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TDS Refund: ITR Refund पाने का A to Z गाइड, आसान तरीका और स्टेटस चेक

ITR Refund: क्या TDS काटा गया पैसा वापस मिल सकता है? जानें टीडीएस रिफंड (TDS Refund) की पूरी प्रक्रिया टीडीएस रिफंड (TDS Refund) – यह एक ऐसा विषय है जो सालों से इनकम टैक्स रिटर्न (
TDS Refund: ITR Refund पाने का A to Z गाइड, आसान तरीका और स्टेटस चेक
TDS Refund: ITR Refund पाने का A to Z गाइड, आसान तरीका और स्टेटस चेक

ITR Refund: क्या TDS काटा गया पैसा वापस मिल सकता है? जानें टीडीएस रिफंड (TDS Refund) की पूरी प्रक्रिया

टीडीएस रिफंड (TDS Refund) – यह एक ऐसा विषय है जो सालों से इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भर रहे अनुभवी लोगों को भी अक्सर भ्रमित कर देता है। क्या कटा हुआ टैक्स वाकई वापस मिल सकता है? हाँ, बिल्कुल! और यह आपकी मेहनत की कमाई का वह हिस्सा है जो गलती से या किसी प्रावधान के तहत आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी से ज्यादा कट गया था। यह टीडीएस रिफंड (Tax Deducted at Source Refund) तब मिलता है जब किसी वित्तीय वर्ष (Financial Year) के दौरान अलग-अलग स्रोतों से काटा गया कुल टैक्स, आयकर विभाग के अनुसार, आपकी सालभर की वास्तविक टैक्स देनदारी से ज्यादा हो जाता है। ऐसे में, आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करके उस अतिरिक्त टैक्स को वापस पाने का दावा (क्लेम) कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आप सही समय पर आईटीआर दाखिल करें, अपनी सभी बैंक डिटेल्स (खाता संख्या और IFSC कोड) एकदम सही दें, और ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करें। जब आयकर विभाग आपकी रिटर्न को प्रोसेस कर देता है, तो रिफंड की रकम सीधे आपके बैंक अकाउंट में आ जाती है। यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल लग सकती है, लेकिन सही जानकारी के साथ यह बेहद आसान है।

टीडीएस रिफंड (TDS Refund) का मतलब क्या है और यह क्यों बनता है?

अगर आपकी सैलरी (Salary), ब्याज (Interest), किराया (Rent), या किसी प्रोफेशनल फीस (Professional Fees) से स्रोत पर ज्यादा टैक्स कट गया है, तो आपको बिल्कुल भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। हमारा इनकम टैक्स विभाग आपको यह अतिरिक्त पैसा वापस करता है, जिसे टीडीएस रिफंड (TDS Refund) कहा जाता है। इसे आप अपनी ओवरपेड टैक्स राशि (Overpaid Tax Amount) भी कह सकते हैं। यह वापसी तभी संभव होती है जब आप समय पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं। टीडीएस रिफंड (TDS refund) वह रकम है जो सरकार आपको वापस लौटाती है, क्योंकि आपके नियोक्ता (Employer) या भुगतानकर्ता (Payer) ने आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक राशि काट ली थी। इसे समझने के लिए, पहले आपकी कुल इनकम की गणना की जाती है। इसके बाद उस इनकम पर लागू टैक्स स्लैब (Tax Slab) के अनुसार आपका वास्तविक टैक्स बनता है। अंत में, इस वास्तविक टैक्स को पहले से काटे गए टीडीएस (TDS) से मिलाया जाता है (यानी, एडजस्ट किया जाता है)। Arattai Messenger App धड़ाधड़ डाउनलोड: WhatsApp के बीटा वर्जन में ये परेशानी, यूज़र्स से बोले- न करें अपडेट उदाहरण के तौर पर समझिए:
विवरण (Details) राज का TDS रिफंड केस (वित्त वर्ष 2024-25)
कुल आय (सैलरी + ब्याज) ₹ 9,50,000
साल भर में कटा कुल टीडीएस (TDS) ₹ 1,01,000
वास्तविक टैक्स देनदारी (ITR भरने के बाद) ₹ 39,000
TDS रिफंड राशि ₹ 62,000 (₹ 1,01,000 - ₹ 39,000)
इस उदाहरण में, राज को ₹ 62,000 का टीडीएस रिफंड मिलना चाहिए। यह दिखाता है कि आईटीआर (ITR) भरना कितना ज़रूरी है, क्योंकि यह केवल टैक्स चुकाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी ओवरपेड राशि वापस पाने का भी कानूनी तरीका है। अक्सर लोग ITR Refund और TDS Refund में हो जाते हैं कनफ्यूज यह एक सामान्य भ्रम है। जब भी ITR Refund और TDS Refund की बात आती है, तो सालों से आईटीआर भर रहे लोग भी एक बार के लिए भ्रमित हो जाते हैं। दरअसल, अधिकतर लोगों को ITR Refund में वास्तव में TDS Refund ही मिलता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ज़्यादातर सैलरीड क्लास या छोटे व्यवसायी टीडीएस कटने के बाद ही रिफंड पाते हैं। बहुत कम लोग होते हैं जो एडवांस टैक्स (Advance Tax) भरते हैं और फिर उस पर रिफंड का दावा करते हैं। इसलिए, यह जानना ज़रूरी है कि आपके रिफंड का कारण क्या है—कटा हुआ ज़्यादा टीडीएस या भरा गया अतिरिक्त एडवांस टैक्स

किन मामलों में बनता है टीडीएस रिफंड (TDS Refund Claim)?

टीडीएस रिफंड बनने के कई आम कारण हो सकते हैं, जिन्हें जानना हर करदाता (Taxpayer) के लिए ज़रूरी है:
  1. नियोक्ता द्वारा ज्यादा टैक्स काटना: यदि नियोक्ता ने आपके निवेश (Investments) या कटौतियों (Deductions) (जैसे Section 80C) को ध्यान में रखे बिना ज्यादा टैक्स काट लिया हो।
  2. बैंक FD पर गलत टैक्स कटौती: सीनियर सिटिजंस (Senior Citizens) के मामले में या ऐसे अन्य मामलों में जहाँ ब्याज की लिमिट से ज्यादा टैक्स कट गया हो।
  3. पैन (PAN) और आधार (Aadhaar) लिंक न होना: लिंकिंग न होने के कारण डबल टैक्स (या उच्च दर पर) कट जाए।
  4. आय में बदलाव: साल के बीच में नौकरी बदलने या अन्य आय स्रोतों में अचानक कमी आने से, जबकि टीडीएस उच्च आय के अनुमान पर कटता रहा हो।
  5. आयकर छूट का दावा: आईटीआर भरते समय आपने जिन छूटों या कटौतियों का दावा किया है, वह आपके नियोक्ता को पहले नहीं बताया गया था।
टीडीएस रिफंड (TDS Refund) क्लेम करने का सही समय टीडीएस रिफंड साल में केवल एक बार, आईटीआर (ITR) फाइलिंग के दौरान ही क्लेम किया जा सकता है। चाहे आपके बैंक ने एफडी (FD) पर टैक्स काटा हो या आपकी नौकरी के दौरान ज्यादा टैक्स डिडक्ट हुआ हो, सभी प्रकार के टीडीएस का अंतिम एडजस्टमेंट और रिफंड क्लेम केवल इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म के माध्यम से ही किया जाता है।

टीडीएस रिफंड (TDS Refund) क्लेम करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया

टीडीएस रिफंड क्लेम करने की पूरी प्रक्रिया आपके आईटीआर दाखिल करने से शुरू होती है और ई-वेरिफिकेशन के साथ समाप्त होती है। यहाँ सरल चरण दिए गए हैं:

स्टेप 1: ITR फॉर्म भरना और समय पर दाखिल करना

  • इनकम टैक्स की ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉगिन करें।
  • अपनी आय के स्रोत के अनुसार संबंधित ITR फॉर्म (जैसे ITR-1, ITR-2, ITR-3) भरें।
  • फॉर्म में अपनी कुल आय, कटौतियाँ और पहले से कटे हुए टीडीएस की राशि सही-सही भरें।
  • सुनिश्चित करें कि आप आईटीआर फाइलिंग की समय सीमा (Deadline) से पहले इसे भरें। देर से भरने पर रिफंड मिलने में भी देरी होती है।

स्टेप 2: सही बैंक डिटेल्स दर्ज करना

  • आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड (Pre-validated) होना चाहिए।
  • IFSC कोड और अकाउंट नंबर दोबारा जांच लें। ये डिटेल्स गलत होने पर आपका रिफंड फेल हो सकता है।
  • ध्यान रखें, रिफंड उसी बैंक अकाउंट में आता है जो पैन से लिंक और आयकर विभाग के पोर्टल पर मान्य (validated) हो।

स्टेप 3: ITR का ई-वेरिफिकेशन (E-Verification)

  • ई-वेरिफिकेशन के बिना, आपका आईटीआर अधूरा माना जाता है और रिफंड प्रोसेस नहीं होगा।
  • आप आधार ओटीपी (Aadhaar OTP), नेटबैंकिंग (Netbanking), डिजिटल सिग्नेचर (Digital Signature), या बैंक ATM के माध्यम से ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं। यह टीडीएस रिफंड प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।

ऑनलाइन ITR और TDS Refund क्लेम कैसे करें?

चरण (Step) क्रिया (Action)
1 इनकम टैक्स की आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
2 संबंधित ITR फॉर्म (जैसे ITR-1, ITR-2) ऑनलाइन भरें।
3 अपनी आय और कटे हुए TDS की डिटेल्स की पुष्टि करें।
4 फॉर्म सबमिट करने के बाद, आधार OTP या नेटबैंकिंग के माध्यम से ई-वेरिफाई करें।
5 आयकर विभाग आपकी रिटर्न को प्रोसेस करेगा और यदि रिफंड बनता है, तो आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाएगा।

टीडीएस रिफंड (TDS Refund) कब और कैसे मिलता है?

ITR फॉर्म के अनुसार रिफंड प्रोसेसिंग

इनकम टैक्स के पूर्व चीफ कमिश्नर रामकृष्ण श्रीनिवासन के अनुसार, रिफंड प्रोसेस करने का एक क्रम होता है। सबसे पहले ITR-1 (सबसे सरल फॉर्म) के रिफंड प्रोसेस किए जाते हैं, उसके बाद ITR-2 का नंबर आता है, और फिर ITR-3 का। यह क्रम इस बात पर निर्भर करता है कि आईटीआर फॉर्म कितना जटिल है। एक महत्वपूर्ण बात: अगर आपने आईटीआर आखिरी तारीख पर या उसके बहुत पास आने पर भरा है, तो आपको रिफंड मिलने में देर हो सकती है। ITR-2 और ITR-3 के रिफंड, जिनमें कोई कमी या डिफेक्ट न हो, उन्हें भी प्रोसेस होने में कुछ महीनों तक का समय लग सकता है।

देर से मिला रिफंड तो क्या ब्याज (Interest) भी मिलेगा?

यह एक बड़ी राहत है! यदि आयकर विभाग आपका रिफंड समय पर जारी नहीं करता है, तो वह आपको 6% सालाना ब्याज (Section 244A के तहत) भी देता है। यह ब्याज आपकी रिफंड राशि के साथ आपके बैंक अकाउंट में जमा (क्रेडिट) हो जाता है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि करदाताओं को उनके पैसे की वापसी में अनुचित देरी न हो।

कितने दिन में रिफंड अकाउंट में आता है?

आयकर विभाग की वेबसाइट के अनुसार, रिफंड आने में आमतौर पर 4-5 हफ्तों तक का समय लगता है। हालाँकि, यह तभी संभव है जब आपने ITR फाइल करने के तुरंत बाद उसे ई-वेरिफाई कर दिया हो। ई-वेरिफिकेशन के बिना रिफंड की प्रक्रिया शुरू नहीं होती।

टीडीएस रिफंड स्टेटस (TDS Refund Status) कैसे चेक करें?

आईटीआर फाइल करने के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है कि रिफंड कब आएगा? इसकी कोई निश्चित तारीख तय नहीं होती, लेकिन आप खुद इनकम टैक्स की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आसानी से अपना रिफंड स्टेटस चेक कर सकते हैं।

टीडीएस रिफंड स्टेटस चेक करने का तरीका

  1. ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएँ: सबसे पहले इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएँ।
  2. लॉगिन करें: अपनी यूज़र आईडी (पैन) और पासवर्ड से लॉगिन करें।
  3. रिटर्न पर जाएँ: "e-File" टैब पर क्लिक करें, फिर "Income Tax Returns" में जाकर "View Filed Returns" पर क्लिक करें।
  4. डिटेल्स देखें: जिस आकलन वर्ष (Assessment Year) का रिफंड स्टेटस जानना है, उसके सामने "View Details" पर क्लिक करें।
  5. रिफंड स्टेटस चेक करें: यहाँ आपको अपने रिफंड का स्टेटस और आईटीआर की पूरी लाइफ साइकिल (जैसे 'Processed', 'Refund Due' या 'Refund Issued') पता चल जाएगी।
विभिन्न रिफंड स्टेटस का अर्थ:
स्टेटस (Status) मतलब (Meaning)
रिफंड जारी हो गया है (Refund Issued) आपका रिफंड सफलतापूर्वक आपके बैंक को भेज दिया गया है।
रिफंड आंशिक रूप से एडजस्ट (Refund Partially Adjusted) आपके रिफंड का कुछ हिस्सा पिछली टैक्स देनदारी (Demand) के विरुद्ध समायोजित (Adjusted) कर दिया गया है।
पूरा रिफंड एडजस्ट (Full Refund Adjusted) आपका पूरा रिफंड पिछली देनदारी चुकाने में उपयोग हो गया है, इसलिए आपको कोई राशि नहीं मिलेगी।
रिफंड फेल हुआ (Refund Failure) बैंक डिटेल्स में गड़बड़ी या पैन-आधार लिंक न होने के कारण रिफंड आपके अकाउंट में जमा नहीं हो पाया।

रिफंड फेल हो जाए तो क्या करें? रीइश्यू रिक्वेस्ट (Refund Reissue Request) की प्रक्रिया

कई बार करदाताओं की कोई गलती नहीं होती, फिर भी रिफंड फेल हो जाता है। ऐसे में घबराने की बजाय तुरंत ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर रिफंड स्टेटस चेक करना चाहिए। अगर 'Refund Failure' दिख रहा है, तो आप रीइश्यू रिक्वेस्ट (Reissue Request) डाल सकते हैं।

रिफंड फेल होने की मुख्य वजहें

  • बैंक डिटेल्स गलत दर्ज होना (अकाउंट नंबर या IFSC कोड में गड़बड़ी)।
  • बैंक अकाउंट का वैलिडेट न होना।
  • पैन और बैंक अकाउंट में दर्ज नाम का मेल न खाना।
  • पैन-आधार लिंक न होना।
पैन-आधार लिंकिंग की अहमियत आजकल पैन (PAN) और आधार (Aadhaar) को लिंक करना अनिवार्य है। अगर यह लिंकिंग नहीं हुई है, तो न केवल आपका रिफंड अटक सकता है, बल्कि उच्च दर पर टीडीएस भी कट सकता है। इसलिए, रिफंड रीइश्यू रिक्वेस्ट डालने से पहले पैन-आधार को लिंक करना बेहद ज़रूरी है।

रिफंड रीइश्यू रिक्वेस्ट की पूरी प्रक्रिया

अगर आपका रिफंड अटक गया है, तो आयकर विभाग की वेबसाइट पर जाकर आसानी से रीइश्यू रिक्वेस्ट डाल सकते हैं:
  1. पोर्टल पर लॉगिन करें: ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें।
  2. सर्विस चुनें: "Services" टैब में जाकर "Refund Reissue" सेलेक्ट करें।
  3. रिक्वेस्ट बनाएँ: "Create Refund Reissue request" पर क्लिक करें।
  4. रिकॉर्ड चुनें: वह रिकॉर्ड चुनें, जिसके लिए आप टीडीएस रिफंड की रिक्वेस्ट डालना चाहते हैं।
  5. बैंक अकाउंट चुनें: उस बैंक अकाउंट को चुनें, जिसमें आप रिफंड चाहते हैं। अगर अकाउंट मान्य नहीं है, तो पहले उसे वैलिडेट करें।
  6. वेरिफिकेशन: "Proceed to Verification" पर क्लिक करें।
  7. ई-वेरिफाई करें: आधार ओटीपी, ईवीसी (EVC) या डीएससी (DSC) से ई-वेरिफिकेशन करें।
  8. रिक्वेस्ट सबमिट: "Continue" पर क्लिक करें, और आपकी टीडीएस रिफंड रीइश्यू रिक्वेस्ट सबमिट हो जाएगी।

Conclusion

टीडीएस रिफंड (TDS Refund) हर करदाता के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपकी मेहनत की वह कमाई है जो ज्यादा कट गई थी। एक पेशेवर SEO और कंटेंट विशेषज्ञ के तौर पर मेरा यही सुझाव है कि: यदि आप समय पर ITR भरते हैं, उसे ई-वेरिफाई करते हैं, और अपनी बैंक डिटेल्स सही रखते हैं, तो आपका रिफंड बिना किसी दिक्कत के आपके बैंक अकाउंट में आ जाएगा। टीडीएस रिफंड का सही और समय पर दावा (Claim) करना आपके वित्तीय स्वास्थ्य (Financial Health) के लिए बेहद ज़रूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) - TDS Refund

1. TDS Refund क्या होता है और यह ITR Refund से कैसे अलग है?

टीडीएस रिफंड वह रकम है जो सरकार आपको तब वापस करती है जब साल भर में अलग-अलग स्रोतों से काटा गया टैक्स (TDS) आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी से ज्यादा होता है। ITR Refund एक व्यापक शब्द है जिसमें TDS Refund या एडवांस टैक्स रिफंड दोनों शामिल हो सकते हैं। अधिकतर मामलों में, ITR Refund का मतलब TDS Refund ही होता है।

2. मुझे TDS Refund कब मिलता है और इसमें कितना समय लग सकता है?

टीडीएस रिफंड आपको इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने और उसके ई-वेरिफिकेशन के बाद मिलता है। आमतौर पर, आयकर विभाग द्वारा ITR प्रोसेस होने के 4-5 हफ्तों के भीतर रिफंड आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है। हालांकि, जटिल मामलों या ITR-2/ITR-3 में कुछ महीने भी लग सकते हैं।

3. मैं अपने TDS Refund का स्टेटस ऑनलाइन कैसे चेक कर सकता हूँ?

आप इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके स्टेटस चेक कर सकते हैं। "e-File" टैब > "Income Tax Returns" > "View Filed Returns" पर जाकर आप अपने रिफंड का वर्तमान स्टेटस (जैसे Refund Due, Refund Issued, या Refund Failure) देख सकते हैं।

4. अगर मेरा TDS Refund फेल हो जाए तो मुझे क्या कदम उठाने चाहिए?

अगर रिफंड फेल हो जाए तो सबसे पहले कारण की जाँच करें (जैसे गलत बैंक अकाउंट या पैन-आधार लिंक न होना)। इसके बाद, ई-फाइलिंग पोर्टल पर "Services" टैब के तहत "Refund Reissue Request" डालकर सही और मान्य बैंक डिटेल्स अपडेट करें।

5. क्या TDS Refund की रकम पर आयकर विभाग ब्याज देता है?

हाँ, बिल्कुल। आयकर विभाग के नियमों (धारा Section 244A) के अनुसार, यदि विभाग रिफंड जारी करने में देरी करता है, तो आपको 6% सालाना ब्याज भी मिलता है। यह ब्याज आपकी रिफंड राशि के साथ आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है।

6. क्या सीनियर सिटिजंस को भी TDS रिफंड मिल सकता है और किस मामले में?

हाँ, सीनियर सिटिजंस को भी TDS रिफंड मिल सकता है। खासकर तब जब बैंक ने उनकी FD पर ब्याज की सीमा से ज्यादा या गलत दर से टैक्स काट लिया हो, या उनकी कुल टैक्स देनदारी शून्य हो। रिफंड क्लेम करने के लिए उन्हें ITR दाखिल करना अनिवार्य है।

7. TDS Refund पाने के लिए ITR फाइलिंग की क्या अनिवार्यता है?

टीडीएस रिफंड पाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना अनिवार्य है। ITR के माध्यम से ही आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी की गणना होती है, और यह साबित होता है कि आपका कितना टैक्स ज़्यादा कटा है। बिना ITR भरे, आप रिफंड का दावा नहीं कर सकते।

8. क्या पैन और आधार लिंक न होने पर मेरा रिफंड अटक सकता है?

हाँ, पैन (PAN) और आधार (Aadhaar) का लिंक होना आजकल अनिवार्य है। अगर ये लिंक नहीं हैं, तो आपका TDS रिफंड अटक सकता है या उच्च दर पर TDS कट सकता है। इसलिए, रिफंड क्लेम करने से पहले लिंकिंग सुनिश्चित करें।

9. ITR-1, ITR-2 और ITR-3 में से किसका रिफंड सबसे पहले प्रोसेस होता है?

आयकर विभाग आमतौर पर सबसे पहले ITR-1 (वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए सबसे सरल फॉर्म) के रिफंड को प्रोसेस करता है, उसके बाद ITR-2 और फिर ITR-3 का नंबर आता है।

10. क्या हर साल TDS Refund क्लेम करना पड़ता है?

हाँ, प्रत्येक वित्तीय वर्ष (Financial Year) का TDS Refund उसी वर्ष के लिए ITR फाइलिंग के दौरान क्लेम करना होता है। यह एक वार्षिक प्रक्रिया है और आप एक साल का रिफंड अगले साल की ITR में एडजस्ट नहीं कर सकते।

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