600 किमी दूर से हाजिरी! भोपाल के डॉक्टरों ने ‘Sarthak App’ को ऐसे बनाया मजाक
डॉक्टरों को हम “धरती का भगवान” कहते हैं, लेकिन भोपाल के कुछ डॉक्टरों ने इस गरिमा को ही ताक पर रख दिया है। मामला थोड़ा फिल्मी है, पर हकीकत में डराने वाला। कल्पना कीजिए, डॉक्टर साहब की ड्यूटी भोपाल में है, लेकिन वो 600 किलोमीटर दूर बैठकर मोबाइल पर अपनी हाजिरी लगा रहे हैं। जी हां, भोपाल की स्वास्थ्य सेवाओं में एक ऐसा ‘हाईटेक फर्जीवाड़ा’ सामने आया है जिसने विभाग की नींद उड़ा दी है।
खेल क्या था? (Sarthak App vs. Doctors)
मध्य प्रदेश सरकार ने डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक एप’ (Sarthak App) बनाया था। मकसद नेक था—ताकि मरीज खाली हाथ न लौटें। लेकिन गौतम नगर और बाग मुगालिया स्थित मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के डॉक्टरों ने इस तकनीक में ही सेंध लगा दी।
यहाँ सेवा देने के बजाय, ये ‘धरती के भगवान’ घर बैठे वेतन बटोरने के जुगाड़ में लगे थे।
केस 1: 600 किलोमीटर का फासला और ‘जादुई’ अटेंडेंस
सबसे हैरान करने वाला मामला डॉ. संजीव सिंह (संजीवनी क्लीनिक, गौतम नगर) का है। जब सीएमएचओ ऑफिस ने एप के डेटा की समीक्षा की, तो उनके होश उड़ गए।
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डॉक्टर साहब की लोकेशन कार्यस्थल से 500 से 600 किलोमीटर दूर मिल रही थी।
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हैरानी की बात तो ये है कि उनकी डेली अटेंडेंस भी क्लीनिक से करीब 11 किमी दूर से दर्ज की जा रही थी।
केस 2: चेहरा बदल गया, पर पकड़े गए
दूसरा मामला बाग मुगालिया के डॉ. मिन्हाज का है। यहाँ तो गजब ही हो गया। एप में अटेंडेंस के लिए जो फोटो अपलोड किए गए, उनमें अलग-अलग लोगों के चेहरे दिखाई दे रहे थे। इसे आप सीधे तौर पर ‘प्रॉक्सी अटेंडेंस’ कह सकते हैं। यानी काम कोई और करे या न करे, एप में चेहरा किसी और का चमक रहा था।
मरीजों की जान के साथ ये मजाक क्यों?
सच तो ये है कि जब डॉक्टर साहब हवा में हाजिरी लगा रहे थे, तब क्लीनिक के बाहर गरीब मरीज इलाज के इंतज़ार में बैठे थे। सरकारी पैसा और जनता का भरोसा, दोनों को यहाँ चूना लगाया जा रहा था।
भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है:
“सार्थक एप की समीक्षा में यह धोखाधड़ी पकड़ी गई है। यह न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि एक अवैधानिक कृत्य है। दोनों डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जवाब ठीक नहीं मिला, तो निलंबन पक्का है।”
क्या वाकई तकनीक को मात दी जा सकती है?
ये मामला हमें बताता है कि डिजिटल सिस्टम कितना भी मजबूत हो, अगर नीयत में खोट है तो लोग रास्ता निकाल ही लेते हैं। लेकिन विभाग की डिजिटल मॉनिटरिंग ने दिखा दिया कि आप 600 किमी दूर बैठकर सिस्टम की आँखों में ज्यादा दिन धूल नहीं झोंक सकते।
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