🚨 BREAKING NEWS: ⚠️ इटली की ‘मौत की फैक्ट्री’ अब महाराष्ट्र में? 3.5 लाख लोगों को जहर देने वाली मशीनें भारत आईं!
दिनांक: 14 जनवरी, 2026
स्थान: रत्नागिरी, महाराष्ट्र / विसेंजा, इटली
रिपोर्ट: स्पेशल इन्वेस्टिगेशन डेस्क
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इटली का फैसला: जून 2025 में कोर्ट ने मिटेनी (Miteni S.p.A.) के अधिकारियों को कुल 141 साल की सजा सुनाई। आरोप: 3.5 लाख लोगों को जहर देना।
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भारत का कनेक्शन: जिस फैक्ट्री को इटली ने ‘जहरीला’ मानकर बंद किया, उसकी मशीनें और तकनीक अब महाराष्ट्र के रत्नागिरी (लोटे परशुराम) में स्थापित हो चुकी हैं।
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खतरा: ‘Forever Chemicals’ (PFAS) अब पश्चिमी घाट और अरब सागर के मुहाने पर हैं, जिससे अल्फांसो आम और मछली उद्योग पर संकट गहरा गया है।
1. इटली का ‘दुःस्वप्न’: मिटेनी और 53 साल का जहर
इटली के विसेंजा प्रांत में स्थित Miteni S.p.A. फैक्ट्री ने 1965 से 2018 के बीच PFAS (Per- and Polyfluoroalkyl Substances) का उत्पादन किया। ये ऐसे केमिकल्स हैं जो कभी नष्ट नहीं होते।
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क्या हुआ था: फैक्ट्री ने दशकों तक PFAS युक्त पानी को स्थानीय नदियों और जमीन के नीचे (Groundwater) में छोडा।
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नुकसान: 3,50,000 लोग प्रभावित हुए। 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, किडनी और टेस्टिकुलर कैंसर के मामलों में 30-50% की वृद्धि हुई। अनुमानित 4,000 से अधिक मौतें सीधे तौर पर इस प्रदूषण से जुड़ी पाई गईं।
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2025 का ऐतिहासिक फैसला: जून 2025 में इटली की अदालत ने कंपनी के CEO और अन्य अधिकारियों को “मास मर्डर” (सामूहिक हत्या) के समान लापरवाही के लिए दोषी ठहराया और भारी जुर्माना लगाया।
2. भारत की ‘जानलेवा’ गलती: मौत का सौदा
जब यूरोप और अमेरिका ने मिटेनी को छूने से भी मना कर दिया, तब भारतीय कंपनी Laxmi Organic Industries Ltd. ने 2018-2020 के बीच इस दिवालिया कंपनी की तकनीक और मशीनरी खरीद ली।
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सौदा: लगभग 300 कंटेनरों में भरकर यह ‘जहरीली तकनीक’ और मशीनें भारत लाई गईं।
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स्थान: लोटे परशुराम, रत्नागिरी (महाराष्ट्र)।
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क्यों है यह चिंताजनक? भारत में PFAS को लेकर कोई सख्त कानून (Regulations) नहीं हैं। जिस तकनीक को इटली ने बैन किया, वह अब बिना किसी रोक-तोक के भारत में चल रही है।
3. विज्ञान: आखिर क्या है PFAS (Forever Chemicals)?
PFAS को “फॉरएवर केमिकल्स” कहा जाता है क्योंकि इनका Carbon-Fluorine (C-F) बॉन्ड ऑर्गेनिक केमिस्ट्री का सबसे मजबूत बॉन्ड होता है।
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गुण: यह न पानी से गलता है, न धूप से, और न ही बैक्टीरिया इसे नष्ट कर सकते हैं। यह प्रकृति में 1,000 साल तक रह सकता है।
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उपयोग: नॉन-स्टिक पैन (Teflon), वॉटरप्रूफ कपड़े, और फायर फाइटिंग फोम।
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शरीर पर असर: यह हमारे खून में जमा होता है और बाहर नहीं निकलता।
स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Impact):
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कैंसर: किडनी, टेस्टिकुलर और लिवर कैंसर का खतरा दोगुना।
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प्रजनन क्षमता: पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होना और महिलाओं में इनफर्टिलिटी।
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बच्चों का विकास: कम आईक्यू (Low IQ), ADHD और जन्म के समय कम वजन।
4. रत्नागिरी और पश्चिमी घाट: एक बड़ा विनाश इंतज़ार कर रहा है
लोटे परशुराम इंडस्ट्रियल एरिया की लोकेशन इस प्रोजेक्ट को और भी खतरनाक बनाती है:
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पश्चिमी घाट (Western Ghats): यह फैक्ट्री यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट से मात्र 15 किमी दूर है। यहाँ का इकोसिस्टम बेहद संवेदनशील है।
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अल्फांसो आम: रत्नागिरी का विश्व प्रसिद्ध हापुस (Alphonso) आम इसी क्षेत्र में उगता है। अगर भूजल (Groundwater) में PFAS मिला, तो यह आमों में जाएगा, जिससे निर्यात बंद हो सकता है और स्वास्थ्य संकट पैदा होगा।
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मत्स्य पालन: अरब सागर केवल 8 किमी दूर है। केमिकल डिस्चार्ज सीधे समुद्र में जाने से मछलियों में जहर फैलेगा, जिससे हजारों मछुआरों की आजीविका खत्म हो सकती है।
5. सिस्टम की विफलता: कानून की कमी और भ्रष्टाचार
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने में भारी अनियमितताएं बरती गईं:
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EIA रिपोर्ट में हेराफेरी: पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट में ‘PFAS’ शब्द का जिक्र तक नहीं किया गया, जबकि यह फैक्ट्री का मुख्य उत्पाद है।
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जनसुनवाई (Public Hearing): स्थानीय विरोध को दबा दिया गया और कथित तौर पर पैसे देकर फर्जी समर्थन दिखाया गया।
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भारत के नियम: भारत के पानी के मानकों (BIS) में अभी तक PFAS की कोई जांच अनिवार्य नहीं है। इसका फायदा उठाकर यह जहर कानूनी तौर पर नदियों में घोला जा सकता है।
6. भविष्य की चेतावनी: क्या हम दूसरे ‘भोपाल’ की ओर बढ़ रहे हैं?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2028 से 2032 के बीच रत्नागिरी के भूजल में यह जहर पूरी तरह फैल जाएगा।
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जब तक कैंसर के मामले सामने आएंगे (2035-40), तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
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इटली के पास सफाई के लिए 500 मिलियन यूरो का बजट है, लेकिन क्या भारत सरकार रत्नागिरी की सफाई के लिए 10,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी?
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निष्कर्ष और अपील
यह केवल एक फैक्ट्री का मामला नहीं है, यह 3.5 लाख से अधिक लोगों के जीवन, पश्चिमी घाट की जैव-विविधता और हमारी आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य का सवाल है। इटली ने गलती सुधारी, लेकिन भारत उसी गलती को दोहरा रहा है।
जनहित में जारी: सरकार को तुरंत PFAS पर सख्त कानून बनाने चाहिए और लोटे परशुराम में चल रहे इस प्रोजेक्ट की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।
(नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों और इटली के कोर्ट के फैसले पर आधारित है। सभी तथ्य जनहित में प्रस्तुत किए गए हैं।)
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