AI से Fake Profile पहचानें: Social Media पर Scammer को रंगे हाथों कैसे पकड़ें
क्या आपके पास भी कभी किसी अनजान ‘खूबसूरत’ या ‘प्रोफेशनल’ दिखने वाले इंसान का फ्रेंड रिक्वेस्ट आया है? मैंने अपने 10 साल के करियर में ऐसे हज़ारों अकाउंट्स देखे हैं। शुरुआत में सब कुछ एकदम असली लगता है। लेकिन पर्दे के पीछे की सच्चाई कुछ और ही होती है।
अगर आप यह जानना चाहते हैं कि AI से Fake Profile पहचानें — Social Media पर Scammer कैसे पकड़ें, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं।
मैंने अपने शुरुआती दिनों में एक गलती की थी। एक ‘इन्वेस्टमेंट गुरु’ पर भरोसा कर लिया था जिसका प्रोफाइल बहुत शानदार था। बाद में पता चला कि वह इंसान असल दुनिया में मौजूद ही नहीं था! वह पूरी तरह से AI द्वारा बनाया गया एक रोबोटिक चेहरा था। यह सुनकर शायद आपको अजीब लगे, लेकिन आज के समय में यह बहुत आम हो गया है।
स्कैमर्स अब बहुत स्मार्ट हो गए हैं। वे इंटरनेट से पुरानी तस्वीरें चुराने के बजाय AI टूल्स का इस्तेमाल करके ऐसे चेहरे बनाते हैं जो दुनिया में कहीं हैं ही नहीं। ऐसे में उन्हें पकड़ना आम इंसान के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है।
लेकिन घबराइए मत। मैंने पिछले कुछ सालों में 50 से ज्यादा साइबर फ्रॉड के मामलों को करीब से देखा है। मैं आपको वह सब कुछ बताने वाला हूँ जो मैंने सीखा है। आपको कोई टेक्निकल एक्सपर्ट होने की ज़रूरत नहीं है। बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना है।
इस गाइड में, मैं आपके साथ कोई किताबी ज्ञान शेयर नहीं करूँगा। मैं आपको वह प्रैक्टिकल तरीके बताऊंगा जिन्हें मैं खुद रोज़ाना इस्तेमाल करता हूँ। तो चलिए, बिना किसी देरी के शुरू करते हैं और सीखते हैं कि इन स्कैमर्स के जाल से खुद को और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखा जाए।
AI और Fake Profiles का बढ़ता खतरा
कुछ महीने पहले की बात है। मेरी एक दोस्त प्रिया (नाम बदला हुआ है) को इंस्टाग्राम पर एक मैसेज आया। मैसेज भेजने वाला एक ‘डॉक्टर’ था जो लंदन में रहता था। उसकी प्रोफाइल एकदम परफेक्ट थी। हाई-क्वालिटी फोटोज़, जानवरों के साथ खेलते हुए वीडियोज़ और एक बहुत ही समझदार बायो।
प्रिया को लगा कि उसे एक अच्छा दोस्त मिल गया है। करीब 20 दिन तक उनकी रोज़ बात हुई। फिर एक दिन उस ‘डॉक्टर’ ने कहा कि वह भारत आ रहा है और उसने प्रिया के लिए एक महंगा गिफ्ट भेजा है जो कस्टम विभाग में फंस गया है। उसे छुड़ाने के लिए 50,000 रुपये चाहिए थे।
मैंने जब उस प्रोफाइल की जांच की, तो मेरे होश उड़ गए। वह पूरा का पूरा अकाउंट एक स्कैम था और उसकी सारी तस्वीरें AI से जनरेट की गई थीं।
Scammers AI का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं?
आज से कुछ साल पहले तक, स्कैमर्स गूगल से किसी की भी तस्वीर डाउनलोड करते थे और एक फेक आईडी बना लेते थे। उसे पकड़ना बहुत आसान था। आप बस वह फोटो गूगल पर डालते और असली इंसान का पता चल जाता। लेकिन अब खेल बदल गया है।
स्कैमर्स अब ‘This Person Does Not Exist’ जैसी वेबसाइट्स और Midjourney जैसे AI इमेज जनरेटर का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब यह है कि जो तस्वीर आप देख रहे हैं, वह दुनिया के किसी भी इंसान की नहीं है।
क्या आपको समझ आ रहा है कि यह कितना खतरनाक है?
जब वह चेहरा कभी था ही नहीं, तो गूगल इमेज सर्च उसे कभी ढूंढ ही नहीं पाएगा। मैंने खुद टेस्ट करके देखा है। एक नया फेक चेहरा बनाने में सिर्फ 5 सेकंड लगते हैं। स्कैमर्स इसी तकनीक का फायदा उठाकर हज़ारों फेक प्रोफाइल्स एक साथ बना रहे हैं। वे अलग-अलग नाम, अलग-अलग शहर और अलग-अलग कहानियों के साथ लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।
Real Talk: सच्चाई यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स खुद भी इन AI प्रोफाइल्स को ब्लॉक करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। उनका सिस्टम इतना तेज़ नहीं है कि रोज़ बनने वाले लाखों फेक अकाउंट्स को रोक सके। इसलिए, अपनी सुरक्षा अब पूरी तरह से आपके अपने हाथों में है।
Fake ID से होने वाले नुकसान (Real Data)
शायद आप सोचें कि एक फेक प्रोफाइल आपका क्या ही बिगाड़ लेगी? अगर आपको ऐसा लगता है, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं।
सिर्फ पिछले साल, साइबर फ्रॉड के मामलों में 65 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। और इनमें से सबसे ज्यादा मामले सोशल मीडिया फेक प्रोफाइल्स से जुड़े थे। नुकसान सिर्फ पैसों का नहीं होता, यह आपकी मानसिक शांति भी छीन लेता है।
चलिए मैं आपको बताता हूँ कि ये स्कैमर्स किस तरह से लोगों को बर्बाद करते हैं:
रोमांस स्कैम (Romance Scams): जैसा प्रिया के साथ हुआ। ये लोग प्यार का नाटक करते हैं, आपका भरोसा जीतते हैं और फिर अचानक किसी ‘इमरजेंसी’ के नाम पर पैसे मांग लेते हैं। कई लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई इनमें लुटा देते हैं।
क्रिप्टो या इन्वेस्टमेंट स्कैम: राहुल नाम का एक स्टूडेंट ऐसे ही एक फेक प्रोफाइल के झांसे में आ गया था। उस अकाउंट पर रोज़ महंगी गाड़ियों और प्रॉफिट के स्क्रीनशॉट आते थे। राहुल ने अपने कॉलेज की फीस के 30,000 रुपये लगा दिए और अगले ही दिन वह अकाउंट डिलीट हो गया।
पहचान की चोरी (Identity Theft): कई बार वे आपकी तस्वीरों और जानकारी का इस्तेमाल करके आपके नाम से फेक आईडी बनाते हैं। फिर वे आपके दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसे मांगते हैं। इससे आपकी इज्जत मिट्टी में मिल जाती है।
यह कोई छोटी समस्या नहीं है। यह एक पूरी इंडस्ट्री बन चुकी है जहाँ लाखों लोग रोज़ाना ठगे जा रहे हैं।
AI Generated Photos की पहचान कैसे करें?
अब सबसे बड़ा सवाल। अगर AI की बनाई तस्वीरें इतनी ही असली लगती हैं, तो हम उन्हें पहचानें कैसे?
मेरा अनुभव कहता है कि कोई भी AI टूल 100 प्रतिशत परफेक्ट नहीं होता। मशीन आखिर मशीन है, और वह कुछ ऐसी गलतियां छोड़ देती है जो इंसानी आंखें आसानी से पकड़ सकती हैं। आपको बस यह पता होना चाहिए कि देखना कहाँ है।
जब भी मुझे किसी प्रोफाइल पर शक होता है, तो मैं सीधा उसकी डीपी (Profile Picture) को ज़ूम करता हूँ। मैं उस इंसान के चेहरे को नहीं, बल्कि उसके शरीर के छोटे हिस्सों और बैकग्राउंड को देखता हूँ।
उंगलियों, दांतों और आंखों की गलतियां (AI के सबसे बड़े दुश्मन)
AI के लिए इंसान का चेहरा बनाना आसान है, लेकिन हाथ और उंगलियां बनाना उसके लिए एक बुरा सपना है। मैंने सैकड़ों AI तस्वीरें देखी हैं, और 90 प्रतिशत मामलों में हाथ अजीब होते हैं।
अगर आपको किसी प्रोफाइल पिक्चर में व्यक्ति के हाथ दिख रहे हैं, तो सबसे पहले उंगलियां गिनें। क्या वहाँ पांच उंगलियां हैं? क्या कोई उंगली दूसरी उंगली के अंदर जा रही है? क्या उंगलियों की लंबाई अजीब लग रही है? अगर हाँ, तो वह प्रोफाइल 100 प्रतिशत फेक है।
इसके बाद दांतों पर ध्यान दें। हम इंसानों के दांतों का एक खास अलाइनमेंट होता है। लेकिन AI अक्सर बहुत सारे दांत बना देता है जो एक-दूसरे में घुसे हुए लगते हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी शार्क के दांत हों।
आंखों की पुतलियां (Pupils) भी एक बहुत बड़ा सबूत होती हैं। प्राकृतिक रूप से हमारी दोनों आंखों की पुतलियां गोल और एक ही दिशा में होती हैं। AI जनरेटेड तस्वीरों में अक्सर एक पुतली का आकार दूसरी से अलग होता है, या वे एकदम अजीब आकार (जैसे अंडाकार) की होती हैं।
Pro Tip: चश्मे के फ्रेम पर हमेशा ध्यान दें। AI अक्सर चश्मे की डंडी को कान के ऊपर ले जाने के बजाय सीधे गाल के अंदर गायब कर देता है। मैंने पिछले हफ्ते ही एक ऐसे ‘सीईओ’ का अकाउंट पकड़ा था जिसका चश्मा सीधे उसकी त्वचा में घुल रहा था!
Background और Lighting का धोखा
ज्यादातर लोग सिर्फ चेहरे पर फोकस करते हैं और बैकग्राउंड को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है।
AI मुख्य सब्जेक्ट (इंसान) पर तो बहुत मेहनत करता है, लेकिन बैकग्राउंड बनाते समय वह अक्सर कंफ्यूज हो जाता है। तस्वीर के पीछे की चीजों को ध्यान से देखें।
टेक्स्ट और बोर्ड: क्या बैकग्राउंड में कोई दुकान का बोर्ड या टी-शर्ट पर कुछ लिखा है? AI अभी तक सही स्पेलिंग नहीं लिख पाता। वह अक्सर अजीब से सिंबल या ऐसी भाषा लिखता है जो दुनिया में कहीं मौजूद नहीं है। अगर पीछे कोई साइनबोर्ड है और उसके अक्षर जलेबी की तरह घूमे हुए हैं, तो तुरंत समझ जाइए।
अजीबोगरीब चीजें: मैंने एक तस्वीर देखी थी जिसमें पीछे खड़ा एक आदमी आधा हवा में उड़ रहा था और उसका सिर था ही नहीं। AI बैकग्राउंड के लोगों के साथ बहुत खिलवाड़ करता है।
लाइट और शैडो (Lighting & Shadows): यह थोड़ा एडवांस तरीका है, लेकिन बहुत काम का है। देखें कि रोशनी कहाँ से आ रही है। अगर चेहरे के दाईं तरफ रोशनी पड़ रही है, तो परछाई बाईं तरफ बननी चाहिए। AI तस्वीरों में अक्सर रोशनी हर तरफ से आती है और कोई साफ परछाई नहीं बनती।
यह सब ढूंढने में शुरू में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन एक बार आपको इसकी आदत हो गई, तो आप एक सेकंड में असली और नकली का फर्क बता देंगे।
Social Media पर Scammer को पकड़ने के Technical तरीके
आंखों से देखना तो पहला कदम है। लेकिन कई बार स्कैमर्स इतनी अच्छी क्वालिटी की तस्वीरें इस्तेमाल करते हैं कि आंखों से कुछ भी पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
यहीं पर टेक्निकल तरीके काम आते हैं। मैं जब भी किसी ब्रांड या क्लाइंट का सोशल मीडिया ऑडिट करता हूँ, तो मैं इन टूल्स पर बहुत ज्यादा निर्भर रहता हूँ। ये तरीके कभी झूठ नहीं बोलते। डेटा हमेशा सच्चाई बयां कर देता है।
अगर कोई अनजान व्यक्ति आपको अचानक से मैसेज करता है और आपको कुछ भी अजीब लगता है, तो तुरंत ये दो टेक्निकल स्टेप्स फॉलो करें।
Reverse Image Search का सही इस्तेमाल
यह इंटरनेट पर किसी भी फोटो की कुंडली निकालने का सबसे बेहतरीन और फ्री तरीका है। बहुत से लोगों को इसके बारे में पता है, लेकिन वे इसका सही इस्तेमाल नहीं करते।
इसे कैसे करना है:
उस व्यक्ति की प्रोफाइल पिक्चर या कोई भी पोस्ट की हुई फोटो डाउनलोड करें (या स्क्रीनशॉट लें)।
अब Google Images (images.google.com) पर जाएं या अपने फोन में Google Lens ऐप खोलें।
उस फोटो को अपलोड करें और सर्च करें।
अब जादू देखिए। अगर वह इंसान एक स्कैमर है और उसने वह फोटो इंटरनेट से कहीं से चुराई है, तो गूगल आपको बता देगा कि वह तस्वीर असल में किसकी है।
Common Mistake: ज्यादातर लोग सिर्फ गूगल का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि आपको ‘TinEye’ (tineye.com) या ‘Yandex’ का भी इस्तेमाल करना चाहिए। Yandex एक रशियन सर्च इंजन है जिसका फेशियल रिकग्निशन सिस्टम गूगल से भी ज्यादा खतरनाक और सटीक है। मैंने ऐसे कई स्कैमर्स को Yandex की मदद से पकड़ा है जिन्हें गूगल ढूंढ नहीं पाया था।
अगर वह तस्वीर AI से बनी है, तो शायद आपको सटीक मैच न मिले। लेकिन आपको उसी तरह की बहुत सी AI जनरेटेड तस्वीरें मिल जाएंगी, जो खुद में एक बहुत बड़ा रेड फ्लैग है।
Account Creation Date और Follower Ratio का सच
अकाउंट कब बना और उसके फॉलोअर्स कैसे हैं, यह डेटा स्कैमर की चीख-चीख कर गवाही देता है। मैं कभी भी किसी नए अकाउंट पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करता।
अगर कोई व्यक्ति खुद को ’10 साल के अनुभव वाला टॉप इन्वेस्टर’ बता रहा है, लेकिन उसका इंस्टाग्राम अकाउंट सिर्फ 2 हफ्ते पहले बना है, तो दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है।
इन तीन चीज़ों को हमेशा चेक करें:
Username Changes: इंस्टाग्राम पर आप किसी भी प्रोफाइल के दाईं ओर तीन डॉट्स पर क्लिक करके ‘About this account’ में जा सकते हैं। वहां देखें कि उसने कितनी बार अपना यूजरनेम बदला है। अगर एक ही महीने में उसने 5 बार नाम बदला है, तो वह 100 प्रतिशत स्कैमर है जो अलग-अलग नाम से लोगों को ठग रहा है।
Follower to Following Ratio: क्या उसके 5,000 फॉलोअर्स हैं लेकिन उसने सिर्फ 2 लोगों को फॉलो किया है? या फिर वह 10,000 लोगों को फॉलो कर रहा है और उसके सिर्फ 50 फॉलोअर्स हैं? ये दोनों ही स्थितियां बताती हैं कि उसने फेक फॉलोअर्स खरीदे हैं या बॉट अकाउंट का इस्तेमाल कर रहा है।
Comments Section: उसकी फोटोज़ पर कमेंट्स पढ़ें। असली इंसान की फोटो पर उसके दोस्त मज़ाक करते हैं या बात करते हैं। फेक प्रोफाइल पर आपको सिर्फ फायर इमोजी (🔥) या “Nice pic” जैसे बॉट जनरेटेड कमेंट्स मिलेंगे।
Quick Win: अगर आपको फेसबुक पर कोई प्रोफाइल चेक करनी है, तो उस प्रोफाइल का URL (लिंक) देखें। कई बार स्कैमर अपना नाम बदल लेता है, लेकिन लिंक में पुराना नाम ही रह जाता है। जैसे नाम होगा “Pooja Sharma” लेकिन लिंक होगा facebook.com/michael.smith.45 — यह स्कैमर को पकड़ने का सबसे आसान तरीका है जो आज भी बहुत काम आता है।
4. Chatting के दौरान Scammer की पहचान (Red Flags)
तस्वीरें और प्रोफाइल चेक करने के बाद, अगला सबसे बड़ा टेस्ट तब शुरू होता है जब आप चैट करना शुरू करते हैं। मैंने अपने 10 साल के करियर में एक पैटर्न नोटिस किया है। चाहे स्कैमर कितना भी स्मार्ट क्यों न हो, वह मैसेजिंग में कुछ ऐसी गलतियां ज़रूर करता है जो उसे बेनकाब कर देती हैं।
जब मैं साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों से बात करता हूँ, तो मुझे हर कहानी में एक जैसी स्क्रिप्ट नज़र आती है। स्कैमर्स की चैट करने की टाइमिंग, उनके शब्दों का चुनाव और उनका बर्ताव हमेशा एक ही दिशा में जाता है।
अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन मिला है और आपसे मीठी-मीठी बातें कर रहा है, तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए। AI से Fake Profile पहचानें — Social Media पर Scammer कैसे पकड़ें, इस पूरी प्रक्रिया में चैटिंग के पैटर्न को समझना सबसे बड़ा हथियार है।
बातचीत का तरीका और पैसों की डिमांड
क्या आपने कभी नोटिस किया है कि कुछ लोग बहुत अजीब तरह से मैसेज करते हैं? उनका ग्रामर (Grammar) एकदम किताबी होता है, या फिर उनकी हिंदी/अंग्रेजी ऐसी होती है जैसे किसी ने गूगल ट्रांसलेट का इस्तेमाल किया हो। यह पहला बड़ा रेड फ्लैग है।
स्कैमर्स अक्सर नाइजीरिया या किसी अन्य देश में बैठे होते हैं। वे आपके मैसेजेस को ट्रांसलेट करते हैं और फिर रिप्लाई करते हैं। यही कारण है कि उनकी बातों में कोई नेचुरल फ्लो नहीं होता।
इन बातों पर हमेशा गौर करें:
रटी-रटाई स्क्रिप्ट: अगर आप उनसे कोई अलग सा सवाल पूछें, तो वे उसका सीधा जवाब देने के बजाय बात को घुमा देते हैं। ऐसा लगता है जैसे वे किसी लिखी हुई स्क्रिप्ट को कॉपी-पेस्ट कर रहे हों।
जल्दबाज़ी में WhatsApp मांगना: ये लोग इंस्टाग्राम या फेसबुक पर ज्यादा दिन बात नहीं करना चाहते। वे 2-4 दिन में ही कहेंगे, “मैं यहाँ ज्यादा एक्टिव नहीं हूँ, क्या हम WhatsApp पर बात कर सकते हैं?” ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सोशल मीडिया साइट्स उनके फेक अकाउंट को कभी भी ब्लॉक कर सकती हैं।
पैसों की एंट्री: यह सबसे अहम हिस्सा है। चाहे 10 दिन लगें या 2 महीने, बात घूम-फिरकर पैसों पर आ ही जाएगी। कोई कस्टम टैक्स, कोई मेडिकल इमरजेंसी या कोई शानदार इन्वेस्टमेंट का ऑफर।
मेरे एक क्लाइंट, रोहन (जो एक छोटे बिज़नेस ओनर हैं) को एक ‘विदेशी इन्वेस्टर’ का मैसेज आया। उसने सिर्फ 5 दिन की बातचीत में रोहन से ‘प्रोजेक्ट फीस’ के नाम पर 2 लाख रुपये मांग लिए। रोहन ने समझदारी दिखाई और मुझे बताया। हमने जब उस नंबर की जांच की, तो पता चला कि वह वर्चुअल नंबर था जो इंटरनेट से खरीदा गया था।
Common Mistake: बहुत से लोग सोचते हैं कि “मैं तो सिर्फ बात कर रहा हूँ, मुझे कौन ठग सकता है।” यही सबसे बड़ी गलती है। बातों-बातों में ये लोग आपकी बहुत सी पर्सनल जानकारी निकाल लेते हैं जिसका इस्तेमाल बाद में आपको ब्लैकमेल करने के लिए होता है।
Love Bombing और Sympathy Card
स्कैमर्स इंसान की भावनाओं के साथ खेलना बहुत अच्छे से जानते हैं। वे दो मुख्य हथियारों का इस्तेमाल करते हैं: प्यार और दया। मैंने जितने भी रोमांस स्कैम देखे हैं, उन सबमें ‘Love Bombing’ का इस्तेमाल हुआ था।
Love Bombing का मतलब है कि कोई अनजान व्यक्ति कुछ ही दिनों में आप पर प्यार और तारीफों की बारिश कर दे। वे आपको बताएंगे कि आप दुनिया के सबसे खास इंसान हैं। वे ‘Soulmate’ और ‘Destiny’ जैसे भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल करेंगे।
ज़रा खुद सोचिए। क्या असली दुनिया में कोई इंसान 3 दिन की चैटिंग में किसी से पागलों की तरह प्यार कर सकता है? नहीं। यह सिर्फ आपका भरोसा जीतने की एक चाल है।
इसके बाद आता है Sympathy Card (सहानुभूति)। जब उन्हें लगेगा कि आप उन पर पूरा भरोसा करने लगे हैं, तो अचानक उनकी जिंदगी में कोई ‘त्रासदी’ आ जाएगी।
“मेरा एक्सीडेंट हो गया है और मेरा बैंक कार्ड काम नहीं कर रहा।”
“मेरी माँ अस्पताल में है और मुझे तुरंत सर्जरी के लिए कुछ पैसों की ज़रूरत है।”
“मैं एयरपोर्ट पर फँस गया हूँ, बस 10 हज़ार रुपये भेज दो, मैं कल वापस कर दूंगा।”
सच्चाई जो ज्यादातर गाइड्स आपको नहीं बताएंगे, वह यह है कि ये कहानियां इतनी असली लगती हैं कि अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे लोग भी पिघल जाते हैं। वे रोने वाले वॉयस नोट तक भेज देते हैं। लेकिन याद रखें, अगर आपने किसी को सामने से नहीं देखा है, तो एक रुपया भी भेजना बेवकूफी है।
5. Deepfake Video Call Scams से कैसे बचें?
अब बात करते हैं उस खतरे की जो आज के समय में सबसे ज्यादा डरावना है: Deepfake Video Call। कुछ साल पहले तक, मैं लोगों से कहता था कि “अगर शक हो, तो वीडियो कॉल कर लो, सच्चाई सामने आ जाएगी।” अब मैं ऐसा नहीं कह सकता।
गेम पूरी तरह से बदल चुका है। स्कैमर्स अब AI टूल्स का इस्तेमाल करके रियल-टाइम वीडियो कॉल में किसी और का चेहरा लगा लेते हैं। वे पुलिस वाले, सीबीआई ऑफिसर, या यहाँ तक कि आपके किसी दोस्त या बॉस का चेहरा लगाकर आपको वीडियो कॉल कर सकते हैं।
पिछले 6 महीनों में, वीडियो कॉल फ्रॉड के मामलों में 400 प्रतिशत का उछाल आया है। यह आंकड़ा डराने वाला है, है ना? लेकिन अगर आप ध्यान से देखें, तो इन डीपफेक कॉल्स को पकड़ना उतना भी मुश्किल नहीं है।
Video Call में AI Glitches कैसे पकड़ें
डीपफेक टेक्नोलॉजी अभी भी 100 प्रतिशत परफेक्ट नहीं हुई है, खासकर लाइव वीडियो कॉल में। जब कोई इंसान कैमरे के सामने हिलता है, तो AI को उस नए एंगल पर चेहरा सेट करने में कुछ मिलीसेकंड का समय लगता है। बस यही वह समय है जब आपको स्कैमर को पकड़ना है।
मेरे एक दोस्त संजय को हाल ही में उसके ‘बॉस’ का वीडियो कॉल आया। वह इंसान हुबहू संजय के बॉस जैसा दिख रहा था और उसकी आवाज़ भी वैसी ही थी। उसने संजय को कंपनी के एक अकाउंट में तुरंत 50 हज़ार ट्रांसफर करने को कहा।
संजय ने मेरी बताई हुई एक ट्रिक आज़माई और वह स्कैम पकड़ा गया।
वीडियो कॉल में इन चीज़ों पर नज़र रखें:
चेहरे के किनारे (Edges of the Face): जहां चेहरा खत्म होता है और बाल या बैकग्राउंड शुरू होता है, वहाँ ध्यान दें। डीपफेक में अक्सर इन किनारों पर धुंधलापन (Blurriness) होता है। ऐसा लगता है जैसे किसी ने चेहरे पर कोई डिजिटल मास्क पहना हो।
आंखें झपकाना (Blinking): AI जनरेटेड चेहरे अक्सर बहुत कम आंखें झपकाते हैं, या फिर उनके झपकाने का तरीका बहुत रोबोटिक होता है।
मुंह और आवाज़ का तालमेल (Lip Sync): क्या होंठों की हरकत और आवाज़ एकदम मैच हो रही है? अक्सर नेटवर्क अच्छा होने के बावजूद डीपफेक कॉल में लिप-सिंक खराब होता है।
Quick Win: अगर आपको कभी भी वीडियो कॉल पर शक हो, तो सामने वाले से कहें कि वह अपना चेहरा दाएँ से बाएँ घुमाए, या अपना हाथ अपने चेहरे के सामने से गुजारे। जब कोई हाथ चेहरे के सामने आता है, तो AI फिल्टर अक्सर टूट जाता है या बुरी तरह ग्लिच करता है। आपको असली स्कैमर का चेहरा एक सेकंड के लिए दिख जाएगा।
स्कैमर्स के बहाने और आपका डिफेंस
स्कैमर्स को पता होता है कि उनका डीपफेक फिल्टर टूट सकता है। इसलिए वे वीडियो कॉल को बहुत छोटा रखते हैं। वे कभी भी आपसे 10 मिनट लंबी बात नहीं करेंगे।
उनका पूरा फोकस आप पर प्रेशर बनाने में होता है।
वे कुछ इस तरह के बहाने बनाते हैं:
“मेरा कैमरा खराब है, इसलिए क्वालिटी थोड़ी खराब आ रही है।”
“मैं अभी सफर में हूँ, नेटवर्क बहुत वीक है।”
“कमरे में लाइट नहीं है।” (वे अक्सर अंधेरे में कॉल करते हैं ताकि AI के ग्लिच न दिखें)।
ऐसे मामलों में आपका सबसे बड़ा डिफेंस है: शांत रहना। ये लोग आपके अंदर डर या इमरजेंसी पैदा करना चाहते हैं।
अगर कोई पुलिस की वर्दी में आपको कॉल करे और कहे कि आपके नाम पर कोई पार्सल पकड़ा गया है (जो आजकल का सबसे आम ‘Digital Arrest’ स्कैम है), तो घबराएं नहीं। उनसे उनका आईडी कार्ड दिखाने को कहें। उनसे कहें कि वे अपने चेहरे के सामने एक पेन या उंगली घुमाएं।
अगर वह असली इंसान होगा, तो वह आपकी बात मान लेगा। लेकिन अगर वह स्कैमर है, तो वह गुस्सा करने लगेगा और कॉल काट देगा। ऑन द स्पॉट चेक करने से बेहतर कोई दूसरा तरीका काम नहीं करता।
6. Instagram, Facebook और LinkedIn पर Fake Profile Report कैसे करें?
हमने स्कैमर को पहचानना तो सीख लिया, लेकिन सिर्फ ब्लॉक कर देना काफी नहीं है। अगर आप उसे सिर्फ ब्लॉक करते हैं, तो वह कल किसी और को अपना शिकार बनाएगा। मेरी हमेशा यही सलाह रहती है कि इस कचरे को इंटरनेट से साफ करने में अपना योगदान दें।
मुझसे अक्सर लोग पूछते हैं कि “मैंने अकाउंट रिपोर्ट किया था, लेकिन इंस्टाग्राम ने कोई एक्शन नहीं लिया, ऐसा क्यों?”
इसका जवाब बहुत सीधा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रोज़ करोड़ों रिपोर्ट्स मिलती हैं। अगर आप सही तरीके से और सही कारण के साथ रिपोर्ट नहीं करेंगे, तो आपका सबमिशन किसी कंप्यूटर बॉट द्वारा रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
सही तरीके से रिपोर्ट करने का प्रोसेस
रिपोर्ट बटन दबाना एक कला है। आपको प्लेटफॉर्म को यह समझाना होता है कि यह अकाउंट उनकी कम्युनिटी गाइडलाइंस के खिलाफ क्यों है।
नेहा नाम की एक कॉलेज स्टूडेंट की तस्वीरें चुराकर किसी ने एक फेक प्रोफाइल बना ली थी। नेहा ने 10 बार रिपोर्ट किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जब मैंने उसकी मदद की, तो 24 घंटे के अंदर वह अकाउंट डिलीट हो गया।
यहाँ वह सही तरीका है जो असल में काम करता है:
Instagram पर रिपोर्ट करना: * प्रोफाइल पर जाएं, तीन डॉट्स पर क्लिक करें और ‘Report’ चुनें।
‘Report Account’ पर जाएं और ‘It’s pretending to be someone else’ चुनें।
अगर उसने आपकी फोटो लगाई है, तो ‘Me’ चुनें। अगर किसी सेलिब्रिटी की है, तो ‘A celebrity or public figure’ चुनें।
सबसे अहम बात: अपने 10-15 दोस्तों से भी उसी अकाउंट को सेम रीज़न के साथ रिपोर्ट करवाएं। जब सिस्टम को एक साथ कई रिपोर्ट्स मिलती हैं, तो एक असली इंसान (ह्यूमन मॉडरेटर) उस अकाउंट को चेक करता है।
Facebook पर रिपोर्ट करना: * फेसबुक पर ‘Fake Account’ या ‘Fake Name’ का विकल्प होता है।
फेसबुक पर अगर आप उस असली इंसान की प्रोफाइल का लिंक दे सकें जिसकी फोटो चुराई गई है, तो एक्शन बहुत जल्दी होता है।
LinkedIn पर प्रोफेशनल स्कैमर्स: * लिंक्डइन पर लोग ‘HR’ या ‘Recruiter’ बनकर जॉब स्कैम करते हैं।
यहाँ रिपोर्ट करते समय ‘Scam, phishing or malware’ का ऑप्शन चुनें।
लिंक्डइन इन चीज़ों को लेकर बहुत सख्त है और अक्सर ऐसे अकाउंट्स को तुरंत हटा देता है।
Pro Tip: कभी भी किसी स्कैमर से बहस न करें या उसे यह न बताएं कि आप उसे रिपोर्ट करने वाले हैं। ऐसा करने पर वह तुरंत आपको ब्लॉक कर देगा या अपना अकाउंट टेम्परेरी डिसेबल कर लेगा, जिससे आप उसे रिपोर्ट ही नहीं कर पाएंगे। चुपचाप सबूत (स्क्रीनशॉट्स) जमा करें और रिपोर्ट ठोक दें।
Cyber Crime Cell में शिकायत कब करें?
सोशल मीडिया पर रिपोर्ट करना तो ठीक है, लेकिन हर मामला सिर्फ ऐप तक सीमित नहीं रहता। कई बार बात बहुत आगे बढ़ जाती है।
एक बात जो मैं हर सेमिनार में कहता हूँ: अगर आपका एक भी रुपया गया है, या अगर आपको कोई ब्लैकमेल कर रहा है, तो सीधे पुलिस के पास जाएं। खुद से हीरो बनने की कोशिश न करें।
भारत में साइबर क्राइम को रिपोर्ट करना अब बहुत आसान हो गया है। आपको पुलिस स्टेशन के धक्के खाने की ज़रूरत नहीं है।
यहाँ आपको क्या करना चाहिए:
1930 Helpline: अगर आपके बैंक अकाउंट से पैसे कट गए हैं, तो बिना एक सेकंड बर्बाद किए 1930 पर कॉल करें। यह नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन है। अगर आप 2 से 3 घंटे के अंदर कॉल कर देते हैं, तो इस बात की बहुत ज्यादा संभावना है कि आपके पैसे ब्लॉक हो जाएं और स्कैमर तक न पहुंचें।
Cybercrime.gov.in: इस सरकारी वेबसाइट पर जाएं और ‘Report Other Cyber Crime’ पर क्लिक करके ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
सबूत सुरक्षित रखें: स्क्रीनशॉट लें, चैट हिस्ट्री सेव करें, बैंक के मैसेज रखें और उस फेक प्रोफाइल का URL (लिंक) कॉपी करके ज़रूर रखें।
ज़्यादातर लोग डर या शर्म की वजह से पुलिस में शिकायत नहीं करते। और यही वह चीज़ है जो स्कैमर्स को और ज्यादा ताकतवर बनाती है। अगर आप चुप बैठेंगे, तो वे जीत जाएंगे।
7. भविष्य के लिए खुद को सुरक्षित कैसे रखें?
स्कैमर्स को पकड़ना और रिपोर्ट करना तो बाद की बात है। असली जीत तो तब है जब कोई स्कैमर आप तक पहुँच ही न पाए। मैंने अपने करियर में देखा है कि 80 प्रतिशत लोग हैक होने या ठगे जाने के बाद सिक्योरिटी के बारे में सोचते हैं।
जब नुकसान हो जाता है, तब भागदौड़ करने से क्या फायदा? आपको अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को एक डिजिटल किले में बदलना होगा।
आप शायद सोचें कि “मेरी प्रोफाइल में ऐसा क्या है जो कोई चुराएगा?” लेकिन स्कैमर्स के लिए आपकी हर एक जानकारी सोने की खदान है। वे आपके नाम का इस्तेमाल करके आपके दोस्तों से लाखों रुपये ऐंठ सकते हैं। इसलिए, बचाव ही सबसे अच्छा इलाज है। मैं आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहा हूँ जिन्हें मैं खुद पिछले कई सालों से इस्तेमाल कर रहा हूँ।
Privacy Settings जिन्हें आपको अभी ऑन करना चाहिए
क्या आपने कभी अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को ध्यान से देखा है? ज़्यादातर लोग अकाउंट बनाते समय ‘Next, Next’ दबाकर आगे बढ़ जाते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी भूल होती है।
अगर आपका इंस्टाग्राम या फेसबुक अकाउंट पब्लिक है, तो आप दुनिया के हर स्कैमर को निमंत्रण दे रहे हैं। वे आपकी तस्वीरें डाउनलोड करेंगे, आपके दोस्तों की लिस्ट देखेंगे और फिर एक परफेक्ट फेक आईडी तैयार कर लेंगे।
अभी अपने फोन में ये तीन बदलाव करें:
Private Account: अपने इंस्टाग्राम को तुरंत प्राइवेट करें। फेसबुक पर अपनी ‘Profile Lock’ सेटिंग को ऑन करें। इससे कोई भी अनजान व्यक्ति आपकी फोटो का स्क्रीनशॉट नहीं ले पाएगा।
Friends Only: फेसबुक पर अपनी फ्रेंड लिस्ट को ‘Only Me’ पर सेट करें। स्कैमर्स सबसे पहले आपकी फ्रेंड लिस्ट देखते हैं ताकि वे आपके करीबियों को टारगेट कर सकें।
Two-Factor Authentication (2FA): यह सेटिंग आपकी डिजिटल लाइफ का सबसे मजबूत ताला है। माइक्रोसॉफ्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2FA ऑन करने से अकाउंट हैक होने का खतरा 99.9 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसे ऑन करने के बाद, पासवर्ड पता होने के बावजूद कोई आपके अकाउंट में बिना OTP के लॉगिन नहीं कर पाएगा।
Real Talk: मुझे पता है बार-बार OTP डालना थोड़ा परेशान करने वाला लगता है। मैं भी शुरू में इससे चिढ़ता था। लेकिन एक बार जब मेरे एक क्लाइंट का 5 लाख फॉलोअर्स वाला पेज हैक हुआ, तो मुझे समझ आया कि यह छोटी सी परेशानी कितने बड़े दर्द से बचा सकती है।
इन सेटिंग्स को बदलने में मुश्किल से 5 मिनट लगते हैं। लेकिन ये 5 मिनट आपकी सालों की मेहनत और इज्जत को बचा सकते हैं। आज ही समय निकालकर अपनी सभी एप्स की सेटिंग्स चेक करें।
अपनी तस्वीरों को चोरी होने से बचाएं
आजकल AI इतने एडवांस हो गए हैं कि आपकी सिर्फ एक तस्वीर से आपका पूरा डीपफेक वीडियो बनाया जा सकता है। यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं है, यह आज की कड़वी सच्चाई है।
इसलिए, इंटरनेट पर आप जो भी डालते हैं, उसे लेकर बहुत सावधान रहना होगा। मैंने देखा है कि लोग अपने बच्चों की, अपने घर के बाहर की और अपनी गाड़ियों की तस्वीरें बिना सोचे-समझे शेयर कर देते हैं।
अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने के कुछ स्मार्ट तरीके:
हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें न डालें: कभी भी अपनी फुल-क्वालिटी ओरिजिनल फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड न करें। फोटो को अपलोड करने से पहले थोड़ा क्रॉप करें या उस पर कोई हल्का सा फिल्टर लगा दें। AI को परफेक्ट डीपफेक बनाने के लिए एकदम साफ और हाई-क्वालिटी चेहरे की ज़रूरत होती है।
वाटरमार्क का इस्तेमाल (Watermark): अगर आप एक क्रिएटर या बिज़नेस ओनर हैं और आपका अकाउंट पब्लिक रखना मज़बूरी है, तो अपनी तस्वीरों पर हल्का सा वाटरमार्क लगाना शुरू करें। कोई भी स्कैमर वाटरमार्क वाली फोटो को इस्तेमाल करने से बचता है क्योंकि उसे एडिट करना मुश्किल होता है।
चेक-इन (Check-ins) से बचें: आप अभी कहाँ खाना खा रहे हैं या किस होटल में रुके हैं, यह दुनिया को तुरंत बताना ज़रूरी नहीं है। स्कैमर्स इस लाइव लोकेशन का इस्तेमाल आपको डराने या आपके परिवार को यह झूठ बोलने के लिए करते हैं कि आपका एक्सीडेंट हो गया है। घर वापस आने के बाद ही तस्वीरें पोस्ट करें।
Quick Win: अपने फोन के कैमरे की सेटिंग में जाकर ‘Location Tags’ को ऑफ कर दें। जब आप कोई फोटो खींचते हैं, तो बैकग्राउंड में उस फोटो के अंदर आपकी सटीक जीपीएस (GPS) लोकेशन छिप जाती है। स्कैमर्स उस छिपे हुए डेटा (EXIF Data) को निकालकर आपके घर का पता लगा सकते हैं। इसे बंद करने से आप काफी हद तक सुरक्षित हो जाते हैं।
Frequently Asked Questions:
Q1: AI जेनरेटेड फोटो और असली फोटो में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
सबसे बड़ा अंतर छोटी-छोटी डिटेल्स (Details) में होता है। असली फोटो में इंसान के हाथ, उंगलियां और दांत एकदम प्राकृतिक दिखते हैं। लेकिन AI अभी भी हाथ बनाने में संघर्ष करता है। अगर आप AI से बनी किसी फेक प्रोफाइल की फोटो ज़ूम करेंगे, तो आपको 6 उंगलियां, अजीब मुड़े हुए हाथ या शार्क जैसे दांत दिख सकते हैं। इसके अलावा, AI तस्वीरों का बैकग्राउंड अक्सर धुंधला होता है और वहां मौजूद शब्दों (Text) की स्पेलिंग पूरी तरह से गलत या उल्टी-सीधी होती है।
Q2: क्या रिवर्स इमेज सर्च से AI फेक प्रोफाइल हमेशा पकड़ी जा सकती है?
हमेशा नहीं। अगर स्कैमर ने गूगल से किसी असली इंसान की फोटो चुराई है, तो रिवर्स इमेज सर्च (जैसे Google Lens) उसे तुरंत पकड़ लेगा। लेकिन अगर उसने Midjourney जैसे टूल से एकदम नया AI चेहरा बनाया है, तो शायद आपको सटीक मैच न मिले। फिर भी, रिवर्स इमेज सर्च काम का है क्योंकि यह आपको उसी से मिलती-जुलती और भी कई AI तस्वीरें दिखा देगा। इससे आपको तुरंत शक हो जाना चाहिए कि यह प्रोफाइल एक असली इंसान की नहीं है।
Q3: इंस्टाग्राम पर फेक अकाउंट से पैसे मांगने पर क्या करें?
अगर कोई अनजान व्यक्ति या आपका कोई ‘नया ऑनलाइन दोस्त’ अचानक से कस्टम ड्यूटी, मेडिकल इमरजेंसी या इन्वेस्टमेंट के नाम पर पैसे मांगे, तो तुरंत बातचीत बंद कर दें। उसे समझाएं नहीं और न ही बहस करें। सबसे पहले उस चैट का स्क्रीनशॉट लें। फिर उस अकाउंट को रिपोर्ट करें (Report > It’s a scam)। इसके बाद उसे तुरंत ब्लॉक कर दें। अगर उसने आपको बैंक अकाउंट नंबर दिया है, तो उस नंबर की शिकायत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कर दें ताकि और लोग न ठगे जाएं।
Q4: अगर मैंने स्कैमर को पैसे भेज दिए हैं तो क्या मुझे रिफंड मिल सकता है?
जी हाँ, रिफंड मिल सकता है, लेकिन इसमें ‘Golden Hour’ का नियम लागू होता है। अगर आपको ठगे जाने का एहसास तुरंत हो गया है, तो बिना एक मिनट बर्बाद किए 1930 पर कॉल करें। अगर आप ट्रांजेक्शन के 2 से 3 घंटे के अंदर पुलिस को जानकारी दे देते हैं, तो वे बैंक से संपर्क करके उस पैसे को स्कैमर के खाते में फ्रीज (Freeze) करवा सकते हैं। इसके अलावा cybercrime.gov.in पर भी अपनी लिखित शिकायत और ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट तुरंत अपलोड करें।
Q5: सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करनी चाहिए या नहीं?
मेरी सलाह हमेशा यही होती है कि जिन्हें आप असल ज़िंदगी में नहीं जानते, उन्हें अपनी पर्सनल सोशल मीडिया स्पेस में एंट्री न दें। लेकिन अगर आप किसी अनजान की रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करना ही चाहते हैं, तो पहले उसका अकाउंट स्कैन करें। देखें कि अकाउंट कब बना है (Account Creation Date), उसके कितने म्यूचुअल फ्रेंड्स हैं और उसकी पोस्ट्स पर कमेंट्स असली इंसानों के हैं या सिर्फ फायर इमोजी (🔥) वाले बॉट्स के। अगर कुछ भी अजीब लगे, तो रिक्वेस्ट डिलीट कर दें।
Q6: डीपफेक वीडियो कॉल को 10 सेकंड में कैसे पहचानें?
डीपफेक वीडियो कॉल को पकड़ने की सबसे अच्छी ट्रिक है चेहरे के सामने रुकावट पैदा करना। कॉल उठाते ही सामने वाले से कहें कि वह अपना हाथ अपने चेहरे के सामने से गुजारे या अपना सिर दाएँ-बाएँ तेज़ी से घुमाए। डीपफेक AI को इस अचानक हुए मूवमेंट को प्रोसेस करने में समय लगता है। जैसे ही हाथ चेहरे के आगे आएगा, स्कैमर का असली चेहरा एक सेकंड के लिए दिख जाएगा या वीडियो बुरी तरह से ब्लर (Blur) हो जाएगा। असली इंसान को ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
Q7: क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स AI प्रोफाइल्स को खुद डिलीट नहीं कर सकते?
वे कोशिश ज़रूर करते हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम के पास भी अपने AI सिक्योरिटी सिस्टम हैं जो रोज़ाना लाखों फेक अकाउंट्स को ब्लॉक करते हैं। लेकिन समस्या यह है कि स्कैमर्स हर मिनट हज़ारों नए अकाउंट बना रहे हैं। यह एक चूहे-बिल्ली का खेल है जिसमें स्कैमर्स की तकनीक कभी-कभी प्लेटफॉर्म की सिक्योरिटी से एक कदम आगे निकल जाती है। इसलिए, जब तक कोई असली यूज़र (जैसे आप) उस अकाउंट को रिपोर्ट नहीं करता, तब तक सिस्टम के लिए हर एक फेक आईडी को पकड़ना तकनीकी रूप से असंभव है।
Conclusion:
ऑनलाइन दुनिया जितनी खूबसूरत और आसान दिखती है, अंदर से वह उतनी ही पेचीदा हो चुकी है। अब वह समय बीत गया जब हम सिर्फ एक तस्वीर देखकर किसी पर भरोसा कर लेते थे। आज के समय में जब AI सिर्फ एक कमांड पर इंसान जैसे दिखने वाले चेहरे बना सकता है, तब हमें भी अपनी सोच को अपग्रेड करना होगा।
हमने इस गाइड में गहराई से समझा कि कैसे AI उंगलियों और दांतों में गलतियां करता है। हमने रिवर्स इमेज सर्च की ताकत को जाना और डीपफेक वीडियो कॉल के उस जादुई ग्लिच (हाथ घुमाने वाली ट्रिक) को भी समझा जो किसी भी बड़े से बड़े स्कैमर को कुछ ही सेकंड में बेनकाब कर सकता है।
सच कहूँ तो, डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपको इंटरनेट छोड़ कर जाने की या सोशल मीडिया डिलीट करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बस थोड़ी सी जागरूकता आपको और आपके परिवार को बहुत बड़े नुकसान से बचा सकती है। अगली बार जब भी कोई अनजान इंसान आपसे बहुत मीठी-मीठी बातें करे या कोई ‘शानदार’ इन्वेस्टमेंट का मौका लेकर आए, तो बस एक गहरी सांस लें। भावनाओं में बहने के बजाय, उन टेक्निकल ट्रिक्स का इस्तेमाल करें जो आज आपने सीखी हैं।
अब आपके पास वह ज्ञान है जो 90 प्रतिशत इंटरनेट यूज़र्स के पास नहीं है। आप जानते हैं कि AI से Fake Profile पहचानें — Social Media पर Scammer कैसे पकड़ें।
अब आपकी बारी है! इस जानकारी को सिर्फ अपने तक सीमित न रखें। इस आर्टिकल को अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें, खासकर उन लोगों के साथ जो तकनीक को इतना नहीं समझते। क्या आपने कभी कोई फेक अकाउंट पकड़ा है? आपका अनुभव कैसा रहा? नीचे कमेंट करके मुझे ज़रूर बताएं, मैं आपके सवालों का जवाब देने का इंतज़ार कर रहा हूँ!
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