Budget 2026 in Hindi: वित्त मंत्री ने बदल डाले ये 5 नियम, आम आदमी और निवेशकों के लिए विस्तृत गाइड
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फ़रवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) पेश किया। भले ही पहली नज़र में यह बजट आम करदाताओं (Taxpayers) के लिए ‘यथास्थिति’ (Status Quo) वाला लग सकता है क्योंकि इनकम टैक्स स्लैब (Income Tax Slabs) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इसके ‘फाइन प्रिंट’ में कई ऐसे तकनीकी बदलाव हैं जो आपकी वित्तीय योजना (Financial Planning) को सीधे प्रभावित करेंगे।
बाजार विशेषज्ञों और शीर्ष वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, सरकार ने राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। यहाँ हम उन 5 प्रमुख घोषणाओं और तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं, जो हर निवेशक और आम नागरिक के लिए जानना अनिवार्य है।
1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) के टैक्स नियमों में बड़ा फेरबदल
सोने में निवेश करने वालों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव है। सरकार ने सेकंडरी मार्केट (Secondary Market) से SGB की खरीद पर मिलने वाले टैक्स लाभ को सीमित कर दिया है।
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पुराना नियम: अब तक, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स को मैच्योरिटी तक होल्ड करने पर होने वाला कैपिटल गेन्स (Capital Gains) पूरी तरह टैक्स-फ्री था। चाहे आपने इसे RBI के इश्यू के वक्त खरीदा हो या स्टॉक एक्सचेंज (BSE/NSE) से।
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नया नियम (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी): वित्त मंत्री ने सेकंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर कैपिटल गेन टैक्स छूट खत्म कर दी है।
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निवेशकों पर असर: यदि आप 1 अप्रैल 2026 के बाद एक्सचेंज से SGB खरीदते हैं और उसे मैच्योरिटी तक रखते हैं, तो कीमत में आए अंतर (Appreciation) पर आपको नियमानुसार कैपिटल गेन टैक्स देना होगा।
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नोट: टैक्स छूट अब केवल तभी मिलेगी जब आपने बॉन्ड प्राइमरी इश्यू (Primary Issue) के दौरान खरीदा हो और उसे मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो।
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2. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग: STT में भारी बढ़ोतरी
सेबी (SEBI) द्वारा खुदरा निवेशकों को बार-बार आगाह करने के बाद, सरकार ने डेरिवेटिव्स (Derivatives) बाजार में सट्टेबाजी को कम करने के लिए कड़ा कदम उठाया है। इसे बजट 2026 की सबसे ‘बोल्ड’ घोषणा माना जा रहा है।
सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की नई दरें:
| सेगमेंट | पुरानी STT दर | नई STT दर | वृद्धि का प्रभाव |
| Futures | 0.02% | 0.05% | लेन-देन लागत में 150% की वृद्धि |
| Options | 0.10% | 0.15% | प्रीमियम पर लागत 50% बढ़ी |
उदाहरण से समझें:
यदि आप 1 लाख रुपये का फ्यूचर्स सौदा बेचते हैं, तो पहले आपको 20 रुपये STT देना होता था। अब इसी सौदे पर आपको 50 रुपये चुकाने होंगे। यह कदम हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और इंट्राडे ट्रेडर्स के मुनाफे (Profit Margins) को सीधे तौर पर कम करेगा।
3. NRI से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ सरल (TDS नियम संसोधन)
रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए अनिवासी भारतीयों (NRIs) से संपत्ति खरीद के नियमों को आसान बनाया गया है।
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समस्या: पहले, किसी NRI से प्रॉपर्टी खरीदते समय बायर (Buyer) को TDS जमा करने के लिए एक अलग ‘टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन अकाउंट नंबर’ (TAN) के लिए आवेदन करना पड़ता था। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और जटिल थी।
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समाधान: अब भारतीय खरीदारों को TAN की आवश्यकता नहीं होगी। आप अपने पैन कार्ड (PAN) का उपयोग करके ही टीडीएस काट सकते हैं और भुगतान कर सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसी रेजिडेंट इंडियन से संपत्ति खरीदते समय किया जाता है। इससे कागजी कार्रवाई (Compliance Burden) काफी कम हो जाएगी।
4. क्रिप्टो एसेट्स (Crypto Assets) पर रिपोर्टिंग और पेनल्टी
सरकार ने डिजिटल एसेट्स और क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। अब फोकस ‘रेगुलेशन’ से ज्यादा ‘कम्प्लायंस’ (अनुपालन) पर है।
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नया प्रावधान: क्रिप्टो ट्रांजेक्शन की जानकारी छिपाना अब भारी पड़ेगा।
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जुर्माना (Penalty):
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जानकारी न देने पर: 1 अप्रैल 2026 से, यदि आप अपने क्रिप्टो लेनदेन का खुलासा नहीं करते हैं, तो 200 रुपये प्रतिदिन की पेनल्टी लगेगी।
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गलत जानकारी देने पर: यदि जानकारी गलत पाई जाती है या उसमें सुधार नहीं किया जाता, तो 50,000 रुपये तक का एकमुश्त जुर्माना लगाया जा सकता है।
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Budget 2026 in Hindi: मिडिल क्लास, टैक्सपेयर्स और NRI के लिए बजट में क्या है खास?
5. विदेश में पढ़ाई और इलाज: TCS दरों में कटौती
लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश पैसा भेजने वाले छात्रों और मरीजों के लिए यह एक राहत भरी खबर है।
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क्या बदला है? शिक्षा और मेडिकल खर्च के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दर को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।
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शर्त: यह कटौती 10 लाख रुपये से अधिक की रेमिटेंस पर लागू होगी।
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लाभ: इससे विदेशी यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के अभिभावकों पर नकदी प्रवाह (Cash Flow) का दबाव कम होगा।
Budget 2026: वे महत्वपूर्ण आंकड़े जो मिस हो गए
शीर्ष विश्लेषकों की रिपोर्ट के अनुसार, बजट को पूरी तरह समझने के लिए इन मैक्रो-इकोनॉमिक आंकड़ों को देखना ज़रूरी है:
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राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को 4.5% तक सीमित करने का लक्ष्य रखा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
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पूंजीगत व्यय (Capex): इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय में 11% की वृद्धि की गई है, जिसका सीधा असर हाई-स्पीड कॉरिडोर और रेलवे प्रोजेक्ट्स पर दिखेगा।
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कस्टम ड्यूटी (Customs Duty): मोबाइल कंपोनेंट्स और सोलर पैनल्स पर कस्टम ड्यूटी कम की गई है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, इंपोर्टेड लग्जरी कारों पर ड्यूटी बढ़ाई गई है।
FAQ: Budget 2026 से जुड़े विशेषज्ञ प्रश्न
Q1: क्या बजट 2026 में ओल्ड टैक्स रेजीम (Old Tax Regime) को खत्म कर दिया गया है?
Ans: नहीं, वित्त मंत्री ने ओल्ड टैक्स रेजीम को खत्म नहीं किया है, लेकिन कोई नया लाभ भी नहीं दिया है। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि वे न्यू टैक्स रेजीम (New Tax Regime) को ही डिफॉल्ट और आकर्षक बनाना चाहते हैं।
Q2: एक्सचेंज से खरीदे गए SGB पर टैक्स कैसे कैलकुलेट होगा?
Ans: 1 अप्रैल 2026 के बाद एक्सचेंज से खरीदे गए SGB को ‘डेट फंड्स’ की तरह माना जा सकता है या स्लैब रेट के अनुसार टैक्स लग सकता है (विस्तृत नोटिफिकेशन की प्रतीक्षा है)। इंडेक्सेशन का लाभ मिलने की संभावना कम है।
Q3: F&O में STT बढ़ने से खुदरा निवेशकों (Retail Investors) को क्या करना चाहिए?
Ans: स्कैल्पिंग (Scalping) और बहुत छोटे मुनाफे वाले सौदे अब महंगे पड़ेंगे। निवेशकों को अब उच्च कनविक्शन वाले ट्रेड लेने चाहिए और हेजिंग (Hedging) रणनीतियों पर ध्यान देना चाहिए।
Q4: क्रिप्टो पेनल्टी से बचने के लिए क्या करें?
Ans: सभी क्रिप्टो निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने एक्सचेंज से वार्षिक स्टेटमेंट डाउनलोड करें और ITR फाइल करते समय ‘Schedule VDA’ में हर एक ट्रांजेक्शन का सही खुलासा करें।
Q5: क्या LRS के तहत घूमने (Travel) के लिए भेजे गए पैसे पर भी TCS कम हुआ है?
Ans: जी नहीं। TCS में कटौती केवल ‘शिक्षा’ और ‘मेडिकल’ खर्चों के लिए है। टूर पैकेज या अन्य निवेश के लिए विदेश पैसा भेजने पर TCS की दरें (जो कि 20% तक हो सकती हैं) यथावत रहेंगी।
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Conclusion
Budget 2026 लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय आर्थिक सुदृढ़ीकरण (Economic Consolidation) पर केंद्रित है। जहाँ एक तरफ डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स पर सख्ती बरती गई है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों और मरीजों को राहत दी गई है। एक स्मार्ट निवेशक के तौर पर, आपको इन बदले हुए नियमों के अनुसार अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस (Rebalance) करने की आवश्यकता है।
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