और कमी नहीं होगी — जो नए expansion plan कर रहे थे उनके लिए निराशाजनक है। दूसरी तरफ, स्थिर rate environment में cash flow planning आसान होती है। जो कारोबारी पहले से 8-10% margin पर काम कर रहे हैं, उनके लिए predictability, rate cut जितनी ही जरूरी है।
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